आदि पर्व
अध्याय
२८
सूत उवाच
वर्मिणो विवुधाः सर्वे नानाशस्त्रैरवाकिरन् ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वर्मिणौ वद्धनिस्त्रिंशौ श्वेताश्वौ शङ्खशोभिनौ |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वर्मिभिः सादिभिर्यत्तैः प्रासपाणिभिरास्थितैः ||
१६ ग
वन पर्व
अध्याय
२९८
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षं त्रय़ोदशं चेदं मत्प्रसादात्कुरूद्वहाः |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
वर्षं रमणकं नाम जाय़न्ते तत्र मानवाः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३४८
नागभार्यो उवाच
वर्षं वर्षप्रिय़ः पक्षी दर्शनं तव काङ्क्षति ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
वर्षं हैरण्वतं नाम यत्र हैरण्वती नदी ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०३
सञ्जय़ उवाच
वर्षता शरवर्षाणि महान्ति पुरुषोत्तम |
६३ क
वन पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षतामिव मेघानां वृन्दानि ददृशे तदा ||
१९ ग
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
वर्षन्त इव जीमूताः प्रत्यदृश्यन्त दंशिताः ||
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
वर्षन्त इव जीमूताः सविद्युत्पवनेरिताः ||
१३९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४४
सनत्सुजात उवाच
वर्षन्ति चास्मै प्रदिशो दिशश्च; वसन्त्यस्मिन्व्रह्मचर्ये जनाश्च ||
१३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
भीष्म उवाच
वर्षपूगाभिसंवृद्धः शाखास्कन्धपलाशवान् ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
वर्षपूगैस्ततो जन्म लभन्ते कुत्सिते कुले ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
वर्षमज्ञातवासस्य वनवासस्य चानघ ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय
१३०
लोमश उवाच
वर्षमस्य गिरेर्मध्ये रामेण श्रीमता कृतम् ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
वर्षमाणा महत्तोय़ं पूरय़न्तो वसुन्धराम् |
७२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
९९
भीष्म उवाच
वर्षमात्रे तडागे तु सलिलं यस्य तिष्ठति |
१० क
वन पर्व
अध्याय
२९७
युधिष्ठिर उवाच
वर्षमापततां श्रेष्ठं वीजं निपततां वरम् |
३७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षमैरावतं नाम ततः शृङ्गवतः परम् ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
वर्षमैरावतं नाम तस्माच्छृङ्गवतः परम् ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१५
भीष्म उवाच
वर्षमोक्षकृतारम्भास्ते भवन्ति घनाघनाः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
वर्षशीतोष्णवातानां सहिष्णुः पररन्ध्रवित् ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९
धृतराष्ट्र उवाच
वर्षाणां चैव नामानि पर्वतानां च सञ्जय़ |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५९
भीष्म उवाच
वर्षाणां हि शतं पापः प्रतिष्ठां नाधिगच्छति ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२७८
भीष्म उवाच
वर्षाणामभवद्राजन्प्रय़ुतान्यर्वुदानि च ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
वर्षाणामेकशतवत्सहस्रं भीमविक्रमः ||
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
वर्षाणि तेषु कौरव्य सम्प्रोक्तानि मनीषिभिः ||
२२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
२७
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षाणि त्रीणि शिष्टानि राज्ञोऽस्य परमाय़ुषः ||
१० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
वर्षाणि द्वादश मुनिर्जलवासे धृतव्रतः ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय
२९८
युधिष्ठिर उवाच
वर्षाणि द्वादशारण्ये त्रय़ोदशमुपस्थितम् |
१५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
वर्षाण्यपरिमेय़ानि युगान्तमपि चावसेत् |
४९ क
वन पर्व
अध्याय
२४५
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षाण्येकादशातीय़ुः कृच्छ्रेण भरतर्षभ ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय
२४२
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षात्त्रय़ोदशादूर्ध्वं रणसत्रे नराधिपः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
२४७
व्यास उवाच
वर्षात्त्रय़ोदशादूर्ध्वं व्येतु ते मानसो ज्वरः ||
४६ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
वर्षात्त्रय़ोदशादूर्ध्वं सत्यं मां कुरु केशव |
२९ क
वन पर्व
अध्याय
४९
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षात्त्रय़ोदशादूर्ध्वं सह गाण्डीवधन्वना ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
९५
विश्वामित्र उवाच
वर्षान्करोतु भृतको राज्ञश्चास्तु पुरोहितः |
६९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
वर्षान्ते सस्यहा पीथो भाभिरापूरय़न्निव ||
१७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३९
सञ्जय़ उवाच
वर्षाप्रदोषे खद्योतैर्वृता वृक्षा इवावभुः ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
वर्षाप्रदोषे खद्योतैर्वृतो वृक्ष इवावभौ ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
वर्षाभ्यतीतो भगवाञ्शरदीव दिवाकरः ||
२० ख
सभा पर्व
अध्याय
५१
दुर्योधन उवाच
वर्षासु क्लिन्नकटवत्तिष्ठन्नेवावसीदति ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
वर्षासु वर्षतस्तावन्निवसत्यमरप्रभः ||
१२९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२५३
भीष्म उवाच
वर्षास्वाकाशशाय़ी स हेमन्ते जलसंश्रय़ः ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
१७
कृष्ण उवाच
वर्षास्विवोद्धतजला नदीर्नदनदीपतिः ||
१६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५७
कर्ण उवाच
वर्षाय़ुतैर्यस्य गुणा न शक्या; वक्तुं समेतैरपि सर्वलोकैः |
४८ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षित्वा धनधाराभिः कामै रत्नैर्धनैस्तथा |
४१ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
वर्षिष्यतीह वा देवो न वा देवो भविष्यति ||
२० ख
आदि पर्व
अध्याय
३३
सूत उवाच
वर्षैर्निर्वापय़िष्यामो मेघा भूत्वा सविद्युतः ||
२१ ख