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उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मा नृपतिः कर्षमाणो वरूथिनीम् ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मा राजेन्द्र पाञ्चाल्यं पार्थिवं प्रति ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मा राजेन्द्र रोषादार्तिं जगाम ह ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९०
भीष्म उवाच
हिरण्यवर्मेति नृपो योऽसौ दाशार्णकः स्मृतः |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
हिरण्यवाहः शरणः कक्षकः कालदन्तकः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
हिरण्यवाहवे चैव उग्राय़ पतय़े दिशाम् |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८
संवर्त उवाच
हिरण्यवाहवे राजन्नुग्राय़ पतय़े दिशाम् ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
हिरण्यवाहुश्च तथा गुहापालः प्रवेशिनाम् ||
११२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
हिरण्यविन्दुं विक्षोभ्य प्रय़तश्चाभिवाद्य तम् |
१० क
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यविन्दुः कथितो गिरौ कालञ्जरे नृप ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय २०७
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यविन्दोस्तीर्थे च स्नात्वा पुरुषसत्तमः |
४ क
वन पर्व
अध्याय १४५
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यशिखरं चैव तच्च विन्दुसरः शिवम् ||
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यशृङ्गः सुमहान्दिव्यो मणिमय़ो गिरिः ||
४० ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यशृङ्गो भगवान्महामणिमय़ो गिरिः ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
हिरण्यष्ठीविनः कश्चित्पक्षिणो वनगोचरान् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यसदृशैः पुष्पैर्दावाग्निसदृशैरपि |
६१ क
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
हिरण्यस्य सुवर्णस्य यानय़ुग्यस्य वाससाम् |
९ क
सभा पर्व
अध्याय ३२
वैशम्पाय़न उवाच
हिरण्यस्य सुवर्णस्य रत्नानां चान्ववेक्षणे |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२६
व्यास उवाच
हिरण्यहस्ताय़ गतो लोकान्देवैरभिष्टुतान् ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
हिरण्याक्षं हनिष्यामि दैतेय़ं वलगर्वितम् |
७३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
हिरण्वती वितस्ता च तथैवेक्षुमती नदी |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
हिरण्वतीं चित्रवतीं चित्रसेनां च निम्नगाम् |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५७
सञ्जय़ उवाच
हिरण्वत्यां निविष्टेषु पाण्डवेषु महात्मसु |
१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
हीनं पुरुषकारेण कर्म त्विह न सिध्यति ||
१९ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय २
कृप उवाच
हीनं पुरुषकारेण यदा दैवेन वा पुनः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
पूजन्यु उवाच
हीनं पुरुषकारेण सस्यं नैवाप्नुते पुनः ||
७५ ख
आदि पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
हीनं विदित्वा चात्मानं व्राह्मणेन वलेन च |
१७ क
विराट पर्व
अध्याय ४४
कृप उवाच
हीनकालं तदेवेह फलवन्न भवत्युत |
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
हीनकोशं हि राजानमवजानन्ति मानवाः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय १३४
युधिष्ठिर उवाच
हीनकोशान्महाकोशः प्रय़ोगैर्घातय़ेद्ध्रुवम् ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
हीनतेजा ह्यसंहृष्टो नैव जातु व्यवस्यति |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
हीनपुष्पाग्रशाखस्त्वं शीर्णाङ्कुरपलाशवान् |
२४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
हीनप्रज्ञो दौष्कुलेय़ो नृशंसो; दीर्घवैरी क्षत्रविद्यास्वधीरः |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २
भीष्म उवाच
हीनप्रतिज्ञमत्रैनं वधिष्यामीति चिन्तय़न् ||
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
हीनवर्णस्तृतीय़ाय़ां शूद्र उग्र इति स्मृतः ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
हीनश्च वलवीर्याभ्यां कर्शय़ंस्तं परावसेत् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४४
कर्ण उवाच
हीनसंस्कारसमय़मद्य मां समचूचुदः ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय १९६
कर्ण उवाच
हीनस्य करणैः सर्वैरुच्छ्वासपरमस्य च |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
हीनस्वार्थं पाण्डवेय़ैर्विरोधे; हत्वा कर्णं धिष्ठितार्थो भवाद्य ||
६४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
हीना आस्तरणैश्चैव खलीनैश्च विवर्जिताः |
१०७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
हीना सूर्येन्दुनक्षत्रैर्द्यौरिवाभाति भारती ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४८
भीष्म उवाच
हीना हीनात्प्रसूय़न्ते वर्णाः पञ्चदशैव ते ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५७
युधिष्ठिर उवाच
हीनां पार्थिवसङ्घातैः श्रीमद्भिः पृथिवीमिमाम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३
युधिष्ठिर उवाच
हीनां पार्थिवसिंहैस्तैः श्रीमद्भिः पृथिवीमिमाम् ||
५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १७
वैशम्पाय़न उवाच
हीनां हस्तिगवाश्वेन किं नु जीवामि माधव ||
२१ ख
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
हीनाः कृष्णेन पुत्रैश्च नाशकत्सोऽभिवीक्षितुम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
हीनाः सत्त्वेन सूक्ष्मेण ततो वैकारिकाः स्मृताः ||
७३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
शल्य उवाच
हीनाः सत्यजिता वीरास्तिष्ठन्ति परमौजसः ||
६७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४७
वासुदेव उवाच
हीनाङ्गं पृथिवीपालं नाभिनन्दन्ति देवताः |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
हीनाङ्गानतिरिक्ताङ्गान्विद्याहीनान्वय़ोधिकान् |
५९ क