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भीष्म पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं भास्वरं कृतवर्मणः ||
४२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं माधवस्य महात्मनः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं लक्ष्मणस्य महारथः ||
२६ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ७८
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं शङ्खस्य रथिनां वरः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं सात्यकेः सुमहात्मनः ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णं हार्दिक्यस्य महात्मनः ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं तूर्णमुलूकस्य महारथः |
४५ ख
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं दिव्यं द्योतय़न्निव भास्करः ||
२६ ख
आदि पर्व
अध्याय २१६
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं पार्थो विमानं सुकृती यथा ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं भ्रातुरन्यच्च धनुराददे ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०५
द्रोण उवाच
आरुरोह रथं भ्रातुर्युधामन्योरभित्वरन् ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७४
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं राजंश्चित्रसेनस्य भास्वरम् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथं राजन्निरमित्रस्य भारत ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं शीघ्रं हय़ान्येमे च रश्मिभिः ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं शौरिर्विमानमिव पुण्यकृत् ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय २२४
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह रथं शौरेः सत्यभामा च भामिनी ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह रथश्रेष्ठं विशोकं चेदमव्रवीत् ||
८ ख
विराट पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
आरुरोह शमीवृक्षं वैराटिरवशस्तदा ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२२
सञ्जय़ उवाच
आरुरोह शिनेः पौत्रो ज्वलनादित्यसंनिभम् ||
४४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११०
नारद उवाच
आरुरोहाथ स मुनिर्गरुडं गालवस्तदा ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
आरुषी तु मनोः कन्या तस्य पत्नी मनीषिणः |
४५ क
आदि पर्व
अध्याय १४०
वैशम्पाय़न उवाच
आरुहेमां मम श्रोणीं नेष्यामि त्वां विहाय़सा ||
५ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
आरुह्य च गवां लोकं प्रय़ान्तं व्रह्मसत्रिणाम् |
४० क
शल्य पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
आरुह्य जवसम्पन्नाः पादाताः प्राद्रवन्भय़ात् ||
८ ख
सभा पर्व
अध्याय ५५
विदुर उवाच
आरुह्य तं मज्जति वा पतनं वाधिगच्छति ||
४ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७४
वैशम्पाय़न उवाच
आरुह्य नागप्रवरं निर्ययौ युद्धकाङ्क्षय़ा ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
आरुह्य यानं परिधावतां भवा; न्सुतैः समो मे भव वा मय़ा समः ||
६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
आरुह्य वाताय़नमेव शून्यं; स्थलं प्रकाशं कुशकाशहीनम् |
५४ क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
आरुह्य वृक्षं माद्रेय़ निरीक्षस्व दिशो दश ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८६
सञ्जय़ उवाच
आरुह्य शीलसम्पन्नान्वय़ःस्थांस्तुरगोत्तमान् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
आरुह्य स्वरथं वीरः प्रगृह्य च महद्धनुः |
५३ क
वन पर्व
अध्याय ११४
लोमश उवाच
आरुह्यात्र महाराज वीर्यवान्वै भविष्यसि ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
आरुह्यैरावतं शक्रस्त्रैलोक्यमनुसंय़यौ ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २१६
मार्कण्डेय़ उवाच
आरुह्यैरावतस्कन्धं प्रय़यौ दैवतैः सह |
३ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
आरेभिरे महत्कर्म तदा शक्रभय़ङ्करम् ||
११ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४७
सञ्जय़ उवाच
आरेवकास्त्रिगर्ताश्च मद्रका यवनास्तथा ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
नारद उवाच
आरोग्यं प्रिय़संवासो गृध्येत्तत्र न पण्डितः ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २
विदुर उवाच
आरोग्यं प्रिय़संवासो गृध्येदेषु न पण्डितः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
आरोग्याच्च शरीरस्य स पुनर्विन्दते श्रिय़म् ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
आरोग्याय़ुःप्रमाणाभ्यां द्विगुणं द्विगुणं ततः ||
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ६०
भीष्म उवाच
आरोचिता नः सुमहान्स धर्मः; सृष्टो व्रह्मणा त्रिषु वर्णेषु दृष्टः ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय ४२
वैशम्पाय़न उवाच
आरोढव्यस्त्वय़ा स्वर्गः सज्जीभव महाद्युते ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय १०९
लोमश उवाच
आरोढुं वापि कौन्तेय़ तस्मान्निय़तवाग्भव ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
आरोधनेन भक्तस्य पथश्चोपार्जनेन च ||
५० ख
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
आरोप्य च महावीर्यो महावुद्धिर्महावलः ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३५
वैशम्पाय़न उवाच
आरोप्य च रथे कर्णं प्राय़ात्सात्यकिना सह ||
२४ ख
शल्य पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
आरोप्य चैनं स्वरथं त्वरमाणः प्रदुद्रुवे ||
६५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २८
काक उवाच
आरोप्य पृष्ठं काकं तं हंसः कर्ण विचेतसम् |
५३ क
सभा पर्व
अध्याय २२
वैशम्पाय़न उवाच
आरोप्य भ्रातरौ चैव मोक्षय़ामास वान्धवान् ||
११ ख
वन पर्व
अध्याय ६२
वृहदश्व उवाच
आरोप्य विस्मिता राजन्दमय़न्तीमपृच्छत ||
२२ ख