chevron_left  व्रह्मविक्रय़निर्दिष्टंarrow_drop_down
अनुशासन पर्व
अध्याय २४
भीष्म उवाच
व्रह्मविक्रय़निर्दिष्टं स्त्रिय़ा यच्चार्जितं धनम् |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३१
भीष्म उवाच
व्रह्मवित्तस्य चादानं निःशेषकरणं तथा |
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ६३
वृहदश्व उवाच
व्रह्मविद्भ्यश्च भविता मत्प्रसादान्नराधिप ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
व्रह्मविद्व्राह्मणो व्रह्मी व्रह्मज्ञो व्राह्मणप्रिय़ः ||
८४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७९
भीष्म उवाच
व्रह्मवीर्ये मृदूभूते क्षत्रवीर्ये च दुर्वले |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७४
कश्यप उवाच
व्रह्मवृक्षो रक्ष्यमाणो मधु हेम च वर्षति |
१४ क
वन पर्व
अध्याय ८१
पुलस्त्य उवाच
व्रह्मवेदी कुरुक्षेत्रं पुण्यं व्रह्मर्षिसेवितम् |
१७७ क
मौसल पर्व
अध्याय ९
व्यास उवाच
व्रह्मशापविनिर्दग्धा वृष्ण्यन्धकमहारथाः |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२३
भीष्म उवाच
व्रह्मशापाद्दिवो भ्रष्टः प्रविवेश महीं ततः ||
५५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ३५
श्रीभगवानु उवाच
व्रह्मसूत्रपदैश्चैव हेतुमद्भिर्विनिश्चितैः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६९
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मसूत्रेण वध्नामि कवचं तव पार्थिव |
६९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
व्राह्मणा ऊचुः
व्रह्मसृष्टा हव्यभुजः कपान्भुक्त्वा सनातनाः |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
कपिल उवाच
व्रह्मस्तेना निरारम्भा अपक्वमतय़ोऽशिवाः ||
४९ ख
वन पर्व
अध्याय ८३
पुलस्त्य उवाच
व्रह्मस्थानं समासाद्य त्रिरात्रमुषितो नरः |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
व्रह्मस्थानमनावर्तमेकमक्षरसञ्ज्ञकम् |
१२३ क
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
सनत्सुजात उवाच
व्रह्मस्वं नोपभुञ्जेद्वा तदन्नं संमतं सताम् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
चण्डाल उवाच
व्रह्मस्वरजसा ध्वस्तं भुक्त्वा मां पश्य यादृशम् ||
११ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
व्रह्मस्वहारिणश्चैव राजपिण्डापहारिणः |
३० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
चण्डाल उवाच
व्रह्मस्वहारी च नृपः सोऽप्रतिष्ठां गतिं यय़ौ ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
व्रह्मस्वे रक्ष्यमाणे हि सर्वं भवति रक्षितम् |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ९९
इन्द्र उवाच
व्रह्मस्वे ह्रिय़माणे यः प्रिय़ां युद्धे तनुं त्यजेत् |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
व्रह्मो उवाच
व्रह्महत्या चतुर्थांशमस्या यूय़ं प्रतीच्छत ||
४९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
व्रह्महत्या ततः शुद्धिं हय़मेधेन लव्धवान् ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७८
भीष्म उवाच
व्रह्महत्या न तस्य स्यादिति धर्मेषु निश्चय़ः ||
२७ ग
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
व्रह्महत्या महाघोरा रौद्रा लोकभय़ावहा ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
व्रह्मो उवाच
व्रह्महत्या हव्यवाह व्येतु ते मानसो ज्वरः ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय १३९
अर्वावसुरु उवाच
व्रह्महत्यां चरिष्येऽहं त्वदर्थं निय़तेन्द्रिय़ः ||
१० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
व्रह्महत्याफलं तस्य यः कृतं नाववुध्यते ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३
शल्य उवाच
व्रह्महत्याभिभूतो वै शक्रः सुरगणेश्वरः |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
भीष्म उवाच
व्रह्महत्यामिमामद्य भवतः शासनाद्वय़म् |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८०
व्यास उवाच
व्रह्महत्यासमं पापं सर्वमेतेन शुध्यति ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय १३९
लोमश उवाच
व्रह्महा प्रेक्षितेनापि पीडय़ेत्त्वां न संशय़ः ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३६
व्यास उवाच
व्रह्महा विप्रमुच्येत सर्वपापेभ्य एव च ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९६
अङ्गिरा उवाच
व्रह्महानिकृतिश्चास्तु यस्ते हरति पुष्करम् ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६७
भीष्म उवाच
व्रह्मा च तं महात्मानमातिथ्येनाभ्यपूजय़त् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २००
भीष्म उवाच
व्रह्मा तु ससृजे पुत्रान्मानसान्दक्षसप्तमान् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मा ददावसिं दीप्तमधर्मप्रतिवारणम् ||
४४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भृगुरु उवाच
व्रह्मा धर्ममय़ः पूर्वः प्रजापतिरनुत्तमः ||
३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
व्रह्मा नाराय़णश्चैव देवराजश्च कौशिकः |
१४८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
अग्निरु उवाच
व्रह्मा पितामहः पूर्वं देवताभिः प्रसादितः |
४६ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
व्रह्मा पितामहस्तस्माज्जागर्ति प्रभुरव्ययः |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२१
भीष्म उवाच
व्रह्मा प्रजापतिः पूर्वं वभूवाथ पितामहः |
५५ क
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
व्रह्मा प्रोवाच पुत्राणां यदृषिर्वेद कश्यपः ||
३७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
व्रह्मा प्रोवाच शक्राय़ शक्रः प्रोवाच मृत्यवे ||
१६४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४
उपमन्युरु उवाच
व्रह्मा भवं तदा स्तुन्वन्रथन्तरमुदीरय़न् |
१४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
वसुहोम उवाच
व्रह्मा यिय़क्षुर्भगवान्सर्वलोकपितामहः |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १५
कृष्ण उवाच
व्रह्मा रथन्तरं साम ईरय़न्ति भवान्तिके ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
व्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्देन्द्रौ सविता यमः |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
व्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वैश्रवणो यमः ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
व्रह्मा वृतो देवगणैरृषिभिश्च महात्मभिः |
५५ ख