अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
व्रह्मण्यं सर्वधर्मज्ञं लोकानां कीर्तिवर्धनम् |
७ क
विराट पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मण्यः श्रुतवांस्त्यागी यज्ञशीलो दृढव्रतः ||
८ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवाग्दान्तः सर्वभूतानुकम्पकः |
११८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
कृप उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवाग्दान्तो गुरुदैवतपूजकः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
वासुदेव उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवादी च तपस्वी निय़तव्रतः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवादी च तेजसार्क इवापरः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय
२७८
नारद उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवादी च शिविरौशीनरो यथा ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४
व्यास उवाच
व्रह्मण्यः सत्यवादी च शुचिः शमदमान्वितः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
व्रह्मण्यः सत्यसन्धश्च दाने च निरतोऽभवत् ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
व्रह्मण्यः साधुवृत्तश्च सत्यवागनसूय़कः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मण्यता दमो दानं तपश्च चरितं महत् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मण्यतां च शौर्यं च दाने च परमां गतिम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२१८
मार्कण्डेय़ उवाच
व्रह्मण्यत्वमसंमोहो भक्तानां परिरक्षणम् ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२४
भीष्म उवाच
व्रह्मण्यदेवं त्वं भक्तः सुरासुरगुरुं हरिम् |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२६
भीष्म उवाच
व्रह्मण्यदेवो भगवान्प्रीय़तां ते सनातनः |
१२० क
वन पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मण्यनुपमा दृष्टिः क्षात्रमप्रतिमं वलम् |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
४९
वासुदेव उवाच
व्रह्मण्यश्च शरण्यश्च दाता शूरश्च भारत ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय
२७७
मार्कण्डेय़ उवाच
व्रह्मण्यश्च शरण्यश्च सत्यसन्धो जितेन्द्रिय़ः ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय
१६५
अर्जुन उवाच
व्रह्मण्यश्चास्त्रविच्चासि शूरश्चासि कुरूद्वह ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२७
श्रीभगवानु उवाच
व्रह्मण्याधाय़ कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा करोति यः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
उपमन्युरु उवाच
व्रह्मण्येनानृशंसेन श्रद्दधानेन चाप्युत |
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मण्यैर्धर्मशीलैश्च तपोनीत्यैश्च भारत ||
४८ ख
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
व्रह्मण्यो दैवतपरः श्रीमान्परपुरञ्जय़ः ||
७५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९४
राम उवाच
व्रह्मण्यो भव धर्मात्मा मा च स्मैवं पुनः कृथाः ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
व्रह्मण्यो वेदविच्छूरो निषधेषु महीपतिः |
३ क
वन पर्व
अध्याय
६१
दमय़न्त्यु उवाच
व्रह्मण्यो वेदविद्वाग्मी पुण्यकृत्सोमपोऽग्निचित् ||
४७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
व्रह्मण्यो व्रह्मकृद्व्रह्मा व्रह्म व्रह्मविवर्धनः |
८४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१८
श्रीरु उवाच
व्रह्मण्योऽय़ं सदा भूत्वा सत्यवादी जितेन्द्रिय़ः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मतुङ्गं नदीश्चान्यास्तथा जनपदानपि ||
२७ ग
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
व्रह्मतुङ्गं समासाद्य शुचिः प्रय़तमानसः |
९६ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१५
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मतेजोभवं तद्धि विसृष्टमकृतात्मना |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
४९
आस्तीक उवाच
व्रह्मदण्डं महाघोरं कालाग्निसमतेजसम् |
२४ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२४
देवा ऊचुः
व्रह्मदण्डः कालदण्डो रुद्रदण्डस्तथा ज्वरः |
७९ क
मौसल पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मदण्डकृतं सर्वमिति तद्विद्धि पार्थिव ||
३८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०४
भीष्म उवाच
व्रह्मदण्डमदृष्टेषु दृष्टेषु चतुरङ्गिणीम् ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
व्रह्मदण्डविनिर्माता शतघ्नी शतपाशधृक् ||
१३० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
व्रह्मदण्डविनिष्पिष्टाः समीपे लवणाम्भसः ||
२२० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मदण्डसमस्पर्शा वज्रवेगा दुरासदाः |
५७ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
व्रह्मदत्तवरः स्कन्द त्वय़ाय़ं महिषो हतः |
७३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
व्रह्मदत्तवराश्चैव हता दैत्या महात्मना ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
व्रह्मदत्तश्च पाञ्चाल्यो राजा वुद्धिमतां वरः |
२९ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
व्रह्मदत्तस्त्रिगर्तश्च राजोपरिचरस्तथा |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
शक्र उवाच
व्रह्मदत्तां च ते मालां न पश्याम्यसुराधिप ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
वलिरु उवाच
व्रह्मदत्तां च मे मालां न त्वं द्रक्ष्यसि वासव ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८१
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मदेवर्षय़श्चैव कृष्णं यदुसुखावहम् |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५७
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मदेय़ां सुतां दत्त्वा प्राप्नोति मनुजर्षभ ||
२५ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१६
व्राह्मण उवाच
व्रह्मदेय़ाग्रहारांश्च परिहारांश्च पार्थिव |
१५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मदेय़ाग्रहारांश्च पुत्राणां चौर्ध्वदेहिकम् |
११ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मदेय़ाग्रहारांश्च प्रददौ स कुरूद्वहः |
२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९०
भीष्म उवाच
व्रह्मदेय़ानुसन्तान इति व्रह्मविदो विदुः ||
३० ख