अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
भीष्म उवाच
वैदूर्यवर्णसदृशैः पद्मपत्रैरथावृताम् ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
वैदेहकं च राजानं जनकं जगतीपतिम् |
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
पराशर उवाच
वैदेहकं शूद्रमुदाहरन्ति; द्विजा महाराज श्रुतोपपन्नाः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
४८
भीष्म उवाच
वैदेहकाच्च पापिष्ठं क्रूरं भार्योपजीविनम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
वैदेहस्त्वथ कौसल्यं प्रवेश्य गृहमञ्जसा |
२६ क
सभा पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
वैदेहस्थस्तु कौन्तेय़ इन्द्रपर्वतमन्तिकात् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
वैदेहाम्वष्ठकाम्वोजास्तथा नग्नजितस्त्वय़ा |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३०७
भीष्म उवाच
वैदेहो जनको राजा महर्षिं वेदवित्तमम् |
४ क
वन पर्व
अध्याय
२७५
मार्कण्डेय़ उवाच
वैदेह्या दर्शनेनोभौ प्रहर्षं समवापतुः ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३६
भरद्वाज उवाच
वैद्यश्चापि तपस्वी च कोपनश्च महानृषिः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०७
भीष्म उवाच
वैद्यानां वालवृद्धानां भृत्यानां च युधिष्ठिर ||
१०९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११५
सञ्जय़ उवाच
वैद्यान्विसर्जय़ामास पूजय़ित्वा यथार्हतः ||
५५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
अश्मो उवाच
वैद्याश्चाप्यातुराः सन्ति वलवन्तः सुदुर्वलाः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय
३
वैशम्पाय़न उवाच
वैद्युतो जाठरश्चाग्निरैन्धनस्तेजसां पतिः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९४
वसिष्ठ उवाच
वैद्युतोऽग्निरिवाकाशे दृश्यतेऽऽत्मा तथात्मनि ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२३२
व्यास उवाच
वैद्युतोऽग्निरिवाकाशे पश्यत्यात्मानमात्मना |
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६६
सञ्जय़ उवाच
वैधर्मिकानि कुर्वन्ति तथा परिभवेन च ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
शल्य उवाच
वैधर्म्याण्युपधाश्चैव स वः किं न निवारितः ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
वैनतेय़ं समारुह्य त्रासय़ित्वामरावतीम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
उपमन्युरु उवाच
वैनतेय़ं समास्थाय़ शङ्खचक्रगदाधरः ||
१४२ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
वैनतेय़ः स्थितस्तस्यां प्रभामण्डलरश्मिवान् |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९९
नारद उवाच
वैनतेय़सुतैः सूत षड्भिस्ततमिदं कुलम् |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
६०
वैशम्पाय़न उवाच
वैनतेय़स्तु गरुडो वलवानरुणस्तथा |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
वैनतेय़स्य वीरस्य समरे रथशोभिनः ||
३३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
वैनतेय़ाः समुद्राश्च कद्रुजाः पन्नगास्तथा ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३
व्यास उवाच
वैनतेय़ान्मय़ूरांश्च जनय़न्त्यः पुरे तव ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
वैनतेय़ो यथा कार्ष्णिः पतन्तमुरगोत्तमम् ||
७३ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
वैशम्पाय़न उवाच
वैनतेय़ो यथा पक्षी गरुडः पततां वरः |
८२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
वैनन्दीं पिञ्जलां वेण्णां तुङ्गवेणां महानदीम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
वैन्यं गत्वा महात्मानमर्थय़स्व धनं वहु |
४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
वैन्यं महारथं वीरं सृञ्जय़ं जय़तां वरम् |
१६६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
वैन्यस्ततस्तानुवाच देवानृषिपुरोगमान् |
११५ क
वन पर्व
अध्याय
१८३
अत्रिरु उवाच
वैन्यो धर्मार्थसंय़ुक्तः सत्यव्रतसमन्वितः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
वैन्यो नामेह राजर्षिरश्वमेधाय़ दीक्षितः |
१ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
वैन्यो राजा वारिषेणः पुरुजो जनमेजय़ः ||
१८ ख
वन पर्व
अध्याय
१८३
मार्कण्डेय़ उवाच
वैन्यो विधातेत्याहात्रिरत्र नः संशय़ो महान् ||
१९ ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
इन्द्रिय़ाण्यू ऊचुः
वैमनस्यं गतानां च जन्तूनामल्पचेतसाम् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१०
गुरुरु उवाच
वैमनस्यं च विषय़े यान्त्यस्य करणानि च |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
२२६
वैशम्पाय़न उवाच
वैमनस्यं यथा दृष्ट्वा तव भार्याः स्वलङ्कृताः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
वैमानिक उपस्पृश्य किङ्किणीकाश्रमे तथा |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
वैरं न कुर्वीत नरो दुर्वुद्धिर्वुद्धिजीविना |
२९ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८९
वैशम्पाय़न उवाच
वैरं नो नास्ति भवता गोविन्द न च विग्रहः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
वैरं पञ्चसमुत्थानं तच्च वुध्यन्ति पण्डिताः |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
वैरं परेषां ग्रीवाय़ां प्रतिमोक्ष्यन्ति संय़ुगे ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
वैरं प्रतिकरिष्यन्ति कुलोच्छेदेन पाण्डवाः ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
वैरं प्रत्यानय़िष्यन्ति मम दुःखाय़ पाण्डवाः ||
३७ ख
सभा पर्व
अध्याय
५१
धृतराष्ट्र उवाच
वैरं विकारं सृजति तद्वै शस्त्रमनाय़सम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३६
भीष्म उवाच
वैरन्त्यमभितो जातस्तरुर्व्यालमृगाकुलः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३७
पूजन्यु उवाच
वैरमन्तिकमासज्य यः प्रीतिं कर्तुमिच्छति |
६५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
वैरमासज्जते वालस्तप्यते शल्मलिर्यथा ||
२६ ख