वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
वुद्धिरुत्पद्यते कार्ये मनस्तूत्पन्नमेव हि ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
वुद्धिरैश्वर्यमाचष्टे क्षेत्रज्ञः सर्व उच्यते ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
वुद्धिर्ज्ञानगता नित्यं रसस्त्वप्सु प्रवर्तते ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धिर्ज्ञानमसंमोहः क्षमा सत्यं दमः शमः |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
वुद्धिर्दीप्ता वलवन्तं हिनस्ति; वलं वुद्ध्या वर्धते पाल्यमानम् |
४० क
सभा पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
वुद्धिर्मनो महान्वाय़ुस्तेजोऽम्भः खं मही च या |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६१
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्धिर्ममैषा परिषत्स्थितस्य; मा भूद्विचारस्तव धर्मपुत्र |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्धिर्लज्जा मतिश्चैव पत्न्यो धर्मस्य ता दश |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धिर्वुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
वुद्धिर्वुद्धिमतो याति तूलेष्विव हुताशनः ||
२९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
वुद्धिर्वुद्धिमतोत्सृष्टा हन्याद्राष्ट्रं सराजकम् ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
वुद्धिर्व्यसनमासाद्य भिन्ना नौरिव सीदति ||
३८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१७
सिद्ध उवाच
वुद्धिर्व्यावर्तते चास्य विनाशे प्रत्युपस्थिते ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
वुद्धिर्हि व्यवसाय़ेन लक्ष्यते नात्र संशय़ः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
वुद्धिलाघवय़ुक्तेन जनेनादीर्घदर्शिना ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
वुद्धिलाभे हि पुरुषः सर्वं नुदति किल्विषम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्धिवीर्यवलोत्साहैर्युक्तान्देवानिवापरान् ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
वुद्धिशूरास्तथैवान्ये क्षमाशूरास्तथापरे |
२४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
वुद्धिश्च परमा यत्र कापिलानां महात्मनाम् |
८१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
वुद्धिश्च मा ते च्यवतु निय़च्छैतां यतस्ततः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्धिश्च हीय़ते पुंसां नीचैः सह समागमात् |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५८
भीष्म उवाच
वुद्धिश्चासीत्सुतं दृष्ट्वा पितुश्चरणय़ोर्नतम् |
६१ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
२
कृप उवाच
वुद्धिश्चिन्तय़तः किञ्चित्स्वं श्रेय़ो नाववुध्यते ||
२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
वुद्धिश्रेष्ठा हि राजानो जय़न्ति विजय़ैषिणः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११३
भीष्म उवाच
वुद्धिश्रेष्ठानि कर्माणि वाहुमध्यानि भारत |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३५
विदुर उवाच
वुद्धिश्रेष्ठानि कर्माणि वाहुमध्यानि भारत |
६५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
व्रह्मो उवाच
वुद्धिसंय़मनो नित्यं महान्व्रह्ममय़ो रथः ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
वुद्धिसञ्जननं राज्ञां धर्ममाचरतां सदा |
५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४५
व्रह्मो उवाच
वुद्धिसारं मनस्तम्भमिन्द्रिय़ग्रामवन्धनम् |
१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३६
व्रह्मो उवाच
वुद्धिस्वामिकमित्येतत्परमेकादशं भवेत् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८०
पराशर उवाच
वुद्धिय़ुक्तानि तानीह कृतानि मनसा सह ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धिय़ुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते |
५० क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धिय़ोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव ||
५७ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्धिय़ोगवलोत्साहैः सर्वास्त्रेषु च पाण्डवः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
वुद्धीन्द्रिय़ाणां च तथा विशेषा इति नः श्रुतम् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९१
वसिष्ठ उवाच
वुद्धीन्द्रिय़ाणि चैतानि तथा कर्मेन्द्रिय़ाणि च |
२७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४२
व्रह्मो उवाच
वुद्धीन्द्रिय़ाणि पञ्चाहुः पञ्च कर्मेन्द्रिय़ाणि च |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९८
याज्ञवल्क्य उवाच
वुद्धीन्द्रिय़ाण्यथैतानि सविशेषाणि मैथिल ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१९७
मनुरु उवाच
वुद्धेः परतरं ज्ञानं ज्ञानात्परतरं परम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९५
वसिष्ठ उवाच
वुद्धेः प्रकृतिरव्यक्तं तत्त्वानां परमेश्वरम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
वुद्धेरुत्तरकालं च वेदना दृश्यते वुधैः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
१७८
सर्प उवाच
वुद्धेर्गुणविधिर्नास्ति मनस्तु गुणवद्भवेत् |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धेर्भेदं धृतेश्चैव गुणतस्त्रिविधं शृणु |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
वुद्धौ कलुषभूताय़ां विनाशे प्रत्युपस्थिते |
७९ क
सभा पर्व
अध्याय
७२
धृतराष्ट्र उवाच
वुद्धौ कलुषभूताय़ां विनाशे प्रत्युपस्थिते |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
वुद्धौ शरणमन्विच्छ कृपणाः फलहेतवः ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४३
वैशम्पाय़न उवाच
वुद्ध्या च यदुशार्दूल तथा विक्रमणेन च ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२०७
गुरुरु उवाच
वुद्ध्या च व्यवसाय़ेन व्रह्मचर्यमकल्मषम् ||
९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२०
भीष्म उवाच
वुद्ध्या चात्मगुणप्राप्तिरेतच्छास्त्रनिदर्शनम् ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
वुद्ध्या चैवानुवुध्यस्व ध्रुवं हि न भविष्यसि ||
१८ ख