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शान्ति पर्व
अध्याय २०२
भीष्म उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव तेन नादेन मोहितम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २४९
स्थाणुरु उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव भूतग्रामं चतुर्विधम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव वहुरूपस्ततः स्मृतः ||
८६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव वहुरूपस्ततः स्मृतः ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
व्राह्मण उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव विद्ध्युभे मनसी मम |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०
भीम उवाच
स्थावरं जङ्गमं चैव सर्वं प्राणस्य भोजनम् ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २१
व्राह्मण उवाच
स्थावरं मत्सकाशे वै जङ्गमं विषय़े तव ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
स्थावराणां च भूतानां जङ्गमानां च तेजसा |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
स्थावराणां च भूतानां जातय़ः षट्प्रकीर्तिताः |
२३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४४
व्रह्मो उवाच
स्थावराणां च भूतानां सर्वेषामविशेषतः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भरद्वाज उवाच
स्थावराणां न दृश्यन्ते शरीरे पञ्च धातवः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
स्थावराणां पतिश्चैव निय़मेन्द्रिय़वर्धनः ||
१४८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १८
व्राह्मण उवाच
स्थावराणि च भूतानि इत्येषा पौर्विकी श्रुतिः ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १९२
मार्कण्डेय़ उवाच
स्थावराणि च भूतानि जङ्गमानि तथैव च |
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३६
व्रह्मो उवाच
स्थावराणि च भूतानि पशवो वाहनानि च |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
स्थावराणि च भूतानि संश्रय़न्ति जलाशय़म् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय १८७
देव उवाच
स्थावराणि च भूतानि संहराम्यात्ममाय़या ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
स्थावरेभ्यो विशिष्टानि जङ्गमान्युपलक्षय़ेत् |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३९
व्रह्मो उवाच
स्थावरेषु च भूतेषु तिर्यग्भावगतं तमः |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १३
वासुदेव उवाच
स्थावरेष्विव शान्तात्मा तस्य प्रादुर्भवाम्यहम् ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५३
सञ्जय़ उवाच
स्थास्यते रक्षितो वीरैः सिन्धुराड्युद्धदुर्मदैः ||
२७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २१८
श्रीरु उवाच
स्थास्यामि नित्यं देवेन्द्र यथा त्वय़ि निवोध तत् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय २३८
वैशम्पाय़न उवाच
स्थास्यामीह भवत्पादौ शुश्रूषन्नरिमर्दन ||
४७ ख
वन पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
स्थास्येते सिंहविक्रान्तावश्विनाविव दुःसहौ |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
स्थित आसीदन्तरिक्षे स तदेति श्रुतं मय़ा ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५३
वासुदेव उवाच
स्थित इत्यभिजानीहि मा तेऽभूदत्र संशय़ः ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय १९
द्रौपद्यु उवाच
स्थितं पूर्वं जलं यत्र पुनस्तत्रैव तिष्ठति |
७ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
स्थितं माल्यवतोऽभ्याशे सुग्रीवं सोऽभ्यभाषत ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
स्थितं रणाय़ महते भीष्मेण युधि पालितम् ||
१५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
युधिष्ठिर उवाच
स्थितं वित्त हि मां देवाः सहितं तैर्महात्मभिः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय २८१
मार्कण्डेय़ उवाच
स्थितं सत्यवतः पार्श्वे निरीक्षन्तं तमेव च ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
स्थितः प्रिय़हिते जिष्णोः स एष पुरुषर्षभ |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
स्थितः प्रिय़हिते नित्यमतीव भरतर्षभ ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
स्थितः प्रिय़े कौरवसत्तमस्य; रथं सचक्रः पुनरारुरोह ||
१०१ ख
सभा पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
स्थितः सेनापतिर्वोऽहं मन्यध्वं किं नु साम्प्रतम् |
१४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १०४
नारद उवाच
स्थितः स्थाणुरिवाभ्याशे निश्चेष्टो मारुताशनः ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
अर्जुन उवाच
स्थितधीः किं प्रभाषेत किमासीत व्रजेत किम् ||
५४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २४
अर्जुन उवाच
स्थितप्रज्ञस्य का भाषा समाधिस्थस्य केशव |
५४ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
स्थितमावृत्य पन्थानं येन यान्ति कुरूद्वहाः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
स्थितलिङ्गश्च यन्नित्यं तस्मात्स्थाणुरिति स्मृतः ||
९२ ख
सभा पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
स्थितश्च वचने तस्य सदाहमपि पुत्रक ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
स्थितस्य वाणैर्युधि निर्विभेद; गाण्डीवमुक्तैरशनिप्रकाशैः ||
२२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३०
पितर ऊचुः
स्थितस्य वृक्षमूलेऽथ तस्य चिन्ता वभूव ह |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २१७
वलिरु उवाच
स्थिता मय़ीति तन्मिथ्या नैषा ह्येकत्र तिष्ठति ||
५७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
स्थिता युद्धाय़ महते ततो युद्धमवर्तत ||
४० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
स्थिता रणे महाराज महत्या सेनय़ा वृताः ||
३६ ग
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
स्थिता राजन्महासेना योद्धुकामाः समन्ततः ||
५३ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
जनमेजय़ उवाच
स्थिता राज्ये महात्मानस्तन्मे व्याख्यातुमर्हसि ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
स्थिता समुद्रवसना सशैलवनकानना |
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९७
भीष्म उवाच
स्थिता सा तु मुहूर्तं वै भर्तुः शापभय़ाच्छुभा |
१२ क