chevron_left  वहुधाarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
वहुधा दारय़ां चक्रे महेष्वासं महारथम् ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १९७
स्त्र्यु उवाच
वहुधा दृश्यते धर्मः सूक्ष्म एव द्विजोत्तम |
४० क
वन पर्व
अध्याय २१२
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुधा निःसृतः काय़ाज्ज्योतिष्टोमः क्रतुर्यथा ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
वहुधा भीष्ममानर्छन्मार्गणैः कृतमार्गणाः ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुधा युध्यमानास्ते युद्धमार्गैः प्लवङ्गमाः |
३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
वहुधा वारय़ामास शरैः संनतपर्वभिः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७३
व्रह्मो उवाच
वहुधा विभजिष्यामि व्रह्महत्यामिमामहम् |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
वहुधा व्याहरन्दोषान्न तदद्योपपद्यते ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६६
सञ्जय़ उवाच
वहुधा समसज्जन्त आय़सैः परिघैरिव ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २५१
भीष्म उवाच
वहुधाचरितं पापमन्यत्रैवानुपश्यति ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय ३१
वैशम्पाय़न उवाच
वहुधातुपिनद्धाङ्गान्हिमवच्छिखरानिव ||
२३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
वहुधातुपिनद्धाङ्गैर्हिमवच्छिखरैरिव ||
२२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
वहुधातुविचित्रस्य श्वेतस्येव महागिरेः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९४
वसिष्ठ उवाच
वहुधात्मा प्रकुर्वीत प्रकृतिं प्रसवात्मिकाम् |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५४
युधिष्ठिर उवाच
वहुधादर्शने लोके श्रेय़ो यदिह मन्यसे |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
वहुधादारय़न्क्रुद्धा विषाणैरितरेतरम् |
७ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०९
अङ्गिरा उवाच
वहुधान्यो वहुधनो वहुपुत्रश्च जाय़ते ||
२५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
मुनिरु उवाच
वहुनक्रझषग्राहां तिमिङ्गिलगणाय़ुताम् |
३८ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
वहुना किं प्रलापेन यतो धर्मस्ततो जय़ः ||
१६ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
वहुना च गजाश्वेन भूरभूद्भीमदर्शना ||
११३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८१
गाव ऊचुः
वहुनात्र किमुक्तेन गम्यतां यत्र वाञ्छसि |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४६
युधिष्ठिर उवाच
वहुनात्र किमुक्तेन नाहं तत्सोढुमुत्सहे ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय ३२
युधिष्ठिर उवाच
वहुनापि ह्यविद्वांसो नैव तुष्यन्त्यवुद्धय़ः |
३२ क
शल्य पर्व
अध्याय ५७
वासुदेव उवाच
वहुपादैर्वहुभुजैः कवन्धैर्घोरदर्शनैः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२९
व्यास उवाच
वहुपाद्भ्यो विशिष्टानि द्विपादानि वहून्यपि ||
१३ ख
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुपाषण्डसङ्कीर्णाः परान्नगुणवादिनः |
४३ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
वहुपुत्रः प्रिय़ापत्यः सर्वभूतानुकम्पकः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८९
भीष्म उवाच
वहुपुत्रो विशाखासु पित्र्यमीहन्भवेन्नरः |
८ क
वन पर्व
अध्याय २५
अर्जुन उवाच
वहुपुष्पफलं रम्यं नानाद्विजनिषेवितम् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
वहुपुष्पफलं रम्यं शिवं पुण्यजनोचितम् |
३ क
वन पर्व
अध्याय २३९
वैशम्पाय़न उवाच
वहुप्रकारमप्युक्तो निश्चय़ान्न व्यचाल्यत ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
वहुप्रकारा दृश्यन्ते सर्व एवाघशंसिनः |
६ क
वन पर्व
अध्याय १८६
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुप्रजा ह्रस्वदेहाः शीलाचारविवर्जिताः |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०८
भीष्म उवाच
वहुप्रत्यर्थिकं राज्यमुपास्ते गणय़न्निशाः ||
१५१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
वहुप्रत्यर्थिकं ह्येतद्राज्यं नाम नराधिप ||
१२ ख
विराट पर्व
अध्याय ३६
वैशम्पाय़न उवाच
वहुप्रवीरमत्युग्रं देवैरपि दुरासदम् |
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वहुप्रसादः स्वपनो दर्पणोऽथ त्वमित्रजित् |
७८ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
वहुभिः क्षत्रिय़ैर्गुप्तं पृथिव्यां लोकसंमतैः |
१३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
वहुभिः पार्थिवैर्गुप्तमस्मत्प्रिय़चिकीर्षुभिः |
१० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४३
सञ्जय़ उवाच
वहुभिः साय़कैस्तीक्ष्णैराजघान स्तनान्तरे ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०१
भीष्म उवाच
वहुभिर्गुणजातैस्तु ये युद्धकुशला जनाः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११०
भीष्म उवाच
वहुभिर्निय़मैरेवं मासानश्नाति यो नरः |
१३२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
वहुभिर्वहुधा रूपैर्विश्वं व्याप्नोति वै जगत् |
७५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४६
वासुदेव उवाच
वहुभिर्विविधै रूपैर्विश्वं व्याप्तमिदं जगत् |
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०५
द्रोण उवाच
वहुभिस्ताडय़ामास ते हताः प्रापतन्भुवि ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
वहुभिस्तेन चाभ्यस्तस्तं विव्याध शताधिकैः ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वहुभूतो वहुधनः सर्वाधारोऽमितो गतिः |
४९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ३२
भीष्म उवाच
वहुमानः परः केषु भवतो यान्नमस्यसि |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३७
द्रोण उवाच
वहुमानः परो राजन्संनतिश्च कपिध्वजे ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
वहुमानमलव्धेषु लव्धे मध्यस्थतां पुनः |
४० क