आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे द्रौपदीं भद्रा प्रेष्याहमिति चाव्रवीत् ||
१९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
११
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे पितरं ज्येष्ठं धर्मराजो युधिष्ठिरः ||
१० ख
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे पृथुताम्राक्षी पृथां भद्रा यशस्विनी ||
१८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे प्राञ्जलिर्भूत्वा मूर्ध्ना पादौ नृपस्य ह ||
२७ ख
वन पर्व
अध्याय
१८०
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे मुदितो धीमान्भीमं च वलिनां वरम् ||
८ ख
वन पर्व
अध्याय
२५६
भीमसेन उवाच
ववन्दे विह्वलो राजा तांश्च सर्वान्मुनींस्तदा ||
१९ ख
आदि पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्दे व्राह्मणं काव्यं प्राञ्जलिः प्रणतः स्थितः ||
२८ ख
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्ध कक्ष्यां कौन्तेय़स्ततस्तं हर्षय़ञ्जनम् |
१९ क
वन पर्व
अध्याय
१६५
अर्जुन उवाच
ववन्ध चैव मे मूर्ध्नि किरीटमिदमुत्तमम् |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय
१०३
वैशम्पाय़न उवाच
ववन्ध नेत्रे स्वे राजन्पतिव्रतपराय़णा |
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४१
भीष्म उवाच
ववन्ध योगवन्धैश्च तस्याः सर्वेन्द्रिय़ाणि सः ||
११ ग
वन पर्व
अध्याय
२७३
मार्कण्डेय़ उवाच
ववन्ध रावणिर्भूय़ः शरैर्दत्तवरैस्तदा ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
ववन्धुर्विविधैर्योगैर्मत्स्यान्मत्स्योपजीविनः ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
५०
भीष्म उवाच
ववन्धुस्तत्र मत्स्यांश्च तथान्याञ्जलचारिणः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष चात्र पर्जन्यो मांसशोणितवृष्टिमान् |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२९६
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष तां दिशं कृत्स्नां शव्दवेधं च दर्शय़न् ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७६
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष धनुषा पार्थो वर्षाणीव सुरेश्वरः ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
८२
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष पुष्पवर्षं च कमलानि च भूरिशः |
१२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५७
वासुदेव उवाच
ववर्ष मघवांस्तत्र तव पुत्रे निपातिते ||
४८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष वासवश्चापि तोय़ं शुचि सुगन्धि च |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३२०
भीष्म उवाच
ववर्ष वासवस्तोय़ं रसवच्च सुगन्धि च |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष विशिखांस्तीक्ष्णान्वारिधारा इवाम्वुदः ||
९४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि कार्ष्णिः पञ्चरथान्प्रति ||
२० ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि चित्रं लघु च सुष्ठु च |
३४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि तपान्ते जलदो यथा ||
२० ग
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि द्रोणं प्रति जनेश्वर ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि नराधिपगणान्प्रति ||
३६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि मय़ि शक्र इवाचले ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि वर्षाणि मघवानिव |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि वृद्धः कुरुपितामहः ||
९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षाणि समन्तादेव व्राह्मणे ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षेण धाराभिरिव तोय़दः ||
२४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षेण मेघो वृष्ट्या यथाचलौ ||
७१ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षेण वर्षेण मघवानिव ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
ववर्ष शरवर्षेण सारथिं चाप्यपातय़त् ||
२० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९५
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्ष सुमहातेजा दृष्ट्वा तस्य तपोवलम् ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
ववर्षतुः पुनर्वाणैर्यथा मेघौ महागिरिम् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
ववर्षाञ्जनपर्वा स द्रुमवर्षं नभस्तलात् ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६६
सञ्जय़ उवाच
ववर्षुः शरवर्षाणि क्षत्रिय़ा युद्धदुर्मदाः ||
१३ ख
विराट पर्व
अध्याय
५८
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्षुः शरवर्षाणि प्रपतन्तं किरीटिनम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय
९६
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्षुः शरवर्षेण वर्षेणेवाद्रिमम्वुदाः ||
२१ ख
विराट पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्षुरभ्येत्य शरैः समन्ता; न्मेघा यथा भूधरमम्वुवेगैः ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
२३४
वैशम्पाय़न उवाच
ववर्षुरर्जुनं क्रोधाद्गदाशक्त्यृष्टिवृष्टिभिः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
ववर्षुर्मार्गणैस्तीक्ष्णैर्गिरिं मेरुमिवाम्वुदाः ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय
१९५
मार्कण्डेय़ उवाच
ववाध सर्वानसकृद्देवान्विष्णुं च वै भृशम् ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
ववाशिरे च दीप्ताय़ां दिशि गोमाय़ुवाय़साः |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६४
सञ्जय़ उवाच
ववुराय़ाति कौन्तेय़े सङ्ग्रामे समुपस्थिते ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
ववुर्वहुविधाश्चैव दिक्षु सर्वासु मारुताः |
१३२ क
मौसल पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
ववुर्वाताः सनिर्घाता रूक्षाः शर्करवर्षिणः |
२ क
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
ववुर्वाताः सनिर्घाताः पांसुवर्षं पपात च |
८ क