उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
वलवन्तो हि ते सर्वे पाण्डवा देवविक्रमाः ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
वलवन्तो हि वलिभिर्दृश्यन्ते पुरुषर्षभ ||
९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
इन्द्रिय़ाण्यू ऊचुः
वलवन्तो ह्यनिय़मा निय़मा दुर्वलीय़साम् |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७५
समङ्ग उवाच
वलवन्तोऽवलाश्चैव तद्वदस्मान्सभाजय़ ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३५
व्यास उवाच
वलवन्तौ गदाहस्तौ पद्मनालानुसारिणौ ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
वलवन्तौ नरव्याघ्रौ दृढक्रोधौ प्रहारिणौ |
२ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
वलवन्धुर्निरामर्दः केतुशृङ्गो वृहद्वलः |
१७७ क
वन पर्व
अध्याय
१४८
वैशम्पाय़न उवाच
वलवर्ष्मप्रभावा हि प्रहीय़न्त्युद्भवन्ति च ||
७ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
वलवाँल्लघुहस्तश्च कृती युद्धविशारदः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१७
उपमन्युरु उवाच
वलवांश्चोपशान्तश्च पुराणः पुण्यचञ्चुरी |
१०४ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
वलवांस्तरुणो दक्षः क्षिप्रकारी च पाण्डवः |
१८ क
सभा पर्व
अध्याय
६२
भीष्म उवाच
वलवांस्तु यथा धर्मं लोके पश्यति पूरुषः |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
४
वैशम्पाय़न उवाच
वलवाकः शिनीवाकः सुत्यपालः कृतश्रमः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
वलवाञ्जाय़ते राजा वलं शक्रे हि नित्यदा ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२४
भीष्म उवाच
वलवाञ्जाय़ते वाय़ुस्तस्य स्पर्शो गुणो मतः ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
वलवानहमित्येव न मन्तव्यं सुय़ोधन |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
११७
भीष्म उवाच
वलवान्क्षतजाहारो नानासत्त्वभय़ङ्करः ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
वलवान्वा कृती वेति कृती राजन्विशिष्यते ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०८
सञ्जय़ उवाच
वलवान्वुद्धिमांश्चैव जितक्लेशो युधां वरः ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६७
भीष्म उवाच
वलवान्हि प्रकुपितः कुर्यान्निःशेषतामपि ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
वलवीर इति ख्यातो यस्त्वासीदसुरोत्तमः |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
वलवीर्यसमाविष्टः ससहाय़श्च साम्प्रतम् ||
६७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
वलवीर्योपपन्नानि यथैव त्वं शचीपते ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
वलव्यसनमुक्तं च तथैव वलहर्षणम् |
४७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
धृतराष्ट्र उवाच
वलसंरम्भवीर्यज्ञाः कोपय़िष्यन्ति संय़ुगे ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१६५
वसिष्ठ उवाच
वलस्थश्चासि राजा च वाहुवीर्यश्च क्षत्रिय़ः |
२० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
वलस्थस्य हि योगस्य वन्धनेशस्य पार्थिव |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
वलस्था गणिकाय़ुक्ताः सर्वाः प्रकृतय़स्तथा ||
६५ ख
सभा पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
वलस्य च महाराज दत्त्वा वेतनमग्रतः ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
वलस्य परिमाणे च भक्तवेतनय़ोस्तथा |
११ क
विराट पर्व
अध्याय
४६
भीष्म उवाच
वलस्य व्यसनानीह यान्युक्तानि मनीषिभिः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
९२
उतथ्य उवाच
वलस्यावलदग्धस्य न किञ्चिदवशिष्यते ||
१६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
वलहीनस्तथा योगो विषय़ैर्ह्रिय़तेऽवशः ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८९
भीष्म उवाच
वलहीनाश्च कौन्तेय़ यथा जालगता झषाः |
१६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
वलाकवर्णान्दाशार्हः पाञ्चजन्यं व्यनादय़त् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
१९७
स्त्र्यु उवाच
वलाका हि त्वय़ा दग्धा रोषात्तद्विदितं मम ||
३० ख
वन पर्व
अध्याय
१९७
मार्कण्डेय़ उवाच
वलाकां पतितां दृष्ट्वा गतसत्त्वामचेतनाम् |
५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४९
अर्जुन उवाच
वलाकान्धाभिसम्वद्धं नदीनां कौशिकस्य च ||
३३ ख
वन पर्व
अध्याय
१९८
मार्कण्डेय़ उवाच
वलाकाप्रत्ययेनासौ धर्म्यैश्च वचनैः शुभैः |
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
वलाकाशवलाभ्राभं ददृशे रूपमाहवे ||
३६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
वलाङ्गरूपहारिणी निधत्स्व केवलं निधिम् ||
४० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८६
भीष्म उवाच
वलात्कृतानां वलिभिः कृपणं वहु जल्पताम् |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६६
भीष्म उवाच
वलात्कृतेषु भूतेषु परित्राणं कुरूद्वह |
१५ क
वन पर्व
अध्याय
२९७
यक्ष उवाच
वलात्तोय़ं जिहीर्षन्तस्ततो वै सूदिता मय़ा ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४४
युधिष्ठिर उवाच
वलादन्यः प्रभाषेत धनमन्यः प्रदर्शय़ेत् ||
१८ ख
विराट पर्व
अध्याय
२१
वैशम्पाय़न उवाच
वलादहीय़त तदा सूतो भीमवलार्दितः ||
५५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४२
हिडिम्वो उवाच
वलादितो विनिष्पिष्य व्यपकृष्टो महात्मना ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
वलाद्गृहीत्वा माल्यानि मालाकारान्महावलाः |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय
१६५
वसिष्ठ उवाच
वलाद्ध्रिय़सि मे नन्दि क्षमावान्व्राह्मणो ह्यहम् ||
२४ ख
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
वलाधिकारे निक्षिप्य संहत्यानकदुन्दुभिम् ||
१२ ख