chevron_left  सिषिचुर्मार्गणैर्घोरैर्गिरिंarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
सिषिचुर्मार्गणैर्घोरैर्गिरिं मेघा इवाम्वुभिः ||
५५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
सिषिचुस्ते ततः सर्वे पाञ्चालाचलमाहवे ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
सिसृक्षुः शिशिराण्येष दक्षिणां भजते दिशम् |
३० क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
सीता च भार्या भद्रं ते वैदेही जनकात्मजा ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २७५
मार्कण्डेय़ उवाच
सीता चापि महाभागा वरं हनुमते ददौ |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ८३
मुनिरु उवाच
सीता नाम नदी राजन्प्लवो यस्यां निमज्जति |
४४ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सीता मद्वचनाद्वाच्या समाश्वास्य प्रसाद्य च |
५६ क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सीतां निवेशय़ामास भवने नन्दनोपमे |
४१ ख
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
सीतां संस्मृत्य धर्मात्मा रुद्धां राक्षसवेश्मनि ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सीताहरणदुःखार्तः पम्पां रामः समासदत् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय २६५
मार्कण्डेय़ उवाच
सीते पर्याप्तमेतावत्कृतो भर्तुरनुग्रहः |
८ क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
सीते राक्षसराजोऽहं रावणो नाम विश्रुतः |
३३ क
वन पर्व
अध्याय २६६
मार्कण्डेय़ उवाच
सीते रामस्य दूतोऽहं वानरो मारुतात्मजः |
६० क
वन पर्व
अध्याय २६४
मार्कण्डेय़ उवाच
सीते वक्ष्यामि ते किञ्चिद्विश्वासं कुरु मे सखि |
५४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७६
भीष्म उवाच
सीदतामपि कौन्तेय़ न कीर्तिरवसीदति ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
सीदन्तं चैनमालोक्य कृपः शारद्वतो युधि |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय २३
सञ्जय़ उवाच
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति |
२९ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
सीदन्तीव च मेऽङ्गानि मुमूर्षोरिव पार्थिवाः ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
सीदन्रुधिरसिक्तश्च रथोपस्थ उपाविशत् |
५२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
सीदमानां चमूं दृष्ट्वा पाण्डुपुत्रभय़ार्दिताम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सीदमानानि चक्राणि समूहुस्तुरगा भृशम् |
३३ क
आदि पर्व
अध्याय ४८
सूत उवाच
सीदामीव च संमोहाद्घूर्णतीव च मे मनः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
सञ्जय़ उवाच
सीदेत समरे जिष्णो नात्र कार्या विचारणा ||
२२ ख
आदि पर्व
अध्याय ४०
सूत उवाच
सीमन्तमिव कुर्वाणं नभसः पद्मवर्चसम् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५६
वासुदेव उवाच
सीमन्तमिव कुर्वाणां नभसः पावकप्रभाम् |
९ क
वन पर्व
अध्याय २५१
वैशम्पाय़न उवाच
सीमन्तिनीनां मुख्याय़ां विनिवृत्तः कथं भवान् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११५
सञ्जय़ उवाच
सीमावृक्षे निपतिते कुरूणां समितिक्षय़े ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४८
वैशम्पाय़न उवाच
सीराय़ुधस्तदा रामस्तस्मिंस्तीर्थवरे तदा |
१५ क
वन पर्व
अध्याय १२५
लोमश उवाच
सुकन्यया सहारण्ये विजहारानुरक्तय़ा ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय २०
भीमसेन उवाच
सुकन्या नाम शार्याती भार्गवं च्यवनं वने |
७ क
वन पर्व
अध्याय १२१
लोमश उवाच
सुकन्यां चापि भार्यां स राजपुत्रीमिवाप्तवान् ||
२१ ग
वन पर्व
अध्याय १२२
लोमश उवाच
सुकन्यापि पतिं लव्ध्वा तपस्विनमनिन्दिता |
२६ क
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
सुकन्याय़ां महात्मानं प्रमतिं दीप्ततेजसम् ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय १२५
लोमश उवाच
सुकन्याय़ाः पितुश्चास्य लोके कीर्तिः प्रथेदिति |
६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १३
सञ्जय़ उवाच
सुकल्पितं दानवनागसंनिभं; महाभ्रसंह्रादममित्रमर्दनम् |
६ क
शल्य पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
सुकल्पितः शास्त्रविनिश्चय़ज्ञैः; सदोपवाह्यः समरेषु राजन् ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६२
सञ्जय़ उवाच
सुकल्पिता हैमवता मदोत्कटा; रणाभिकामैः कृतिभिः समास्थिताः |
३६ क
कर्ण पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
सुकल्पिताः स्यन्दनवाजिनागाः; समास्थिताः कृतय़त्नैर्नृवीरैः |
५७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
सुकल्पितेनोह्यमानः स्यन्दनेन विराजता ||
११ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
सुकिङ्किणीकाभरणा कालपाशोपमाय़सी |
६९ क
आदि पर्व
अध्याय १७७
धृष्टद्युम्न उवाच
सुकुण्डलश्चित्रसेनः सुवर्चाः कनकध्वजः |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १२५
वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारं च सूक्ष्मं च गुरुं चापि गुरुप्रिय़ः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सुकुमारं महेष्वासं वासवस्यात्मजात्मजम् |
२४ क
सभा पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारं वशे चक्रे सुमित्रं च नराधिपम् ||
१० ख
सभा पर्व
अध्याय २८
वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारं वशे चक्रे सुमित्रं च नराधिपम् |
४ क
विराट पर्व
अध्याय ३८
वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारं समाज्ञातं सङ्ग्रामे नातिकोविदम् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
सुकुमारः सदा वीरो महार्हशय़नोचितः |
३७ क
आदि पर्व
अध्याय १३८
वैशम्पाय़न उवाच
सुकुमारतरां स्त्रीणां महार्हशय़नोचिताम् |
१८ क
विराट पर्व
अध्याय ३
युधिष्ठिर उवाच
सुकुमारश्च शूरश्च दर्शनीय़ः सुखोचितः ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ६०
वृहदश्व उवाच
सुकुमारानवद्याङ्गीं पूर्णचन्द्रनिभाननाम् ||
३१ ख