chevron_left  चित्रकार्मुकनिस्त्रिंशौarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
चित्रकार्मुकनिस्त्रिंशौ चित्रवर्माय़ुधध्वजौ |
४२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय २६
अङ्गिरा उवाच
चित्रकूटे जनस्थाने तथा मन्दाकिनीजले |
२७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५१
भीष्म उवाच
चित्रकूटोऽञ्जनाभश्च पर्वतो गन्धमादनः |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
चित्रकेतुः सुधन्वा च चित्रवर्मा च भारत |
३७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
चित्रकेतुसुतो राजन्सुकेतुस्त्वरितो यय़ौ ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
चित्रचापमहाज्वालो वीरक्षय़महेन्धनः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
चित्रपुङ्खैः शितैर्वाणैः कलशोत्तमसम्भवः ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
चित्रपुष्पधरा भग्ना वातेनेव महाद्रुमाः ||
३६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४८
भीष्म उवाच
चित्रभानुमनड्वाहं देवं गोष्ठं चतुष्पथम् |
११ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
चित्रमार्गेण विक्रम्य कर्णेन निहतौ युधि ||
६८ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रमाल्यधराः केचित्केचिद्रोमाननास्तथा |
९१ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४४
भीष्म उवाच
चित्रमाल्याम्वरधरं सर्वाभरणभूषितम् |
११ क
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रमुच्चावचैर्वर्णैः शोभितं श्लक्ष्णमव्रणम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
चित्ररूपतरं चक्रे चित्रसेनं शरोर्मिभिः ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
चित्ररूपधराः शूरा नखरप्रासय़ोधिनः ||
३५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
चित्ररूपमिदं कृष्ण विचित्रं प्रतिभाति मे ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
चित्ररूपमिदं जिष्णोर्दिव्यमस्त्रमुदीर्यतः ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
चित्रवर्णैर्मय़ूरैश्च केकाशतविराजितैः |
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
चित्रवर्माङ्गदः स्रग्वी पालय़न्ध्वजिनीमुखम् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रवर्मेति विख्यातः क्षितावासीत्स पार्थिवः ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १०८
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रवाणश्चित्रवर्मा सुवर्मा दुर्विमोचनः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५४
भीष्म उवाच
चित्रशालाश्च विविधास्तोरणानि च भारत |
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं त्रिभिर्वाणैर्विव्याध हृदय़े भृशम् ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं नरव्याघ्रं सौभद्रः परवीरहा |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं महाराज तव पुत्रं महाय़शाः ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११०
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं विकर्णं च कृतवर्माणमेव च |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं विकर्णं च तथा दुर्मर्षणं विभो |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं विकर्णं च सैन्धवं च जय़द्रथम् ||
५५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं विशस्तं तु दृष्ट्वा तत्र महारथाः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय ९६
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनं शतेनैव दशभिर्दुःसहं तथा |
३५ क
वन पर्व
अध्याय २३८
दुर्योधन उवाच
चित्रसेनं समागम्य प्रहसन्नर्जुनस्तदा |
१ क
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
चित्रसेनं हतं भूमौ शय़ानं मधुसूदन |
११ क
वन पर्व
अध्याय २३७
दुर्योधन उवाच
चित्रसेनः पाण्डवेन समाश्लिष्य परन्तपः |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रसेनः सहामात्यो गन्धर्वाप्सरसस्तथा |
३१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७५
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनः सुचित्रश्च चित्राश्वश्चित्रदर्शनः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनः सुशर्माणं विद्ध्वा नवभिराशुगैः |
२७ क
वन पर्व
अध्याय २३४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रसेनमथालक्ष्य सखाय़ं युधि दुर्वलम् |
२६ क
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनरथं प्राप्य चित्रय़ोधी जितश्रमः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनरथं राजन्नारुरोह त्वरान्वितः ||
१६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनशिरः काय़ादपाहरत पाण्डवः |
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनश्च चित्रश्च महत्या सेनय़ा वृतौ ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनश्च तं राजंस्त्रिंशता नतपर्वणाम् |
२९ क
वन पर्व
अध्याय २३४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रसेनश्च भीमश्च सव्यसाची यमावपि |
२८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९२
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनश्च शैनेय़ं द्वाभ्यां विव्याध मारिष ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनस्तव सुतः क्रुद्धरूपमवारय़त् ||
५० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनस्तव सुतो भीमसेनेन पातितः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनस्तव सुतो वारय़ामास भारत ||
१ ख
शल्य पर्व
अध्याय ९
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनस्तु भल्लेन पीतेन निशितेन च |
१२ क
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
चित्रसेना चित्रलेखा सहा च मधुरस्वरा ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
चित्रसेनादय़ः शूरा अभ्यरक्षन्पितामहम् ||
१६ ग