अनुशासन पर्व
अध्याय
६७
यम उवाच
वहुशः पुरुषव्याघ्र वेदप्रामाण्यदर्शनात् ||
३२ ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
विराट उवाच
वहुशः प्रतिषिद्धोऽसि न च वाचं निय़च्छसि |
४३ क
वन पर्व
अध्याय
७३
वृहदश्व उवाच
वहुशः सम्पतन्तीं त्वां जनः शङ्केत दोषतः |
२८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
६१
भीष्म उवाच
वहुशश्च ममोक्तोऽसि न च मे तत्त्वय़ा कृतम् ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२४
श्रीभगवानु उवाच
वहुशाखा ह्यनन्ताश्च वुद्धय़ोऽव्यवसाय़िनाम् ||
४१ ख
वन पर्व
अध्याय
१८६
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुशून्या जनपदा मृगव्यालावृता दिशः |
३३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
वहुशो भृशविद्धौ तौ क्षरमाणौ क्षतोद्भवम् |
४३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
९८
नारद उवाच
वहुशो मातले त्वं च तव पुत्रश्च गोमुखः |
८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
वहुशो योधय़ित्वा च भीमसेनं महारथः |
२२ क
शल्य पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
वहुशो विदुरद्रोणकृपगाङ्गेय़सृञ्जय़ैः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
वहुशो हि मय़ा राजंस्तथ्यमुक्तं हितं वचः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
वहुशोऽतिप्रय़त्नेन महतात्मकृतेन ह ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०५
भीष्म उवाच
वहुश्रुतः कृतप्रज्ञस्त्वद्विधः शरणं भवेत् ||
६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५२
धृतराष्ट्र उवाच
वहुश्रुतः कृतात्मा च वृद्धसेवी जितेन्द्रिय़ः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
वहुश्रुतश्चैत्रकथः पण्डितोऽनलसोऽशठः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
वहुश्रुता हि ते विप्रा वहवः पर्युपासिताः ||
३० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
६५
इन्द्र उवाच
वहुश्रुत्या गुरुशुश्रूषय़ा वा; परस्य वा संहननाद्वदन्ति |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९७
भीष्म उवाच
वहुय़त्नेन महता पापनिर्हरणं तथा ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१९४
मार्कण्डेय़ उवाच
वहुय़ोजनविस्तीर्णे वहुय़ोजनमाय़ते ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय
१९३
उत्तङ्क उवाच
वहुय़ोजनविस्तीर्णो वहुय़ोजनमाय़तः ||
१५ ख
विराट पर्व
अध्याय
१०
वैशम्पाय़न उवाच
वहूंश्च दीर्घांश्च विकीर्य मूर्धजा; न्महाभुजो वारणमत्तविक्रमः |
२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
वहूक्त्वा च ततो राजन्राजानं च सुय़ोधनम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
वहूदकं सुय़वसं तुषाङ्गारसमन्वितम् |
८० क
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
अर्जुन उवाच
वहूदरं वहुदंष्ट्राकरालं; दृष्ट्वा लोकाः प्रव्यथितास्तथाहम् ||
२३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२२
इन्द्रिय़ाण्यू ऊचुः
वहूनपि हि सङ्कल्पान्मत्वा स्वप्नानुपास्य च |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
वहूनपि हय़ारोहान्भल्लैः संनतपर्वभिः |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
वहूनप्याविशन्मोहो भीरून्हृदय़दुर्वलान् ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२९
श्रीभगवानु उवाच
वहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनां पुरुषाणां च यथैका योनिरुच्यते |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
व्रह्मो उवाच
वहूनां पुरुषाणां स यथैका योनिरुच्यते |
२५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२६४
युधिष्ठिर उवाच
वहूनां यज्ञतपसामेकार्थानां पितामह |
१ क
वन पर्व
अध्याय
३३
द्रौपद्यु उवाच
वहूनां समवाय़े हि भावानां कर्म सिध्यति |
४८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
वहूनाधिरथिः कर्णः प्रममाथ रणेषुभिः ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२८
अश्मो उवाच
वहूनामिच्छतां नास्ति समृद्धानां विचेष्टताम् ||
२४ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनि कथय़ित्वा तौ रेमाते पार्थमाधवौ ||
२८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
८९
युधिष्ठिर उवाच
वहूनि किल युद्धानि विजय़स्य नराधिपैः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३०
भीष्म उवाच
वहूनि ग्रामवास्तव्या रोषाद्व्रूय़ुः परस्परम् |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१२
शल्य उवाच
वहूनि च नृशंसानि कृतानीन्द्रेण वै पुरा |
७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६४
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनि च विचित्राणि भाजनानि सहस्रशः |
१३ क
मौसल पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनि च सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
३८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनि च सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
६ क
वन पर्व
अध्याय
१६५
अर्जुन उवाच
वहूनि च सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२७
कर्ण उवाच
वहूनि तव सैन्यानि योधाश्च वहवस्तथा |
२३ क
आदि पर्व
अध्याय
३
सूत उवाच
वहूनि नागवर्त्मानि गङ्गाय़ास्तीर उत्तरे |
१४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
वहूनि पतनानि त्वमाचक्षाणो मुहुर्मुहुः |
४५ क
शल्य पर्व
अध्याय
५९
युधिष्ठिर उवाच
वहूनि परुषाण्युक्त्वा वनं प्रस्थापिताः स्म ह ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३२८
श्रीभगवानु उवाच
वहूनि मम नामानि कीर्तितानि महर्षिभिः ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
२६
श्रीभगवानु उवाच
वहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
वहूनि यज्ञरूपाणि नानाकर्मफलानि च ||
४८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२१६
शक्र उवाच
वहूनि वर्षपूगानि विहारे दीप्यतः श्रिय़ा ||
१८ ख