वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
उपाय़ः को नु भवतां मतः सागरलङ्घने |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१४९
कुन्त्यु उवाच
उपाय़ः परिदृष्टोऽत्र तस्मान्मोक्षाय़ रक्षसः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ः परिदृष्टोऽय़ं तं निवोध जनेश्वर ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३३
विदुर उवाच
उपाय़ज्ञो मनुष्याणां नरः पण्डित उच्यते ||
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४९
व्रह्मो उवाच
उपाय़ज्ञो हि मेधावी सुखमत्यन्तमश्नुते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८४
भीष्म उवाच
उपाय़ज्ञोऽपि नालं स कर्म यापय़ितुं चिरम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३३
द्वारपाल उवाच
उपाय़तः प्रय़तिष्ये तवाहं; प्रवेशने कुरु यत्नं यथावत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
उपाय़तः स शक्रस्य व्रह्महत्यां व्यपोहत ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२८
भीष्म उवाच
उपाय़धर्मं प्राप्यैनं पूर्वैराचरितं जनैः |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
उपाय़धर्मान्वक्ष्यामि सिद्धार्थानर्थधर्मय़ोः ||
२ ग
शान्ति पर्व
अध्याय
२७३
भीष्म उवाच
उपाय़पूर्वं निहतो वृत्रोऽथामिततेजसा ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
उपाय़पूर्वं मेधावी यतेत सततोत्थितः ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
उपाय़पूर्वं शौण्डीर्यात्प्रत्याख्यातश्च तेन सः ||
१४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२४९
स्थाणुरु उवाच
उपाय़मन्यं सम्पश्य प्रजानां हितकाम्यया |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
३४
व्राह्मण उवाच
उपाय़मेव वक्ष्यामि येन गृह्येत वा न वा ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३४
विदुर उवाच
उपाय़युक्तं मेधावी न तत्र ग्लपय़ेन्मनः ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
उपाय़विजय़ं श्रेष्ठमाहुर्भेदेन मध्यमम् |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय
९
देवदूत उवाच
उपाय़श्चात्र विहितः पूर्वं देवैर्महात्मभिः |
८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
उपाय़श्चार्थलिप्सा च विविधा भूरिदक्षिणाः ||
७२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
उपाय़ा विहिता ह्येते मय़ा तस्मान्नराधिपाः |
५८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
उपाय़ाः पण्डितैः प्रोक्ताः सर्वे दैवसमाश्रिताः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१२६
भीष्म उवाच
उपाय़ाज्जवनैरश्वैः सवलः सावरोधनः ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
उपाय़ातं नरव्याघ्रमर्जुनं प्रत्यवेदय़त् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ात्पुण्डरीकाक्षो युय़ुधानानुगस्तदा ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
उपाय़ात्सर्वसैन्यानां प्रतिच्छाद्य तदा वपुः ||
५ ख
विराट पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ादर्जुनस्तूर्णं रथघोषेण नादय़न् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ाद्देवकीपुत्रो दिदृक्षुः कुरुसत्तमान् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
उपाय़ाद्द्वारकां शून्यामिहस्थे मय़ि भारत ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
२६७
मार्कण्डेय़ उवाच
उपाय़ाद्धरिसेना सा क्षारोदमथ सागरम् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
उपाय़ाद्भरतश्रेष्ठ शाल्वो द्वारवतीं पुरीम् ||
२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
उपाय़ाद्वचनान्मर्त्यो विजय़स्य महात्मनः ||
१२ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ाद्वृष्णिभिः सार्धं पुरं वारणसाह्वय़म् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
उपाय़ान्तं तु राधेय़ं दृष्ट्वा पार्थो महारथः |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ान्तमभिद्रुत्य स्वय़मानर्च भारत ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८९
भीष्म उवाच
उपाय़ान्प्रव्रवीम्येतान्न मे माय़ा विवक्षिता |
१२ क
वन पर्व
अध्याय
२८४
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ास्यति शक्रस्त्वां पाण्डवानां हितेप्सय़ा |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
७६
अर्जुन उवाच
उपाय़ेन नृशंसेन हृता दुर्द्यूतदेविना ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
उपाय़ेनापय़ानं ते घटोत्कचभय़ार्दिताः ||
७० ख
आदि पर्व
अध्याय
४३
सूत उवाच
उपाय़ैः श्वेतकाकीय़ैः प्रिय़कामा यशस्विनी ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
१०९
पाण्डुरु उवाच
उपाय़ैरिषुभिस्तीक्ष्णैः कस्मान्मृग विगर्हसे ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
उपाय़ैर्वहुभिर्हन्तुं नाशकच्चापि तं विभुम् ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१७३
भीष्म उवाच
उपाय़ैर्वहुभिश्चैव वश्यानात्मनि कुर्वते ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
उपाय़ैस्त्रिभिरादानमर्थस्याह वृहस्पतिः |
२३ क
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ो यो भवेद्दृष्टस्तं व्रूय़ाः सहसौवलः ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
उपाय़ो विहितश्चाय़ं त्वदर्थमतुलोऽनय़ा |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११०
नारद उवाच
उपाय़ोऽत्र महानस्ति येनैतदुपपद्यते ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२७
वैशम्पाय़न उवाच
उपाय़ोऽय़ं मय़ा दृष्टो गमनाय़ निरामय़ः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
७५
दमय़न्त्यु उवाच
उपाय़ोऽय़ं मय़ा दृष्टो नैषधानय़ने तव ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०३
याज्ञवल्क्य उवाच
उपेक्षकत्वादन्यत्वादभिमानाच्च केवलम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३२
व्यास उवाच
उपेक्षको यताहारो लव्धालव्धे समो भवेत् ||
२७ ख