chevron_left  वैचित्रवीर्यस्यarrow_drop_down
सभा पर्व
अध्याय ५७
विदुर उवाच
वैचित्रवीर्यस्य यशो धनं च; वाञ्छाम्यहं सहपुत्रस्य शश्वत् |
२० क
उद्योग पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
वैचित्रवीर्यस्य सुतोऽल्पवुद्धि; र्दुर्योधनः शान्तनवं वभाषे ||
१८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
वैचित्रवीर्ये नृपतौ समाचरति नित्यदा ||
४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४७
नारद उवाच
वैचित्रवीर्यो नृपतिस्तत्ते वक्ष्यामि भारत ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
वैशम्पाय़न उवाच
वैजय़न्त इति ख्यातः पर्वतप्रवरो नृप ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
वैजय़न्तीपताकाभिः परिस्तोमाङ्गकम्वलैः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
वैजय़न्तीविचित्रांश्च हतांश्च गजय़ोधिनः |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
वैजय़न्तीसहस्रैश्च शोभितं गीतनिस्वनैः ||
६६ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ३३८
व्रह्मो उवाच
वैजय़न्तो गिरिवरः सततं सेव्यते मय़ा |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
वैजय़न्त्यभवन्माला तदस्त्रं केशवोरसि |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
वैजय़न्त्यश्च नागानां सङ्क्रुद्धेन किरीटिना ||
२७ ख
सभा पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
वैडूर्यपत्रविततां मणिनालमय़ाम्वुजाम् ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
वैडूर्यपर्वतं चैव नर्मदां च महानदीम् |
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १२१
लोमश उवाच
वैडूर्यपर्वतं दृष्ट्वा नर्मदामवतीर्य च ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय ८६
धौम्य उवाच
वैडूर्यपर्वतस्तत्र श्रीमान्मणिमय़ः शिवः |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
वैडूर्यमणिदण्डांश्च पतितानङ्कुशान्भुवि |
४७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
वैडूर्यमणिदण्डैश्च पतितैरङ्कुशैः शुभैः ||
६७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
वैडूर्यमुक्ताखचिते वीणामुरजनादिते ||
५९ ख
विराट पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
वैडूर्यरूपान्प्रतिमुच्य काञ्चना; नक्षान्स कक्षे परिगृह्य वाससा ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय १९१
वैशम्पाय़न उवाच
वैडूर्यवज्रचित्राणि शतशो भाजनानि च ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
वैडूर्यवरनालैश्च वहुचित्रैर्मनोहरैः |
६ क
वन पर्व
अध्याय ८७
धौम्य उवाच
वैडूर्यशिखरो नाम पुण्यो गिरिवरः शुभः |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९८
नारद उवाच
वैडूर्यहरितानीव प्रवालरुचिराणि च |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय ११८
नारद उवाच
वैडूर्याङ्कुरकल्पानि मृदूनि हरितानि च |
८ क
विराट पर्व
अध्याय १
युधिष्ठिर उवाच
वैडूर्यान्काञ्चनान्दान्तान्फलैर्ज्योतीरसैः सह |
२१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
वैडूर्यार्कप्रकाशानि रूप्यरुक्ममय़ानि च |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
वैडूर्यार्कप्रकाशानि रौप्यरुक्ममय़ानि च ||
४७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
वैडूर्योत्पलवर्णाभं हस्तिदन्तमय़त्सरुम् ||
२७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
वैणवाय़स्मय़शराः स्वाय़ता विविधाननाः |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वैणवी पणवी ताली कालः कालकटङ्कटः ||
५६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४५
व्रह्मो उवाच
वैणवीं धारय़ेद्यष्टिं सोदकं च कमण्डलुम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वैतरण्यां च यद्दुःखं पतितानां यमक्षय़े |
३१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
वैतहव्यसहस्राणि यथा त्वं प्रसहिष्यसि ||
२७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
वैतहव्यास्तु संश्रुत्य रथघोषं समुद्धतम् |
३६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३९
कर्ण उवाच
वैताने कर्मणि तते जातो यः कृष्ण पावकात् ||
४४ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वैताने कर्मणि तते पावकात्समजाय़त |
९१ ख
वन पर्व
अध्याय २३२
युधिष्ठिर उवाच
वैताने कर्मणि तते वर्तमाने च भारत ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
वैतालिकाश्च सूताश्च तुष्टुवुः पुरुषर्षभम् ||
२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
वैताली चातिताली च तथा कतिकवातिकौ ||
६२ ख
वन पर्व
अध्याय १०४
लोमश उवाच
वैदर्भी चैव शैव्या च गर्भिण्यौ सम्वभूवतुः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय ७७
वृहदश्व उवाच
वैदर्भी न त्वय़ा शक्या राजापसद वीक्षितुम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय १०४
लोमश उवाच
वैदर्भी भरतश्रेष्ठ शैव्या च भरतर्षभ ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय ६१
वृहदश्व उवाच
वैदर्भी विचरत्येका नलमन्वेषती तदा ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ९४
लोमश उवाच
वैदर्भीं तु तथाय़ुक्तां युवतीं प्रेक्ष्य वै पिता |
२७ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
वैदर्भीत्येव कथितां शुभां राज्ञो महात्मनः |
५५ क
वन पर्व
अध्याय ७६
वृहदश्व उवाच
वैदर्भ्या सहितः काल्यं ददर्श वसुधाधिपम् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
वैदर्भ्या सहितो राजा निषसाद महीतले ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय ५६
वृहदश्व उवाच
वैदर्भ्याः प्रेक्षमाणाय़ाः पणकालममन्यत ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
वैदिकानि च कर्माणि भवन्ति विगुणान्युत |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
वैदिकानि च कर्माणि भवन्त्यविगुणान्युत ||
९ ख