आदि पर्व
अध्याय
९०
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच कुन्तीम् |
७६ क
वन पर्व
अध्याय
२७०
मार्कण्डेय़ उवाच
उवाच कुम्भकर्णस्य कर्मकालोऽय़मागतः ||
१९ ख
विराट पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच कृष्णामभिसान्त्वय़ंस्तदा; मृगेन्द्रकन्यामिव जम्वुको वने ||
१० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच के भवन्तो वै किमर्थमिह तिष्ठथ ||
३९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
उवाच को न्वेष ममाद्य नागः; स्वय़ं य आगाद्गरुडस्य वक्त्रम् ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
उवाच कोपं प्रतिसंहरेति; गतिर्भवान्केशव पाण्डवानाम् ||
९९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
उवाच कोपान्निःश्वस्य दुर्योधनमिदं वचः ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच कौरवं राजा राजानं तं वृषस्तदा ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३९
भीष्म उवाच
उवाच कौशिकं रात्रौ व्रह्मन्किं ते चिकीर्षितम् ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
एकतद्वितत्रिता ऊचुः
उवाच खस्थं किमपि भूतं तत्राशरीरकम् ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१२
भीष्म उवाच
उवाच गच्छेति तदा जनकं मिथिलेश्वरम् |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५६
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच गमनं ते च तथेत्येवाव्रुवंस्तदा ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
उवाच गर्भः कौन्तेय़ पञ्चभूतसमन्वितः ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११४
नारद उवाच
उवाच गालवं दीनो राजर्षिरृषिसत्तमम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च कुरुश्रेष्ठो भीमसेनमिदं वचः ||
२१ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महातेजा द्रौपदीं पाण्डुनन्दनः |
६१ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
उवाच च महात्मानं काकुत्स्थं दैन्यमास्थितम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
८०
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महात्मानं धर्मराजं युधिष्ठिरम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१६३
अर्जुन उवाच
उवाच च महादेवो दत्त्वा मेऽस्त्रं सनातनम् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२४
धृतराष्ट्र उवाच
उवाच च महाप्राज्ञः श्रेय़ इच्छामि वेदितुम् ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
१६
कृष्ण उवाच
उवाच च महाप्राज्ञस्तं राजानं महामुनिः |
३० क
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महावाहुः पाञ्चालीं तत्र द्रौपदीम् |
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
१७६
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महासर्पं कामय़ा व्रूहि पन्नग |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महीपालान्राजञ्जलदनिःस्वनः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
४६
सूत उवाच
उवाच च महीपालो दुःखशोकसमन्वितः ||
३४ ग
आदि पर्व
अध्याय
१६४
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च महेष्वासो गन्धर्वं कुरुसत्तमः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च स धर्मात्मा सप्त यूय़ं धरादय़ः |
३६ क
शल्य पर्व
अध्याय
४७
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच च सुरश्रेष्ठस्तां कन्यां सुदृढव्रताम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४२
भीष्म उवाच
उवाच च स्वागतं ते व्रूहि किं करवाण्यहम् |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
११४
लोमश उवाच
उवाच चापि कुपिता लोकेश्वरमिदं प्रभुम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
मार्कण्डेय़ उवाच
उवाच चास्या देव्यास्त्वं साधु शूरं पतिं दिश ||
३४ ग
वन पर्व
अध्याय
१७०
अर्जुन उवाच
उवाच चेदं वचनं प्रीय़माणः कृताञ्जलिः |
५३ क
आदि पर्व
अध्याय
१८९
व्यास उवाच
उवाच चेदं वहुरूपमुग्रं; द्रष्टा शेषस्य भगवंस्त्वं भवाद्य ||
२३ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैतान्राजासौ स्वागतं वोऽस्त्विति प्रभुः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१६२
गन्धर्व उवाच
उवाच चैनं कल्याण्या वाचा मधुरय़ोत्थितम् |
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं कालज्ञः स्मय़न्निव स नारदः |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
उवाच चैनं गोविन्दमसम्भ्रान्तेन चेतसा ||
५९ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय
२
भीष्म उवाच
उवाच चैनं धर्मज्ञं पूर्वमामन्त्र्य नामतः ||
७७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२६३
भीष्म उवाच
उवाच चैनं धर्मात्मा महान्मेऽनुग्रहः कृतः ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
१०६
लोमश उवाच
उवाच चैनं धर्मात्मा वरदोऽस्मीति भारत ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७८
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं धर्मात्मा समन्युः फल्गुनस्तदा |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०५
सञ्जय़ उवाच
उवाच चैनं पुत्रस्ते संरम्भाद्रक्तलोचनः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय
२२०
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं प्रीतात्मा किमिष्टं करवाणि ते ||
३० ग
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं भगवांश्चिरस्यागतमात्मजम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१०
भीष्म उवाच
उवाच चैनं भगवांस्त्र्यम्वकः प्रहसन्निव |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
उवाच चैनं भगवान्पुनरेव जलेश्वरः |
५० क
आदि पर्व
अध्याय
१०
सूत उवाच
उवाच चैनं भगवान्रुरुः संशमय़न्निव |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
२९
सूत उवाच
उवाच चैनं भूय़ोऽपि नाराय़णमिदं वचः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं मधुरं ततः शान्तनवो नृपः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय
३५
वैशम्पाय़न उवाच
उवाच चैनं मधुरं सान्त्वपूर्वमिदं वचः ||
१ ख