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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
वाक्येन तेन हि तदा तं जनं पुरुषर्षभः |
२ क
आदि पर्व
अध्याय ३०
शक्र उवाच
वाक्येनानेन तुष्टोऽहं यत्त्वय़ोक्तमिहाण्डज |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
वाक्यैरमृतकल्पैर्हि प्रातिष्ठन्त व्रजन्ति च ||
१०४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय २०
वैशम्पाय़न उवाच
वाक्योपादानहेतोस्तु वक्ष्यामि विदिते सति ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
वाक्षल्यस्तु न निर्हर्तुं शक्यो हृदिशय़ो हि सः ||
७६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९४
सञ्जय़ उवाच
वाक्षल्यैस्तव पुत्रेण सोऽतिविद्धः पितामहः |
१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
वाक्संय़मो हि नृपते सुदुष्करतमो मतः |
७३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १११
भीष्म उवाच
वाक्सत्यवचनार्थाय़ दुर्गाण्यतितरन्ति ते ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८८
हंस उवाच
वाक्साय़का वदनान्निष्पतन्ति; यैराहतः शोचति रात्र्यहानि |
९ क
आदि पर्व
अध्याय ८२
यय़ातिरु उवाच
वाक्साय़का वदनान्निष्पतन्ति; यैराहतः शोचति रात्र्यहानि |
११ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वाक्साय़का वदनान्निष्पतन्ति; यैराहतः शोचति रात्र्यहानि |
५७ क
उद्योग पर्व
अध्याय ३४
विदुर उवाच
वाक्साय़का वदनान्निष्पतन्ति; यैराहतः शोचति रात्र्यहानि |
७७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८४
भीष्म उवाच
वागङ्गदोषान्परिहृत्य मन्त्रं; संमन्त्रय़ेत्कार्यमहीनकालम् ||
५४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
वागध्यात्ममिति प्राहुर्यथाश्रुतिनिदर्शनम् |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४०
भीष्म उवाच
वागस्त्रा वाक्छुरीमत्त्वा दुग्धविद्याफला इव |
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
वागादीनि प्रवर्तन्ते गुणेष्वेव गुणैः सह |
४४ ख
वन पर्व
अध्याय २९७
युधिष्ठिर उवाच
वागेका वृश्चते यज्ञं तां यज्ञो नातिवर्तते ||
३५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११५
भीष्म उवाच
वागेवार्थो भवेत्तस्य न ह्येवार्थो जिघांसतः ||
८ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
वाग्घीनस्य च यन्मात्रमिष्टानिष्टं कृतं मुखे |
१० क
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
वाग्दण्डकर्ममनसां त्रय़ाणां च निवर्तकः ||
३४ ख
आदि पर्व
अध्याय ७४
देवय़ान्यु उवाच
वाग्दुरुक्तं महाघोरं दुहितुर्वृषपर्वणः |
१२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २०७
गुरुरु उवाच
वाग्देहमनसां शौचं क्षमा सत्यं धृतिः स्मृतिः |
६ क
आदि पर्व
अध्याय ७९
द्रुह्युरु उवाच
वाग्भङ्गश्चास्य भवति तज्जरां नाभिकामय़े ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६२
भीष्म उवाच
वाग्भिः स्तुतो वरिष्ठाभिः श्रोतुमिच्छाम तं वय़म् ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
नारद उवाच
वाग्भिरृग्भूषितार्थाभिः स्तवैश्चार्थविदां वर ||
२४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२६
वासुदेव उवाच
वाग्भिरृग्भूषितार्थाभिः स्तुवन्तो मधुसूदनम् ||
४६ ख
आदि पर्व
अध्याय ४९
सूत उवाच
वाग्भिर्मङ्गलय़ुक्ताभिस्तोषय़िष्येऽद्य मातुल |
२० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
वाग्भिर्मनोनुकूलाभिः पूजय़न्तो जनाधिप ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
वाग्भिश्च भगवान्येन देवसेनाग्रगः प्रभुः |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
वाग्भिश्चामृतकल्पाभिर्धर्मराजं युधिष्ठिरम् ||
८३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
वाग्भिस्त्वप्रतिरूपाभिरतुदत्सकनीय़सम् |
१४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३४८
नागभार्यो उवाच
वाग्मित्वं सत्यवाक्येन परत्र च महीय़ते ||
१० ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ९३
श्वशुर उवाच
वाग्मी तदा द्विजश्रेष्ठो धर्मः पुरुषविग्रहः ||
५६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४७
वैशम्पाय़न उवाच
वाग्यज्ञेनार्चितो देवः प्रीय़तां मे जनार्दनः ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
नारद उवाच
वाग्यतः प्राञ्जलिर्भूत्वा तूष्णीमासीद्युधिष्ठिर ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२६
भीष्म उवाच
वाग्यतः प्रय़तो भूत्वा ववन्दे परमेश्वरम् |
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४१
सञ्जय़ उवाच
वाग्यतः प्रय़यौ येन प्राङ्मुखो रिपुवाहिनीम् ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
मुनिरु उवाच
वाग्यतः सङ्गृहीतात्मा सर्वभूतदय़ान्वितः ||
५० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७७
भीष्म उवाच
वाग्यतः सर्पिषा भूमौ गवां व्युष्टिं तथाश्नुते ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वाग्यतो दन्तकाष्ठं च नित्यमेव समाचरेत् |
६६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १०७
भीष्म उवाच
वाग्यतो नैकवस्त्रश्च नासंविष्टः कदाचन |
८८ क
वन पर्व
अध्याय २३९
वैशम्पाय़न उवाच
वाग्यतो राजशार्दूलः स स्वर्गगतिकाङ्क्षय़ा |
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
राजो उवाच
वाग्युद्धं तदिदं तीव्रं मम विप्र त्वय़ा सह ||
४५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
राजो उवाच
वाग्वज्रा व्राह्मणाः प्रोक्ताः क्षत्रिय़ा वाहुजीविनः |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ११९
व्यास उवाच
वाग्वुद्धिपाणिपादैश्चाप्युपेतस्य विपश्चितः |
५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५६
भीष्म उवाच
वाग्वृद्धं त्राय़ते श्रद्धा मनोवृद्धं च भारत |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५२
भीष्म उवाच
वाग्वेगो मानसो वेगो निन्दावेगस्तथैव च |
८ क
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
वाङ्नाराचैस्तुदंस्तीक्ष्णैरुल्काभिरिव कुञ्जरम् ||
२५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २७
सिद्ध उवाच
वाङ्मनःकर्मजैर्ग्रस्तः पापैरपि पुमानिह |
६० क
शान्ति पर्व
अध्याय १६९
पुत्र उवाच
वाङ्मनःकर्मय़ज्ञश्च भविष्याम्युदगाय़ने ||
३० ख