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अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
वेदं चाधिजगे कृत्स्नं धनुर्वेदं च भारत ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५
द्रोण उवाच
वेदं षडङ्गं वेदाहमर्थविद्यां च मानवीम् |
३४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वेदकारः सूत्रकारो विद्वान्समरमर्दनः ||
७८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदज्ञानं च ते कृत्स्नं तपश्च चरितं महत् |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३
वैशम्पाय़न उवाच
वेदज्ञानं तथा कृत्स्नं तपः सुचरितं तथा |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
वेदज्ञानि द्वय़ान्याहुः प्रवक्तॄणीतराणि च |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
वेदज्ञानि विशिष्टानि वेदो ह्येषु प्रतिष्ठितः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय ८८
धौम्य उवाच
वेदज्ञौ वेदविदितौ विद्यावेदविदावुभौ |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२७
वैशम्पाय़न उवाच
वेददृष्टेन विधिना वैष्णवं क्रतुमाहरन् |
४९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६५
इन्द्र उवाच
वेदधर्मक्रिय़ाश्चैव तेषां धर्मो विधीय़ते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१८
नारद उवाच
वेदनां नापकर्षन्ति यतमानाश्चिकित्सकाः ||
३० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १७
सिद्ध उवाच
वेदनाभिः परीतात्मा तद्विद्धि द्विजसत्तम ||
१७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २३२
व्यास उवाच
वेदनार्ताः प्रजा दृष्ट्वा समलोष्टाश्मकाञ्चनः |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३५
व्यास उवाच
वेदप्रमाणविहितं तं धर्मं प्रव्रवीमि ते ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५४
वासुदेव उवाच
वेदप्रवादा इव ते स्थास्यन्ति वसुधातले ||
२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
वेदभूरथ कर्ता च विष्णुर्नाराय़णः प्रभुः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
वेदमाता ततस्तस्य तज्जप्यं समपूजय़त् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
वेदवादं व्यपाश्रित्य मोक्षोऽस्तीति प्रभाषितुम् ||
५७ ग
भीष्म पर्व
अध्याय २४
श्रीभगवानु उवाच
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः ||
४२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६०
स्यूमरश्मिरु उवाच
वेदवादविदश्चैव प्रमाणमुभय़ं तदा ||
३९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०
भीम उवाच
वेदवादस्य विज्ञानं सत्याभासमिवानृतम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वेदवादांस्तथा चित्रानृतूनां पर्ययांस्तथा |
४५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९
युधिष्ठिर उवाच
वेदवादानतिक्रम्य शास्त्राण्यारण्यकानि च |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५५
तुलाधार उवाच
वेदवादानविज्ञाय़ सत्याभासमिवानृतम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
स्यूमरश्मिरु उवाच
वेदवादापरिज्ञानं सत्याभासमिवानृतम् ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२
वैशम्पाय़न उवाच
वेदवादापविद्धांस्तु तान्विद्धि भृशनास्तिकान् ||
४ ग
शान्ति पर्व
अध्याय १८९
भीष्म उवाच
वेदवादाभिनिर्वृत्ता शान्तिर्व्रह्मण्यवस्थितौ |
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२४
भीष्म उवाच
वेदवादाश्चानुय़ुगं ह्रसन्तीति च नः श्रुतम् |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५२
युधिष्ठिर उवाच
वेदवादाश्चानुय़ुगं ह्रसन्तीति ह नः श्रुतम् ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वेदवादे च ये दोषा गुणा ये चापि वैदिकाः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२७
व्यास उवाच
वेदवादेषु कुशला ह्यध्यात्मकुशलाश्च ये |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
वेदविक्रय़िणश्चैव वेदानां चैव दूषकाः |
७० क
उद्योग पर्व
अध्याय ८९
वैशम्पाय़न उवाच
वेदविद्भ्यो ददौ कृष्णः परमद्रविणान्यपि ||
४० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
वेदविद्याव्रतस्नाता व्राह्मणाः सर्व एव हि |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २३५
व्यास उवाच
वेदविद्याव्रतस्नाताः श्रोत्रिय़ा वेदपारगाः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ९०
भीष्म उवाच
वेदविद्याव्रतस्नातो विप्रः पङ्क्तिं पुनात्युत ||
२१ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३५
वासुदेव उवाच
वेदविद्यासमावाप्यं तत्त्वभूतार्थभावनम् ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०३
गुरुरु उवाच
वेदविद्वेद भगवान्वेदाङ्गानि वृहस्पतिः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञं कथं शंससि मे हतम् ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञाः सर्वत्र कृतनिश्रमाः ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
वेदवेदाङ्गविच्चैव धनुर्वेदे च पारगः ||
१०५ ख
सभा पर्व
अध्याय ३५
भीष्म उवाच
वेदवेदाङ्गविज्ञानं वलं चाप्यमितं तथा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय ११
डुण्डुभ उवाच
वेदवेदाङ्गवित्तात सर्वभूताभय़प्रदः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
वेदवेदाङ्गवित्प्राज्ञः सुतपस्वी नृपो भवेत् |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
वेदवेदाङ्गविदुषः सत्यधर्मपरस्य च |
९१ क
आदि पर्व
अध्याय २०६
वैशम्पाय़न उवाच
वेदवेदाङ्गविद्वांसस्तथैवाध्यात्मचिन्तकाः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०६
याज्ञवल्क्य उवाच
वेदवेद्यं न जानीते वेदभारवहो हि सः ||
४८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १८
पराशर उवाच
वेदव्यासः श्रिय़ावासो व्रह्मण्यः करुणात्मकः ||
२७ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
नाचिकेत उवाच
वेदव्रती स्याद्वृषभप्रदाता; वेदावाप्तिर्गोय़ुगस्य प्रदाने |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७५
भीष्म उवाच
वेदव्रती स्याद्वृषभप्रदाता; वेदावाप्तिर्गोय़ुगस्य प्रदाने |
२० क