chevron_left  व्यावृत्यarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
व्यावृत्य चक्षुषी कोपाद्भारद्वाजोऽन्ववैक्षत ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
व्याश्रय़न्त दिशो भिन्नाः सर्वलोकाश्च मारिष ||
३० ग
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १४
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासं च नारदं चैव तांश्चान्यानव्रवीन्नृपः ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
जनमेजय़ उवाच
व्यासः परमतेजस्वी महर्षिस्तद्वदस्व मे ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासः सत्यवतीपुत्र इदं वचनमव्रवीत् ||
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३५
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासः सत्यवतीपुत्रः प्रोवाचामन्त्र्य पार्थिवम् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
व्यासः सर्वस्य सङ्क्षेपो विस्तरः पर्ययो नय़ः ||
१३७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासः सशिष्यो भगवान्वर्धय़ामास तं नृपम् ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
व्यासक्तं च प्रमत्तं च दुर्वलं च विचक्षणः ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
व्यासङ्गं जनय़न्त्युग्रमात्माभिभवशङ्कय़ा ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
व्यासनारदय़ोश्चापि श्रुतं श्रुतविशारद ||
२७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
व्यासप्रसादाच्छ्रुतवानेतद्गुह्यमहं परम् |
७५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासमन्वासतां राजन्नाजग्मुर्मुनय़ोऽपरे ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासमभ्यगमन्सर्वे ये तत्रासन्समागताः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासमामन्त्र्य कौन्तेय़ः प्रत्युवाच युधिष्ठिरः ||
१ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७१
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासमामन्त्र्य मेधावी ततो वचनमव्रवीत् ||
१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २५
भीष्म उवाच
व्यासमामन्त्र्य राजेन्द्र पुरा यत्पृष्टवानहम् |
२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासश्च भगवान्नित्यं वासं चक्रे नृपेण ह |
१२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासश्च भगवान्विप्रो देवर्षिगणपूजितः |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३६
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासश्चाकथय़त्प्रीत्या धर्मपुत्राय़ धीमते |
८० क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
भीष्म उवाच
व्यासश्चैव महाय़ोगी सञ्जल्पेषु पदे पदे ||
४० ख
आदि पर्व
अध्याय ५३
सूत उवाच
व्यासस्त्वकथय़न्नित्यमाख्यानं भारतं महत् ||
३१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासस्य तपसो वीर्याद्भवतश्च समागमात् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३७
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासस्याक्लिष्टमनसो यथा पृष्टः पुनः शृणु ||
५८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय १३
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासस्यानुमते राज्ञस्तथा कुन्तीसुतस्य च |
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासाख्यातस्य वित्तस्य समुपानय़नं प्रति ||
११ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
व्यासाज्ञय़ा समाख्यातं सर्पसत्रे नृपस्य ह ||
३० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
व्यासादनन्तरं यच्चाप्युपस्थानं महात्मनः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५०
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासादींस्तानृषीन्पश्चाद्गाङ्गेय़मुपतस्थिरे ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासादीनभिवाद्यर्षीन्सर्वैस्तैश्चाभिनन्दिताः |
३ क
उद्योग पर्व
अध्याय १८७
भीष्म उवाच
व्यासे चैव भय़ात्कार्यं तौ चोभौ मामवोचताम् ||
१६ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
सूत उवाच
व्यासेन तस्य नृपतेराख्यातुमुपचक्रमे ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
व्यासेन नृपशार्दूल द्विजार्थमिति नः श्रुतम् |
७७ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
व्यासेन वेदविदुषा सङ्ख्याता भीष्मपर्वणि ||
१५९ ग
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासेन वेदश्रवसा नारदेन सुरर्षिणा |
५ क
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
व्यासेनोदारमतिना पर्वण्यस्मिंस्तपोधनाः ||
१५३ ख
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
व्यासो वसिष्ठो मैत्रेय़ो नारदो लोमशः शुकः |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
व्यासो वाक्यमुवाचेदं हर्षय़न्निव भारत ||
११ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४८
ऋषय़ ऊचुः
व्याहतामिव पश्यामो धर्मस्य विविधां गतिम् ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १०९
लोमश उवाच
व्याहरंश्चैव पुरुषो मेघेन विनिवार्यते ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय ३६
सूत उवाच
व्याहरत्स्वृषिपुत्रेषु मा स्म किञ्चिद्वचो वदीः |
२५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८०
सञ्जय़ उवाच
व्याहरिष्यन्निवातिष्ठत्सेनाग्रमपि शोभय़न् ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय ५१
सूत उवाच
व्याहर्तुकामे वरदे नृपे द्विजं; वरं वृणीष्वेति ततोऽभ्युवाच |
३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
व्याहृतं यन्मय़ा सूत तत्तथा न तदन्यथा ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
व्याय़च्छतश्च खड्गेन द्विधा खड्गं चकार ह ||
४१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
व्याय़च्छन्ति च तत्रापि सर्व एवापराजिताः ||
४ ग
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
दुर्योधन उवाच
व्याय़च्छन्तो जिगीषन्तः प्राप्ता वैवस्वतक्षय़म् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२५
दुर्योधन उवाच
व्याय़च्छन्तो हताः शूरा मदर्थे येऽपराङ्मुखाः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ५८
सञ्जय़ उवाच
व्याय़च्छमानं गदय़ा दिक्षु सर्वासु भारत |
५६ क
आदि पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
व्याय़च्छमाना ददृशुर्भ्रमन्तीं; सन्दष्टदन्तच्छदताम्रवक्त्राः ||
११ ख