chevron_left  विमलस्यarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
विमलस्य विशुद्धस्य शुद्धानिलनिषेवणात् ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय १७९
वैशम्पाय़न उवाच
विमलाकाशनक्षत्रा शरत्तेषां शिवाभवत् |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९६
वसिष्ठ उवाच
विमलात्मा च भवति समेत्य विमलात्मना ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
विमलादित्यसङ्काशस्तस्थौ कुरुचमूपतिः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ८२
पुलस्त्य उवाच
विमलाशोकमासाद्य विराजति यथा शशी |
६२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५०
नाग उवाच
विमले यन्मय़ा दृष्टमम्वरे सूर्यसंश्रय़ात् ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
विमलैराय़सैस्तीक्ष्णैरविध्यत महारणे ||
५७ ख
वन पर्व
अध्याय १४६
वैशम्पाय़न उवाच
विमलैर्धातुविच्छेदैः काञ्चनाञ्जनराजतैः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
विमलैर्निशितैः शस्त्रैर्हय़ानां च प्रकीर्णकैः ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
विमलो वितमस्कश्च निर्लिङ्गोऽलिङ्गसञ्ज्ञितः ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
विमलोदा भगवती व्रह्मणा यजता पुनः |
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमानं चन्द्रशुभ्राभं दिव्यं समधिगच्छति ||
११६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
विमानं जाज्वलद्भासा स्थितं प्रवरमम्वरे ||
३८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६९
व्राह्मण उवाच
विमानं दिव्यमास्थाय़ यय़ौ दिवमरिन्दम ||
२९ ख
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
विमानं देवराजस्य शुशुभे खेचरं तदा ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय २५९
मार्कण्डेय़ उवाच
विमानं पुष्पकं तस्य जहाराक्रम्य रावणः |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
विमानं पुष्पकं दिव्यं नैरृतैश्वर्यमेव च ||
२७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमानं मण्डलावर्तमावर्तगहनावृतम् |
४३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ५४
भीष्म उवाच
विमानच्छन्दकांश्चापि प्रासादान्पद्मसंनिभान् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७४
भीष्म उवाच
विमाननात्तय़ोरेव प्रजा नश्येय़ुरेव ह |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
विमानपालाः शतशः स्वर्गद्वाराभिरक्षिणः |
२१ क
सभा पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
विमानप्रतिमां चक्रे पाण्डवस्य सभां मुदा ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
विमानप्रतिमां चापि मय़ेन सुकृतां सभाम् |
८९ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४९
कृष्ण उवाच
विमानमागमत्स्वर्गान्मृगव्याधनिनीषय़ा ||
३८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
विमानमारुह्य महानुभावः; सर्वैर्देवैः परिसंस्तूय़मानः |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमानमुत्तमं दिव्यं सुसुखी ह्यधिरोहति ||
७९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमानमुत्तमं दिव्यमास्थाय़ सुमनोहरम् ||
१०१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
विमानशतकोटीभिरावृतं पुण्यकीर्तिभिः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
विमानसम्वाधमभूत्समन्ता; त्सवेणुवीणापणवानुनादम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
विमानस्थं सुकृतिभिः पूज्यमानं महात्मभिः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२४
भीष्म उवाच
विमानस्था शुभे भासि सहस्रगुणमोजसा ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
विमानस्थौ तु तौ राजँल्लुव्धको वै ददर्श ह |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
विमानाग्रगता देवा व्रह्मशक्रपुरोगमाः |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय २७२
भीष्म उवाच
विमानाग्र्यैर्महाराज सिद्धाश्च भरतर्षभ |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
व्रह्मो उवाच
विमानानि च युक्तानि कामगानि च वासव ||
३९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
विमानानि च रम्याणि रत्नानि विविधानि च ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६४
भीष्म उवाच
विमानानि विचित्राणि गन्धर्वाणां महात्मनाम् ||
१४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
विमानानीव राजेन्द्र निविष्टानि महीतले ||
७७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १०९
सुपर्ण उवाच
विमानान्यनुरूपाणि कामभोग्यानि गालव ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ९२
उतथ्य उवाच
विमानितो हतोत्क्रुष्टस्त्रातारं चेन्न विन्दति |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
विमानितो हतोऽऽक्रुष्ट एवं सिद्धिं गमिष्यति ||
१८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमाने काञ्चने दिव्ये हंसय़ुक्ते मनोरमे |
९८ क
विराट पर्व
अध्याय ५१
वैशम्पाय़न उवाच
विमाने देवराजस्य समदृश्यन्त सुप्रभाः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमाने नगराकारे सूर्यवत्सूर्यसंनिभे |
१२६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १५
शल्य उवाच
विमाने योजय़ित्वा स ऋषीन्निय़ममास्थितान् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
विमाने स्फाटिके दिव्ये सर्वरत्नैरलङ्कृते ||
१०५ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
विमानेन महार्हेण हंसय़ुक्तेन भास्वता ||
१९ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
विमानेन सदाभ्येति पिता तव ममान्तिकम् ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७८
वसिष्ठ उवाच
विमानेनार्कवर्णेन दिवि राजन्विराजता ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
विमानेभ्य इव भ्रष्टाः सिद्धाः पुण्यक्षय़ाद्यथा ||
८६ ख