अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
वृषभो वृषभाङ्काङ्गो मणिविल्वो जटाधरः ||
१२४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
वृषमप्रतिमस्कन्धो वृषभाक्षगतिस्वनः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
वृषरूपधरं वाल्ये भुजाभ्यां निजघान ह ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
वृषरूपधरं साक्षात्क्षीरोदमिव सागरम् ||
१०६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
वृषलं तं विदुर्देवास्तस्माद्धर्मं न लोपय़ेत् ||
१३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२९
समुद्र उवाच
वृषलत्वं परिगता व्युत्थानात्क्षत्रधर्मतः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
वृषलत्वं परिगता व्राह्मणानामदर्शनात् ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३३
भीष्म उवाच
वृषलत्वं परिगता व्राह्मणानामदर्शनात् |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३५
भीष्म उवाच
वृषलत्वमनुप्राप्ता व्राह्मणानामदर्शनात् ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६३
भीष्म उवाच
वृषलीपतिः पिशुनो नर्तकश्च; ग्रामप्रैष्यो यश्च भवेद्विकर्मा ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३७
विदुर उवाच
वृषलीपतिर्द्विजो यश्च पानपश्चैव भारत ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
वृषलो व्राह्मणीं गत्वा कृमिय़ोनौ प्रजाय़ते |
७९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
युधिष्ठिर उवाच
वृषसेनं च नकुलः सहदेवोऽपि सौवलम् ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनं महावीर्यं शकुनिं चापि सौवलम् ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनं हतं दृष्ट्वा शोकामर्षसमन्वितः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२२
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनः कर्णसुतः शल्यो मद्राधिपस्तथा ||
६३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनः सुषेणश्च कुण्डभेदी प्रतर्दनः |
२५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनः स्वय़ं कर्णं पृष्ठतः पर्यपालय़त् ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६२
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनश्च राधेय़ सङ्क्रुद्धस्तनय़स्तव |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनस्ततो राजन्नवभिर्द्रुपदं शरैः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनस्तु सङ्क्रुद्धो यज्ञसेनं रथे स्थितम् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनस्य यन्तारं हत्वा चिच्छेद कार्मुकम् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६१
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनाय़ सौभद्रं शेषाणां च महीक्षिताम् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनो महातेजाः शीघ्रास्त्रः कृतनिश्चय़ः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
वृषसेनो रथाग्र्यस्ते कर्णपुत्रो महारथः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४३
सञ्जय़ उवाच
वृषसेनोऽभ्ययात्तूर्णं किरञ्शरशतैस्तदा ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
वृषा यथा भग्नशृङ्गाः शीर्णदन्ता गजा इव |
४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
वृषाकपिरमेय़ात्मा सर्वय़ोगविनिःसृतः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
वृषाङ्कं वृषभोदारं वृषभं वृषभेक्षणम् |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
मन्त्रिणः ऊचुः
वृषादर्भिं नरपतिं किं करोमीति चाव्रवीत् ||
४१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
वृषादर्भिप्रय़ुक्ता तु कृत्या विकृतदर्शना |
१७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
शुनःसख उवाच
वृषादर्भिप्रय़ुक्तैषा निहता मे तपोधनाः ||
७९ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
वृषादर्भिश्च राजर्षिर्धाम्ना सह समन्त्रिणा ||
२३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९४
भीष्म उवाच
वृषादर्भेश्च संवादं सप्तर्षीणां च भारत ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
वृषाही वृषभो विष्णुर्वृषपर्वा वृषोदरः |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८
संवर्त उवाच
वृषाय़ मातृभक्ताय़ सेनान्ये मध्यमाय़ च ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
वृषाय़ुधं वृषशरं वृषभूतं महेश्वरम् ||
३१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
वृषो हि भगवान्धर्मः ख्यातो लोकेषु भारत |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९१
उतथ्य उवाच
वृषो हि भगवान्धर्मो यस्तस्य कुरुते ह्यलम् |
१३ क
वन पर्व
अध्याय
१२६
लोमश उवाच
वृष्टं सस्यविवृद्ध्यर्थं मिषतो वज्रपाणिनः ||
३९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५४
सञ्जय़ उवाच
वृष्टिं विशालां ज्वलितां पतन्तीं; कर्णः शरौघैर्न शशाक हन्तुम् ||
२९ ख
वन पर्व
अध्याय
१७९
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्टिभिस्ताड्यमानानां वराहमृगपक्षिणाम् ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
१६०
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्टिमारुतसन्तापैः सुखैः स्थावरजङ्गमान् |
३४ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
वृष्टिश्चेन्नानुगृह्णीय़ादनेनास्तत्र कर्षकः |
४५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
वृष्टिस्तथाविधा ह्यासीच्छलभानामिवाय़तिः ||
४३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१८३
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्णिप्रवीरस्तु कुरुप्रवीरा; नाशङ्कमानः सहरौहिणेय़ः |
२ क
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
वृष्णिभिश्च महाराज नीतिहेतोरुपेक्षितः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्णिमुख्यैरभिगतैर्व्याघ्रैरिव वलोत्कटैः |
१७ क
सभा पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्णिसिंहस्य सुप्तस्य तथेमे प्रमुखे स्थिताः |
८ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
वृष्णिय़ोधाश्च ते सर्वे गजाश्वरथय़ाय़िनः |
५५ क