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अनुशासन पर्व
अध्याय ५३
भीष्म उवाच
वसु विश्राणय़ामास यथा वैश्रवणस्तथा ||
४८ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुः प्रीत्या मघवता महाराजोऽभिसत्कृतः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३३
कृप उवाच
वसुचन्द्रो दामचन्द्रः सिंहचन्द्रः सुवेधनः ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
वसुदानं च भल्लेन प्रेषय़द्यमसादनम् ||
४३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
वसुदानश्च कदनं कुर्वाणोऽतीव संय़ुगे |
८६ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४
सञ्जय़ उवाच
वसुदानस्य पुत्रेण न्यासितो देहमाहवे ||
७४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
वसुदानस्य भल्लेन शिरः काय़ादपाहरत् ||
८४ ख
सभा पर्व
अध्याय ४९
दुर्योधन उवाच
वसुदानो महेष्वासो गजेन्द्रं षष्टिहाय़नम् ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
वसुदामा सुदामा च विशोका नन्दिनी तथा |
५ क
वन पर्व
अध्याय २८७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुदेवस्य भगिनी सुतानां प्रवरा मम |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुदेवात्तु देवक्यां प्रादुर्भूतो महाय़शाः ||
८३ ख
सभा पर्व
अध्याय ३४
शिशुपाल उवाच
वसुदेवे स्थिते वृद्धे कथमर्हति तत्सुतः ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६०
वैशम्पाय़न उवाच
वसुदेवो महाराज कृष्णं वाक्यमथाव्रवीत् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
वसुधा वसुसम्पूर्णा वर्धते भूतिवर्धनी ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३३०
श्रीभगवानु उवाच
वसुधा सञ्चकम्पेऽथ नभश्च विपफाल ह ||
५३ ख
वन पर्व
अध्याय १७०
अर्जुन उवाच
वसुधां चापि कौन्तेय़ त्वद्वाहुवलनिर्जिताम् |
६९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
वसुधां दारय़ित्वा च पुनरप्सु न्यमज्जत |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५०
सञ्जय़ उवाच
वसुधामन्वपद्यन्त पश्यतस्तस्य रक्षसः ||
१०५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
वसुधामन्वपद्येतां वातनुन्नाविव द्रुमौ ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय १४२
वैशम्पाय़न उवाच
वसुधारेणुसंवीतौ वसुधाधरसंनिभौ |
१६ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुना राजमुख्येन प्रीतिमानव्रवीद्विभुः ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय १०४
वैशम्पाय़न उवाच
वसुना सह जातोऽय़ं वसुषेणो भवत्विति ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
वसुन्धरधराद्भ्रष्टौ पञ्चशीर्षाविवोरगौ ||
४४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
वसुन्धरामिमां कर्ण भोक्ष्यामो हतकण्टकाम् ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५७
इन्द्र उवाच
वसुपूर्णा च वसुधा वस चेदिषु चेदिप ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ११४
नारद उवाच
वसुप्रख्यो नरपतिः स वभूव वसुप्रदः ||
१७ ख
विराट पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
वसुप्रदा वासवतुल्यवीर्याः; पराजिता वासवजेन सङ्ख्ये |
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वसुप्रदो वासुदेवो वसुर्वसुमना हविः ||
८७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २
कर्ण उवाच
वसुप्रभावे वसुवीर्यसम्भवे; गते वसूनेव वसुन्धराधिपे |
७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
वसुभिः सहितं पश्य भीष्मं शान्तनवं नृपम् |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
वसुभिर्वसुधापाल गङ्गय़ा च महामते ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३५३
भीष्म उवाच
वसुभिश्च तदा राजन्कथेय़ं कथिता मम ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
वसुरत्नसमाकीर्णां ददावाङ्गिरसे तदा ||
९० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १५४
वैशम्पाय़न उवाच
वसुरेष महातेजाः शापदोषेण शोभने |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ६
भीष्म उवाच
वसुर्यज्ञशतैरिष्ट्वा द्वितीय़ इव वासवः |
३४ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुर्वसुप्रदश्चक्रे सेनापतिमरिन्दमम् |
३५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
वसुर्वसुमनाः सत्यः समात्मा संमितः समः |
२५ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
वसुवर्मधरं दृष्ट्वा तं वालं हेमकुण्डलम् |
१२ क
आदि पर्व
अध्याय ५७
वैशम्पाय़न उवाच
वसुवीर्यात्समभवन्महावीर्यो महाय़शाः ||
७६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वसुवेगो महावेगो मनोवेगो निशाचरः |
६६ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
वसुषेण इति ख्यातो वृष इत्येव च प्रभुः ||
१३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
वसुषेणं च पाञ्चालः कृत्स्नेन व्यधमद्रणे ||
१३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय ११०
धृतराष्ट्र उवाच
वसुषेणसहाय़ं मां नालं देवापि संय़ुगे |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७
युधिष्ठिर उवाच
वसुषेणे च धर्मज्ञे धृष्टकेतौ च पार्थिवे |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०८
सञ्जय़ उवाच
वसुषेणेन निर्मुक्तान्नव राजन्महाशरान् |
२७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
भीष्म उवाच
वसुहोमं महाप्राज्ञमासीनं कुरुनन्दन ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२२
भीष्म उवाच
वसुहोमोऽपि राज्ञो वै गामर्घ्यं च न्यवेदय़त् |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
वसूनां च सलोकत्वं मरुतां वा समाप्नुय़ात् |
५६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३२
श्रीभगवानु उवाच
वसूनां पावकश्चास्मि मेरुः शिखरिणामहम् ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
वसूनां पुनरुत्पत्तिर्भागीरथ्यां महात्मनाम् |
७८ क