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शल्य पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
वभूव भरतश्रेष्ठ रुद्रस्याक्रीडनं यथा |
१७ ख
वन पर्व
अध्याय २३३
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव भीमवेगानां पाण्डवानां च भारत ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
वभूव भृशमुद्विग्नं निर्घातैरिव नादितम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय २१९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव मुदितस्तृप्तः परां निर्वृतिमागतः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव मृगय़ां गन्तुं स कदाचिद्धृतव्रतः ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
वभूव मृगय़ाशीलः पुरास्य प्रपितामहः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ९२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव मृगय़ाशीलः सततं वनगोचरः ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय ४५
सूत उवाच
वभूव मृगय़ाशीलस्तव राजन्पिता सदा |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
वभूव यज्ञो वेदेभ्यो यज्ञः प्रीणाति देवताः ||
३६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वासुदेव उवाच
वभूव रक्षितो धीमान्धीमता सव्यसाचिना ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२९
सञ्जय़ उवाच
वभूव रजनी घोरा भीरूणां भय़वर्धिनी ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
वभूव रथनिर्घोषः पर्जन्यनिनदोपमः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव रमणीय़श्च चैत्ययूपशताङ्कितः |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव राजन्धर्मात्मा सर्वभूतहिते रतः ||
५३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६४
भीष्म उवाच
वभूव राजा राजेन्द्र मान्धाता नाम वीर्यवान् ||
१० ग
वन पर्व
अध्याय १६१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव रात्रिर्दिवसश्च तेषां; संवत्सरेणैव समानरूपः ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
वभूव रूपं द्रोणस्य कालाग्नेरिव दीप्यतः ||
२८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव रूपं सैन्यस्य मेघस्येव सविद्युतः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय २१९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव रूपमत्युग्रं सर्वभूतात्मनस्तदा ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३८
धृतराष्ट्र उवाच
वभूव लोके तमसा तथा सञ्जय़ संवृते ||
९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव वदनं तस्याः सहसा शोककर्शितम् |
७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
वभूव विमनाः पार्थः किञ्चित्कृत्वेव पातकम् ||
१ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव विमनाः पार्थो दैवमित्यनुचिन्तय़न् |
६४ क
वन पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव विमनास्त्रस्तो न चैवोवाच किञ्चन ||
१९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव विस्मितो राजन्वलः श्वेतानुलेपनः ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव विस्मय़स्तत्र रामस्याथ महात्मनः ||
५५ ख
वन पर्व
अध्याय २८९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव विस्मय़ाविष्टः पृथां च समपूजय़त् ||
२३ ख
मौसल पर्व
अध्याय ९
अर्जुन उवाच
वभूव वीरान्तकरः प्रभासे रोमहर्षणः ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १०१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव व्राह्मणः कश्चिन्माण्डव्य इति विश्रुतः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
वभूव शीलवृत्ताभ्यां तपसा निय़मेन च ||
३२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५३
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव श्रीमती राजञ्शाण्डिल्यस्य महात्मनः |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४५
वासुदेव उवाच
वभूव स तदा वाहुर्वलहन्तुर्यथा पुरा ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ११२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूव स हि राजेन्द्रो दशनागवलान्वितः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
वभूव सदृशः कार्ष्णेर्नास्त्रे नापि च लाघवे ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय १०७
लोमश उवाच
वभूव सर्वलोकस्य मनोनय़ननन्दनः ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८४
सञ्जय़ उवाच
वभूव सर्वसैन्यानां घोररूपो भय़ानकः |
१० क
भीष्म पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
वभूव सुमहाञ्शव्दः सागरस्येव गर्जतः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७६
सञ्जय़ उवाच
वभूव सैन्यं रिपुसैन्यहन्तृ; युगान्तमेघौघनिभं तदानीम् ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय १६२
गन्धर्व उवाच
वभूव सोऽस्य सचिवः सम्प्रदीप्त इवाग्निना ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ११
सञ्जय़ उवाच
वभूव हृतविक्रान्तो जम्भो वृत्रहणा यथा ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
वभूव हृष्टः ससुहृद्रामः सौमित्रिणा सह ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
वभूवतुर्महात्मानौ पुष्पिताविव किंशुकौ ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५२
भीष्म उवाच
वभूवतुर्महाराज प्रय़तावथ दम्पती ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
वभूवतुर्मुदा युक्तौ निघ्नन्तौ तव वाहिनीम् ||
५९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १११
नारद उवाच
वभूवतुस्ततस्तस्य पक्षौ द्रविणवत्तरौ ||
१७ ख
मौसल पर्व
अध्याय ८
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवातीव कौरव्यः प्राप्तकालं चकार च ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय १६
सूत उवाच
वभूवात्र महाघोषो महामेघरवोपमः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय १८२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवाधिकमन्याभ्यः सर्वभूतमनोहरम् ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवान्तर्गतमतिर्निरीक्ष्य पुरुषोत्तमौ |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
वभूवान्तर्महीभूतः सर्वभूतगुणोदितः ||
५१ ख