शल्य पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवापहतं तच्चाप्यवकीर्णमचेतनम् ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
११२
भीष्म उवाच
वभूवामर्षितो राजा वधं चास्याभ्यरोचय़त् ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७६
भीष्म उवाच
वभूवामृतजः फेनः स्रवन्तीनामिवोर्मिजः ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवावस्थितः प्रीतः प्रशंसन्कृष्णपाण्डवौ ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय
२६४
मार्कण्डेय़ उवाच
वभूवाशावती वाला पुनर्भर्तृसमागमे ||
७२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
वभूवाय़ोधनं छन्नं नाराचाभिहतैर्गजैः ||
३५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३४
सञ्जय़ उवाच
वभूवाय़ोधनं रौद्रं वैवस्वतपुरोपमम् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय
७९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुः कौरवेय़ास्ते दुःखशोकपराय़णाः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
वभूवुः खं समासाद्य सविद्युत इवाम्वुदाः ||
४० ख
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
वभूवुः पत्तिवहुलाः प्रभूतगजवाजिनः ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुः पाण्डवा राजन्मातृशोकेन चार्दिताः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२६८
मार्कण्डेय़ उवाच
वभूवुः सप्त दुर्धर्षाः खादिरैः शङ्कुभिश्चिताः ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुः सप्त पुरुषा रत्नवन्त इवाद्रय़ः ||
१३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुः सैनिका राजन्राज्ञः प्रिय़चिकीर्षवः ||
३१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१९७
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुरतिसंरव्धाः कृतप्रहरणा नराः |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
२८
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुरनभिग्राह्या योषितश्छन्दतः किल ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७२
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुरर्जुनश्चैव प्रदीप्त इव पावकः ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४५
वासुदेव उवाच
वभूवुरवशाः पार्थ विषेदुश्च सुरासुराः ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय
९३
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुरस्य सरसः समीपे कुरुनन्दन ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
वभूवुराश्वस्तमुखा विषण्णा गतचेतसः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
वभूवुर्दानवेन्द्राणां सिंहनादाश्च दारुणाः ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४५
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्नागराणां च स्वैर्गुणैः प्रिय़दर्शनाः ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२३
भीष्म उवाच
वभूवुर्निर्वृता देवा जाते देवपुरोहिते ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
भीष्म उवाच
वभूवुर्भरतश्रेष्ठ प्रसादाच्छङ्करस्य वै ||
११५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्भृशसंविग्ना निराशाश्चापि जीविते ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्मानुषे लोके नाराय़णपरिग्रहः ||
९४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३०
श्रीभगवानु उवाच
वभूवुर्मुञ्जवर्णास्तु ततोऽहं मुञ्जकेशवान् ||
४५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्मुदिता राजंस्ततस्ता भरतस्त्रिय़ः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
वभूवुर्ये मनोग्राह्याः शव्दाः श्रुतिसुखावहाः |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१७३
व्यास उवाच
वभूवुर्वशगाः पार्थ निपेतुश्च सुरासुराः ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१७१
सञ्जय़ उवाच
वभूवुर्विमलाः सर्वा दिशः प्रदिश एव च ||
२० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
वभूवुर्विमलाः सर्वा दिशो राजन्समन्ततः |
४३ क
आदि पर्व
अध्याय
६९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्व्रह्मकल्पाश्च वहवो राजसत्तमाः ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्हृष्टमनसो वासुदेवश्च वीर्यवान् ||
१६ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुर्होत्रगाः सर्वे वेदवेदाङ्गपारगाः ||
३६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
वभूवुश्च दिशः सर्वास्तिमिरेण समावृताः ||
८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२९
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवुश्चैव रूपाणि यक्षगन्धर्वरक्षसाम् ||
६ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
८७
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवू राजमार्गाश्च वहुरत्नसमाचिताः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६४
सञ्जय़ उवाच
वभूवैवं तु तेनोक्ते तस्य वाहास्पृशन्महीम् ||
१०७ ख
आदि पर्व
अध्याय
११३
वैशम्पाय़न उवाच
वभूवोद्दालको नाम महर्षिरिति नः श्रुतम् |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
वभौ कनकपाषाणा भुजगैरिव संवृता ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
वभौ कर्णः शरानस्यन्रश्मिवानिव भास्करः ||
४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
वभौ गिरिर्गैरिकधातुरक्तः; क्षरन्प्रपातैरिव रक्तमम्भः ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३११
भीष्म उवाच
वभौ तदा भावितात्मा विधूमोऽग्निरिव ज्वलन् ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८५
वैशम्पाय़न उवाच
वभौ तैरेव सहितस्त्रस्तैः क्षुद्रमृगैरिव ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
वभौ धर्मार्थकामानां चतुर्थ इव पार्थिवः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२५
वैशम्पाय़न उवाच
वभौ निवासोपगतैर्महात्मभि; र्महागिरिर्वारणय़ूथपैरिव ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४१
सञ्जय़ उवाच
वभौ निशामुखे व्योम खद्योतैरिव संवृतम् ||
२६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
वभौ परमकल्याणो महस्तस्य महागिरेः ||
१२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
वभौ प्रच्छादय़न्नाशाः शरजालैः समन्ततः ||
२५ ख