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वन पर्व
अध्याय १४
वासुदेव उवाच
विशेषतश्च वक्तव्यं द्यूते पश्यन्ति तद्विदः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८३
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषतश्च वासार्थं सभां ग्रामे वृकस्थले |
१६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७८
भीष्म उवाच
विशेषतस्तपोवृद्धमेवं क्षान्तं मय़ा तव ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६५
भीष्म उवाच
विशेषतस्तु कार्त्तिक्यां द्विजेभ्यः सम्प्रय़च्छति |
१६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
विशेषतस्तु दह्यामि वर्षं पञ्चदशं हि वै |
९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४०
भीष्म उवाच
विशेषतस्तु राजेन्द्र वृत्रहा पाकशासनः ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६१
सञ्जय़ उवाच
विशेषतस्तु शपथं शपित्वा राजसंसदि ||
४३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४५
भीष्म उवाच
विशेषतस्त्वदर्थं च धुरि मा मां निय़ोजय़ |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
धृतराष्ट्र उवाच
विशेषतो नृपतिना विषमः प्रतिभाति मे ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६८
दुःषन्त उवाच
विशेषतो मत्सकाशे दुष्टतापसि गम्यताम् ||
७६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६७
मनुरु उवाच
विशेषतो मनुष्येषु मिथ्यावृत्तिषु नित्यदा ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
विशेषतो रथस्थेन राज्ञश्चैव हितैषिणा ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
विशेषतो विकवचः श्रान्तश्चापः समाश्रितः |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २
व्राह्मणा ऊचुः
विशेषतो व्राह्मणेषु सदाचारावलम्विषु ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
विशेषतोऽनपकृते परेणापकृते सति ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय १४१
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषतोऽनपकृते परेणापकृते सति ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
विशेषधर्मा नृपते वर्णानां परिकीर्तिताः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
जनक उवाच
विशेषधर्मान्वर्णानां प्रव्रूहि भगवन्मम |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
विशेषधर्मो विप्राणां रक्षा क्षत्रस्य शोभना ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषनिय़माश्चैषामविशेषाश्च सन्त्युत ||
४५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७६
युधिष्ठिर उवाच
विशेषमिच्छामि महानुभाव; श्रोतुं समर्थो हि भवान्प्रवक्तुम् ||
९ ख
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषवांश्च सततं क्षत्रिय़ः श्रिय़मर्छति |
४६ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३३
विदुर उवाच
विशेषविच्छ्रुतवान्क्षिप्रकारी; तं सर्वलोकः कुरुते प्रमाणम् ||
८५ ख
वन पर्व
अध्याय २४५
व्यास उवाच
विशेषस्त्वत्र विज्ञेय़ो न्याय़ेनोपार्जितं धनम् |
३१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
विशेषाः पञ्चभूतानां तेषां वित्तं विशेषणम् ||
३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
व्रह्मो उवाच
विशेषाः पञ्चभूतानामित्येषा वैदिकी श्रुतिः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९५
वसिष्ठ उवाच
विशेषाणां मनस्तेषां विद्यामाहुर्मनीषिणः |
५ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषात्सर्वमेवैतत्सञ्जज्ञे राजकर्मणः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषार्थी ततो भीष्मः पौत्राणां विनय़ेप्सय़ा |
१ क
वन पर्व
अध्याय २८६
कर्ण उवाच
विशेषेण द्विजातीनां सर्वेषां सर्वदा सताम् |
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८३
युधिष्ठिर उवाच
विशेषेण नरेन्द्राणामिति धर्ममवेक्षताम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
विशेषेण हि वार्ष्णेय़ चित्रां पीडय़ते ग्रहः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
विशेषो हि त्वय़ा भद्रे व्रते ह्यस्मिन्समर्पितः |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
वृहस्पतिरु उवाच
विशेषोऽस्ति महांस्तात भार्गवस्य महात्मनः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११७
सञ्जय़ उवाच
विशेषय़ति वार्ष्णेय़ं सात्यकिं सत्यविक्रमम् ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४९
सञ्जय़ उवाच
विशेषय़न्तावन्योन्यं माय़ाभिरतिमाय़िनौ |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
विशेषय़न्सूतपुत्रं भीमस्तिष्ठेति चाव्रवीत् ||
४१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
राम उवाच
विशेषय़ितुमत्यर्थमुत्तमास्त्राणि दर्शय़न् ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
विशेषय़िष्यञ्शिष्यं च द्रोणो राजन्पराक्रमी |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
विशेषय़िष्यन्नाचार्यं सर्वास्त्रविदुषां वरम् |
१४ ख
विराट पर्व
अध्याय ४
धौम्य उवाच
विशेषय़ेन्न राजानं योग्याभूमिषु सर्वदा ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३०
सञ्जय़ उवाच
विशोकं त्रिभिराजघ्ने ध्वजमेकेन पत्रिणा ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
विशोकं वीक्ष्य निर्भिन्नं भीमसेनः प्रतापवान् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७
युधिष्ठिर उवाच
विशोकं स्थानमातिष्ठ इह चामुत्र चाव्ययम् ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
विशोकः सम्प्रहृष्टश्च क्षणेन समपद्यत ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
विशोकश्चाभवद्राजा श्रुत्वा तं निनदं महत् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
विशोकस्तमुवाचेदं धृष्टद्युम्नं कृताञ्जलिः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
विशोकस्य वचः श्रुत्वा धृष्टद्युम्नोऽपि पार्षतः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
कपिल उवाच
विशोका नष्टरजसस्तेषां लोकाः सनातनाः |
४ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
विशोकां कुरु मां क्षिप्रमशोक प्रिय़दर्शन |
९९ क