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शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नाः शान्तात्मानो जितेन्द्रिय़ाः ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नाः सर्वे युद्धाभिनन्दिनः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
वेदाध्ययनसम्पन्नाञ्शीलवृत्तसमन्वितान् ||
१७ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ५१
सञ्जय़ उवाच
वेदाध्याय़िनमत्यर्थं संशितं वा द्विजोत्तमम् |
२९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७२
व्रह्मो उवाच
वेदाध्याय़ी गोषु यो भक्तिमांश्च; नित्यं दृष्ट्वा योऽभिनन्देत गाश्च |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
वेदाध्याय़ी धर्मपरः कुले जातो यशस्विनि |
८ क
वन पर्व
अध्याय २०५
व्याध उवाच
वेदाध्याय़ी सुकुशलो वेदाङ्गानां च पारगः |
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ९४
गङ्गो उवाच
वेदानधिजगे साङ्गान्वसिष्ठादेव वीर्यवान् |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
भीष्म उवाच
वेदानधीत्य धर्मेण राजशास्त्रं च केवलम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६३
भीष्म उवाच
वेदानधीत्य धर्मेण राजशास्त्राणि चानघ |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१३
जनक उवाच
वेदानधीत्य निय़तो दक्षिणामपवर्ज्य च |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पितो उवाच
वेदानधीत्य व्रह्मचर्येण पुत्र; पुत्रानिच्छेत्पावनार्थं पितॄणाम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
वेदानध्यापय़त्तत्र ऋषिः सारस्वतः पुरा ||
४३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
जनमेजय़ उवाच
वेदानध्यापय़ामास पुरा सारस्वतो मुनिः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
वेदानध्यापय़ामास पुरा सारस्वतो मुनिः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदानध्यापय़ामास महाभारतपञ्चमान् |
७४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदानध्यापय़ामास महाभारतपञ्चमान् |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
वेदानध्यापय़ामास व्यासः शिष्यान्महातपाः ||
२३ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
वेदाननेकधा कर्तुं यदि ते रुचितं विभो ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२८
श्रीभगवानु उवाच
वेदानवाप्य चतुरः साङ्गोपाङ्गान्सनातनान् |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
पराशर उवाच
वेदानां च स वै व्यस्ता कुरुवंशकरस्तथा |
३० क
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
वेदानां चानुपूर्व्येण एतद्विद्वन्व्रवीमि ते ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
वेदानां मातरं पश्य मत्स्थां देवीं सरस्वतीम् ||
५२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
वेदानां लेखकाश्चैव ते वै निरय़गामिनः ||
७० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वेदानामालय़श्चापि वभूवाश्वशिरास्ततः ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदानावर्तय़न्साङ्गान्भारतार्थांश्च सर्वशः |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय ३०
वैशम्पाय़न उवाच
वेदानिव महाभागान्साक्षान्मूर्तिमतो द्विजान् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वेदानृते हि किं कुर्यां लोकान्वै स्रष्टुमुद्यतः ||
३० ग
उद्योग पर्व
अध्याय ९
शल्य उवाच
वेदानेकेन सोऽधीते सुरामेकेन चापिवत् |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
वेदान्कृत्वा धनुः सर्वाञ्ज्यां च सावित्रिमुत्तमाम् ||
२७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
वेदान्कृत्स्नान्व्राह्मणः प्राप्नुय़ाच्च; जय़ेद्राजा पृथिवीं चापि कृत्स्नाम् |
५७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वेदान्तगमनद्वीपं सर्वभूतदय़ोदधिम् |
६८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वेदान्तगो व्राह्मणः स्यात्क्षत्रिय़ो विजय़ी भवेत् |
१२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६८
भीष्म उवाच
वेदान्तनिष्ठस्य वहुश्रुतस्य; प्रज्ञानतृप्तस्य जितेन्द्रिय़स्य |
१९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९५
वैशम्पाय़न उवाच
वेदान्तावभृथस्नाताः सर्व एतेऽपराजिताः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३०
व्यास उवाच
वेदान्तेषु पुनर्व्यक्तं क्रमय़ोगेन लक्ष्यते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
वेदान्यज्ञांश्च शतशः पश्यामृतमथौषधीः ||
५० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदान्वेदाङ्गसंय़ुक्तान्यज्ञान्यज्ञाङ्गसंय़ुतान् |
३० क
शान्ति पर्व
अध्याय १८४
भृगुरु उवाच
वेदाभ्यासश्रवणधारणेन ऋषय़ः अपत्योत्पादनेन प्रजापतिरिति ||
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
वेदार्थं ये न जानन्ति वेद्यं गन्धर्वसत्तम ||
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदार्थान्भारतार्थांश्च जन्म नाराय़णात्तथा ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
वेदार्थान्वेत्तुकामस्य धर्मिष्ठस्य तपोनिधेः |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
वसिष्ठ उवाच
वेदाश्च सोपनिषदो विद्या सावित्र्यथापि च |
६ क
वन पर्व
अध्याय १२६
लोमश उवाच
वेदास्तं सधनुर्वेदा दिव्यान्यस्त्राणि चेश्वरम् |
३० क
विराट पर्व
अध्याय ५३
अर्जुन उवाच
वेदास्तथैव चत्वारो व्रह्मचर्यं तथैव च ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
वेदास्तपश्च त्यागश्च स इदं सर्वमाप्नुय़ात् ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
वेदास्त्वदर्थं जाताश्च जातवेदास्ततो ह्यसि |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
वेदाहं जाजले धर्मं सरहस्यं सनातनम् |
५ क