वन पर्व
अध्याय
१४२
युधिष्ठिर उवाच
वहूनि वहुजातानि यानि प्राप्तः सुय़ोधनः ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
१५३
वैशम्पाय़न उवाच
वहूनि वहुरूपाणि विरजांसि समाददे ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
वहूनि सम्परिक्रम्य तीर्थान्याय़तनानि च ||
१० ख
शल्य पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वहूनि सुनृशंसानि कृतानि खलु पाण्डवैः |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७७
वासुदेव उवाच
वहूनि सुनृशंसानि कृतान्येतेन मानद |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
धृतराष्ट्र उवाच
वहूनि सुविचित्राणि द्वन्द्वय़ुद्धानि सञ्जय़ |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२२०
भीष्म उवाच
वहूनीन्द्रसहस्राणि दैतेय़ानां युगे युगे |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२१७
वलिरु उवाच
वहूनीन्द्रसहस्राणि समतीतानि वासव |
५४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
६
सञ्जय़ उवाच
वहूनीह विकुर्वाणो दिव्यान्यस्त्राणि संय़ुगे |
३५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७९
धृतराष्ट्र उवाच
वहूनीह विचित्राणि द्वैरथानि स्म सञ्जय़ |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
भीष्म उवाच
वहूनीह सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
१८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१०१
नारद उवाच
वहूनीह सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
३१
सूत उवाच
वहूनीह सहस्राणि प्रय़ुतान्यर्वुदानि च |
१८ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२८५
जनक उवाच
वहूनीह हि लोके वै गोत्राणि मुनिसत्तम ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय
११५
भृगुरु उवाच
वहूनृषीन्महातेजाः पाण्डवेय़ात्यवर्तत ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
वहूनेकरथेनाजौ योधय़ित्वा महारथान् |
१९ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
११२
वृहस्पतिरु उवाच
वहून्क्लेशान्समासाद्य संसारांश्चैव विंशतिम् ||
९१ ख
वन पर्व
अध्याय
१७४
वैशम्पाय़न उवाच
वहून्प्रपातांश्च समीक्ष्य वीराः; स्थलानि निम्नानि च तत्र तत्र ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३३
श्रीभगवानु उवाच
वहून्यदृष्टपूर्वाणि पश्याश्चर्याणि भारत ||
६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
वहून्यद्भुतरूपाणि तानि मे गदतः शृणु ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
९६
नारद उवाच
वहून्यद्भुतरूपाणि द्रष्टव्यानीह मातले |
२५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
२७
व्राह्मण उवाच
वहून्यव्यक्तवर्णानि पुष्पाणि च फलानि च |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७
युधिष्ठिर उवाच
वहून्यहानि कौरव्यः कुरुक्षेत्रे महामृधे ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५१
भीष्म उवाच
वहून्याक्षेपय़ुक्तानि त्वामाह वचनानि सः |
३ क
विराट पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
वहून्याश्चर्यरूपाणि कुर्वन्तो जनसंसदि |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
३६
विदुर उवाच
वहून्वहुत्वादाय़ासान्सहन्तीत्युपमा सताम् ||
५७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
वहून्स्ववंशप्रभवान्समतीतः स्वकैर्गुणैः ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
युधिष्ठिर उवाच
वहूपकरणा यज्ञा नानासम्भारविस्तराः ||
२ ख
वन पर्व
अध्याय
८०
पुलस्त्य उवाच
वहूपकरणा यज्ञा नानासम्भारविस्तराः ||
३५ ख
वन पर्व
अध्याय
१४४
भीमसेन उवाच
वहेदनघ सर्वान्नो वचनात्ते घतोत्कचः ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
वहेदमित्रं स्कन्धेन यावत्कालविपर्ययः |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
३०
गरुड उवाच
वहेय़मपरिश्रान्तो विद्धीदं मे महद्वलम् ||
५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
वह्निं चापि सुसन्दीप्तं मीनांश्चैव सुपीवरान् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय
६०
भीष्म उवाच
वह्निं जुहोति धर्मेण श्रद्धा वै कारणं महत् ||
४७ ख
सभा पर्व
अध्याय
४३
दुर्योधन उवाच
वह्निमेव प्रवेक्ष्यामि भक्षय़िष्यामि वा विषम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
वह्नेरिव प्रदीप्तस्य ग्रीष्मे शुष्कं तृणोलपम् ||
७ ग
आदि पर्व
अध्याय
२१७
वैशम्पाय़न उवाच
वह्नेश्चापि प्रहृष्टस्य खमुत्पेतुर्महार्चिषः |
१४ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
९१
वैशम्पाय़न उवाच
वह्वन्नधनरत्नौघः सुरामैरेय़सागरः ||
३६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४१
वैशम्पाय़न उवाच
वह्वन्नपानसंय़ुक्तः सुसमृद्धगुणान्वितः |
२३ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१९
वैशम्पाय़न उवाच
वह्वन्नरसपानाढ्याः सभा विदुर कारय़ |
१३ क
सभा पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
वह्वन्नाञ्शय़नैर्युक्तान्सगणानां पृथक्पृथक् |
४७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१३२
भीष्म उवाच
वह्वपथ्यं वलवति न किञ्चित्त्राय़ते भय़ात् ||
४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१४९
जम्वुक उवाच
वह्वलीकमसत्यं च प्रतिवादाप्रिय़ंवदम् |
८१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१५८
भीष्म उवाच
वह्वलीको मनस्वी च लुव्धोऽत्यर्थं नृशंसकृत् ||
७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
वह्ववद्धमकर्णीय़ं को हि व्रूय़ाज्जिजीविषुः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
अर्जुन उवाच
वह्वागस्कृत्कुसम्वन्धी पापदेशसमुद्भवः |
४७ क
वन पर्व
अध्याय
८६
धौम्य उवाच
वह्वारामा वहुजला तापसाचरिता शुभा ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३३
महेश्वर उवाच
वह्वावाधपरिक्लिष्टे सोऽधमे जाय़ते कुले ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
वह्वाशिनं ततो भीमः शरेण नतपर्वणा |
२८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
वह्वाशी विप्रतीपश्च वाल्येऽपि रभसः सदा ||
१० ख