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आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणस्य भार्या ज्येष्ठा तु शुक्राद्देवी व्यजाय़त |
५१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
गौतम उवाच
वरुणस्य राज्ञः सदने महात्मन; स्तत्र त्वाहं हस्तिनं यातय़िष्ये ||
३५ ख
सभा पर्व
अध्याय ११
युधिष्ठिर उवाच
वरुणस्य सभाय़ां तु नागास्ते कथिता विभो |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६७
सञ्जय़ उवाच
वरुणस्यात्मजो वीरः स तु राजा श्रुताय़ुधः |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय ८
नारद उवाच
वरुणस्यापि वक्ष्यामि सभां पुष्करमालिनीम् ||
३८ ख
महाप्रस्थानिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणादाहृतं पूर्वं मय़ैतत्पार्थकारणात् |
३९ क
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणाय़ ददौ सर्वान्वद्ध्वा दैतेय़दानवान् ||
४५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२६
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणाय़ प्रय़च्छैतान्वद्ध्वा दैतेय़दानवान् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ९६
कण्व उवाच
वरुणेनाभ्यनुज्ञातौ नागलोकं विचेरतुः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १६
वासुदेव उवाच
वरुणेन्दू मनुर्धाता विधाता त्वं धनेश्वरः ||
२२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२८
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणो निर्जितो राजा पावकश्चामितौजसा |
४८ क
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
वरुणो यादसां भर्ता वशी तं देशमागमत् ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय ४१
भगवानु उवाच
वरुणो वाथ वा वाय़ुः कुतो वेत्स्यन्ति मानवाः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
वरुणो वारुणान्दिव्यान्भुजङ्गान्प्रददौ शुभान् |
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वरुणो वारुणो वृक्षः पुष्कराक्षो महामनाः ||
७२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
वरूथं विवभौ तस्य ज्योतिर्भिः खमिवावृतम् ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २
सञ्जय़ उवाच
वरूथिना महता सध्वजेन; सुवर्णमुक्तामणिवज्रशालिना |
३६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
वरूथिना विनिष्पत्य व्यचरत्पृतनान्तरे ||
२२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
वरूथिना सैन्यमुखे महात्मा; वधे धृतः सर्वसपत्नय़ूनाम् ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
वरूथिनीं वेगवतीं विद्रुतां सपताकिनीम् |
७६ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७२
सञ्जय़ उवाच
वरूथिनीमभिप्रेत्य अवहारमकारय़त् ||
९२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
वरूथिन्यामनृत्येतां परिष्वज्य परस्परम् ||
६३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२४
धृतराष्ट्र उवाच
वरे प्रदिष्टे विप्रेण नाल्पतेजाय़मित्युत ||
४२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५२
कुरुरु उवाच
वरेण च्छन्द्यतां शक्र राजर्षिर्यदि शक्यते ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
वरेण च्छन्दय़ामास स तस्माद्गुरुवत्सलः |
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय २०४
नारद उवाच
वरेण छन्दिता सा तु व्रह्मणा प्रीतिमेव ह |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
वरेण छन्द्यतां राजा लभतां यद्यदिच्छति |
९ क
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
वरेण छन्दय़ामास तं नृपं स्विष्टकृत्तमः |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११३
भीष्म उवाच
वरेण छन्दय़ामास ततश्चैनं पितामहः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११९
सञ्जय़ उवाच
वरेण छन्दय़ामास स तु वव्रे वरं नृपः ||
१६ ख
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
वरेण छन्दय़ामास सर्वलोकपितामहः ||
१६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
युधिष्ठिर उवाच
वरेण तपसा वापि तन्मे व्याख्यातुमर्हति ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८२
सुरभ्यु उवाच
वरेण भगवन्मह्यं कृतं लोकपितामह |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
वरेणापि तथानेन त्वय़ा चापि यशस्विनि |
८ क
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
वरेण्यं वरदं देवं मनसा कर्मणैव च ||
११२ ख
आदि पर्व
अध्याय ९९
वैशम्पाय़न उवाच
वरैरसुलभैरुक्ता न प्रत्याख्यातुमुत्सहे ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
वरो महेन्द्रो देवानां कर्णः प्रहरतां वरः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वरो वराहो वरदो वरेशः सुमहास्वनः ||
१३४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४३
सनत्सुजात उवाच
वर्गप्रशंसी वनितासु द्वेष्टा; एतेऽपरे सप्त नृशंसधर्माः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १५८
भीष्म उवाच
वर्गप्रशंसी सततमाश्रमद्वेषसङ्करी ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९३
वसिष्ठ उवाच
वर्गस्य वर्गमाचारं तत्त्वं तत्त्वात्सनातनम् ||
५० ख
सभा पर्व
अध्याय १०
नारद उवाच
वर्गा च सौरभेय़ी च समीची वुद्वुदा लता ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
वर्चसा रूपतश्चैव सदृशा मे मतास्तव ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
वर्चस्विनां व्राह्मणानां स्नातकानां परिच्छदान् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ६१
दमय़न्त्यु उवाच
वर्चस्विनी सुप्रतिष्ठा स्वञ्चितोद्यतगामिनी ||
६२ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
वर्चा नाम महातेजाः सोमपुत्रः प्रतापवान् |
१६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३१
राजो उवाच
वर्चाः सुतेजसः पुत्रो विहव्यस्तस्य चात्मजः |
५८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ६९
भीष्म उवाच
वर्जनीय़ं सदा युद्धं राज्यकामेन धीमता ||
२२ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
वर्जनीय़ा वुधैरेते निवापे समुपस्थिते ||
४४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वर्जनीय़ाश्च वै नित्यं सक्तवो निशि भारत |
११४ क