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शान्ति पर्व
अध्याय ३१२
भीष्म उवाच
रत्नानि च विचित्राणि शुकः पश्यन्न पश्यति ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ११८
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नानि चाप्युपादाय़ वहूनि शतशो नराः |
११ क
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
रत्नानि चैव राजर्षिं स्वय़मेवोपतस्थिरे ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
रत्नानि निधय़ः सर्वे वेदाश्चाख्यानपञ्चमाः |
३५ क
सभा पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नानि भूरीण्यादाय़ सम्प्रतस्थे युधां पतिः ||
१४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नानि मुक्तामणिविद्रुमं च; शृङ्गीसुवर्णं रजतं च शुभ्रम् |
३१ क
वन पर्व
अध्याय १४२
युधिष्ठिर उवाच
रत्नानि यस्य वीर्येण दिव्यान्यासन्पुरा मम |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नान्यनेकान्यादाय़ स्त्रिय़ोऽश्वानाय़ुधानि च ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नान्यादाय़ भूरीणि प्रय़यौ पुष्करेक्षणः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय २१३
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नान्यादाय़ शुभ्राणि दत्तानि कुरुसत्तमैः ||
५६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
रत्नैः प्रलोभय़ामासुः स्त्रीभिश्चोभौ पुनः पुनः |
११ क
वन पर्व
अध्याय २८४
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नैः स्त्रीभिस्तथा भोगैर्धनैर्वहुविधैरपि |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३३
सञ्जय़ उवाच
रत्नैरलङ्कृतं दिव्यैर्व्यभ्रं निशि यथा नभः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
भीष्म उवाच
रत्नैर्गन्धैश्च वहुभिर्वस्त्रैश्च समलङ्कृताम् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
रत्नैर्धनैश्च पशुभिः सस्यैश्चापि पृथग्विधैः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नैश्च वहुभिस्तत्र धर्मराजमवर्धय़न् ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
रत्नोपकीर्णां वसुधां यो ददाति पुरन्दर |
५७ क
सभा पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नोपहारकर्मण्यो वभूव स समागमः ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
नारद उवाच
रत्नौघतर्पितैस्तुष्टैर्द्विजैश्च समुदाहृतम् |
५९ ख
आदि पर्व
अध्याय ११९
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नौघान्द्विजमुख्येभ्यो दत्त्वा ग्रामवरानपि ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२४
वैशम्पाय़न उवाच
रत्नौषधिसमेतेन रत्नाङ्गुलितलेन च |
१४ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
रत्यर्थं भवतां ह्येषा निर्मिता शूलपाणिना ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४४
भीष्म उवाच
रत्यर्थमपि शूद्रा स्यान्नेत्याहुरपरे जनाः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
करालजनक उवाच
रत्यर्थमभिसंरोधादन्योन्यगुणसंश्रय़ात् |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
रत्या मत्या च गत्या च यय़ाहमभिसन्धिता |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय २९९
याज्ञवल्क्य उवाच
रत्रिरेतावती चैव मनसश्च नराधिप ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
रथ आरोप्यतां शङ्खश्चक्रं च गदय़ा सह |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १६८
भीष्म उवाच
रथ एकगुणो मह्यं मतः परपुरञ्जय़ः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
रथ एव महेष्वासः कृपणं पर्यदेवय़त् ||
१२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
रथ एष महाराज मतो मम नरर्षभः |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
रथं च दिव्याश्वय़ुजं कपिप्रवरकेतनम् |
८ क
आदि पर्व
अध्याय २१५
वैशम्पाय़न उवाच
रथं च मेघनिर्घोषं सूर्यप्रतिमतेजसम् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय १६९
अर्जुन उवाच
रथं च रविसङ्काशं प्राद्रवन्गणशः स्त्रिय़ः ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८८
सञ्जय़ उवाच
रथं च वारय़ामास कुञ्जरेण सुतस्य ते ||
७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
रथं च विक्षोभ्य ननाद नर्दत; स्ततोऽस्य गान्धारपतिः शिरोऽहरत् ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
रथं च शकलीकर्तुं सव्यसाची प्रचक्रमे ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
रथं च शतशो राजन्व्यधमत्तस्य धन्विनः ||
३५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
रथं च शुभ्रं सौवर्णं दद्यां तस्मै स्वलङ्कृतम् |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
रथं च स्वं समास्थाय़ धनुरादाय़ चापरम् |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय २
कर्ण उवाच
रथं चाग्र्यं हेमजालावनद्धं; रत्नैश्चित्रं चन्द्रसूर्यप्रकाशैः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
रथं चान्यैः सुवहुभिश्चक्रे विशकलं शरैः ||
६६ ग
विराट पर्व
अध्याय २१
वैशम्पाय़न उवाच
रथं चाश्वतरीय़ुक्तमस्तु नौ भीरु सङ्गमः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
रथं तत्रैव सन्त्यज्य प्राद्रवन्महतो भय़ात् ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
रथं तु दिव्यं कौन्तेय़ः सर्वा विभ्राजय़न्दिशः |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २४
देवा ऊचुः
रथं ते कल्पय़िष्याम देवेश्वर महौजसम् ||
६६ ख
सभा पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
रथं ध्वजं सभां चैव युधिष्ठिरमभाषत ||
६ ख
सभा पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
रथं ध्वजं सभां चैव युधिष्ठिरमभाषत ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
रथं नागं हय़ं चापि पत्तिनश्च विशां पते |
२९ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
रथं नागाः समासाद्य धुरि गृह्य च मारिष |
६० क
कर्ण पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
रथं पश्य च मे कॢप्तं सदश्वैर्वातवेगितैः |
२७ ख