कर्ण पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
विषाणाभ्यां यथा नागौ प्रतिनागं महाहवे ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
विषाणिनौ नागवराविवोभौ; ततक्षतुः संय़ुगजातदर्पौ ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
विषाणे दन्तिनं गृह्य निर्विषाणमथाकरोत् |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
विषाणेन च तेनैव कुम्भेऽभ्याहत्य दन्तिनम् |
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
विषाणैर्दारय़ामासुः सङ्क्रुद्धाश्च मदोत्कटाः ||
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
विषाणैश्चापरे जघ्नुर्ममृदुश्चापरे भृशम् ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
विषाणैश्चावनिं गत्वा व्यभिन्दन्रथिनो वहून् ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३३
सञ्जय़ उवाच
विषादः सुमहानासीत्प्राय़ः सैन्यस्य भारत ||
६६ ग
आदि पर्व
अध्याय
१३३
युधिष्ठिर उवाच
विषादग्नेश्च वोद्धव्यमिति मां विदुरोऽव्रवीत् |
२८ क
आदि पर्व
अध्याय
४८
शौनक उवाच
विषादजननेऽत्यर्थं पन्नगानां महाभय़े ||
२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९
शल्य उवाच
विषादमगमच्छक्र इन्द्रोऽय़ं मा भवेदिति ||
७ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
विषादमगमत्तीव्रं न च किञ्चिदुवाच ह ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
विषादमगमत्सद्यः सौमित्रिरथ भारत ||
२६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२१
सञ्जय़ उवाच
विषादमगमद्राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
७५
भगवानु उवाच
विषादमर्छेद्ग्लानिं वा एतदर्थं व्रवीमि ते ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०५
गुरुरु उवाच
विषादशोकावरतिर्मानदर्पावनार्यता ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
विषादाच्च चिरं कालमतिष्ठन्विगतेन्द्रिय़ाः ||
१०३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७७
वैशम्पाय़न उवाच
विषादार्तः पपातोर्व्यां ममार च ममात्मजः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
विषादी दीर्घसूत्री च कर्ता तामस उच्यते ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
१९
वासुदेव उवाच
विषादो वा रणं दृष्ट्वा व्रूहि मे त्वं यथातथम् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
९७
लोमश उवाच
विषादो वो न कर्तव्यो अहं भोक्ष्ये महासुरम् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२६५
मार्कण्डेय़ उवाच
विषादय़ुक्तमेतत्ते मय़ा श्रुतमभाग्यया ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
वैशम्पाय़न उवाच
विषीदथः किं कौरव्यौ वालिश्यात्प्राकृताविव |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
सञ्जय़ उवाच
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
११४
लोमश उवाच
विषीदन्तीं तु तां दृष्ट्वा कश्यपो भगवानृषिः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
७०
वृहदश्व उवाच
विषेण नागराजस्य दह्यमानो दिवानिशम् ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
विषेण स मदीय़ेन त्वय़ि दुःखं निवत्स्यति ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
६३
वृहदश्व उवाच
विषेण संवृतैर्गात्रैर्यावत्त्वां न विमोक्ष्यति |
१५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२६
वैशम्पाय़न उवाच
विषेण सर्पवन्धैश्च यतिताः पाण्डवास्त्वय़ा |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
विषेहुर्नास्य सम्पर्कं द्वितीय़स्य पतत्रिणः ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
८
सूत उवाच
विषोपलिप्तान्दशनान्भृशमङ्गे न्यपातय़त् ||
१६ ख
वन पर्व
अध्याय
१०७
लोमश उवाच
विषोल्वणैर्भुजङ्गैश्च दीप्तजिह्वैर्निषेवितम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
धृतराष्ट्र उवाच
विष्कम्भमस्य प्रव्रूहि परिमाणं च तत्त्वतः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
विष्कम्भेण कुरुश्रेष्ठ त्रय़स्त्रिंशत्तु मण्डलम् |
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
विष्कम्भेण ततो राजन्मण्डलं त्रिंशतं समम् ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
विष्कम्भेण महाराज सागरोऽपि विभागशः |
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
९०
जनमेजय़ उवाच
विष्टभ्य लोकांस्त्रीनेषां यशः स्फीतमवस्थितम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६२
सञ्जय़ उवाच
विष्टभ्य सर्वगात्राणि व्यतिष्ठन्गजवाजिनः |
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
विष्टभ्य सलिलं शेते नास्य मानुषतो भय़म् ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२९
सञ्जय़ उवाच
विष्टभ्य सलिलं सुप्तो धार्तराष्ट्रो महावलः |
६४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत् ||
४२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
विष्टम्भय़न्महेष्वासान्योधांस्तव शराम्वुभिः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
विष्टव्धचरणा मूत्रं रुधिरं च प्रसुस्रुवुः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
विष्टिर्नावश्चराश्चैव देशिकाः पथि चाष्टकम् ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
विष्ठां तत्रानुपश्येत न मण्डं नापि वा घृतम् ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७
वासुदेव उवाच
विष्ठितं तद्वलं वीर युय़ुधे च यथासुखम् ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
विष्ठिताः पुरुषव्याघ्र त्वत्तः शरणकाङ्क्षिणः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
विष्णुं क्रान्ते वले शक्रं कोष्ठे सक्तं तथानलम् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०५
नारद उवाच
विष्णुं गच्छाम्यहं कृष्णं गतिं गतिमतां वरम् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
विष्णुं च विष्णुकर्माणं देवापिं भद्रमेव च |
५० क