द्रोण पर्व
अध्याय
१२१
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवश्च वीभत्सुं प्रशशंस महारथम् ||
४० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६६
भीष्म उवाच
वासुदेवश्च संय़न्ता योद्धा चैव धनञ्जय़ः |
३१ क
विराट पर्व
अध्याय
४५
अश्वत्थामो उवाच
वासुदेवसमं युद्धे तं पार्थं को न पूजय़ेत् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवसमं युद्धे वासुदेवादनन्तरम् ||
३१ ख
वन पर्व
अध्याय
१४२
युधिष्ठिर उवाच
वासुदेवसमं वीर्ये कार्तवीर्यसमं युधि |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवसमं वीर्ये धनञ्जय़समं वले |
४४ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९४
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसमाय़ुक्तं रथेनोद्यन्तमच्युतम् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसहस्रं वा फल्गुनानां शतानि च |
७० क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसहस्रं वा फल्गुनानां शतानि वा |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११६
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसहाय़स्त्वं महत्कर्म करिष्यसि |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
५३
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसहाय़स्य गाण्डीवं धुन्वतो धनुः |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
७७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवसहाय़ाश्च महेन्द्रसमविक्रमाः ||
८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
५०
धृतराष्ट्र उवाच
वासुदेवसहाय़ेन जरासन्धो निपातितः ||
३७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१६२
धृतराष्ट्र उवाच
वासुदेवसहाय़ेन पार्थेन दृढधन्वना ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३१
जनमेजय़ उवाच
वासुदेवसहाय़ो यः प्राप्तवाञ्जय़मुत्तमम् ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्ततो युद्धं कुरूणामकरोन्महत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
११७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्ततो राजन्भूय़ोऽर्जुनमभाषत ||
५४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्ततो वेद्यो वृषत्वाद्वृष्णिरुच्यते ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्तु तं दृष्ट्वा जगाम शिरसा क्षितिम् |
३९ क
आदि पर्व
अध्याय
२१३
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवस्तु पार्थेन तत्रैव सह भारत |
५७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्तु राधेय़माहवेऽभिजगाम वै |
८४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्तु सम्प्रेक्ष्य पार्थस्य मृदुय़ुद्धताम् |
५० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्तु हर्षेण महताभिपरिप्लुतः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्त्वसम्भ्रान्तो धैर्यमास्थाय़ सत्त्ववान् |
५१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्त्वसम्भ्रान्तो धैर्यमास्थाय़ सात्वतः |
४२ क
सभा पर्व
अध्याय
६२
द्रौपद्यु उवाच
वासुदेवस्य च सखी पार्थिवानां सभामिय़ाम् ||
१० ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५१
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवस्य तद्वाक्यमनुस्मृत्य युधिष्ठिरः |
१ क
मौसल पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवस्य दाय़ादः साम्वोऽय़ं जनय़िष्यति ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
वासुदेवस्य दुर्वुद्धिः प्रत्याख्यानमरोचय़त् ||
८५ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
वासुदेवस्य माहात्म्यं पाण्डवानां च सत्यताम् |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय
८६
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्य यद्वाक्यं फल्गुनस्य च धीमतः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५४
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्य रामस्य तथा वैश्रवणस्य च |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
वासुदेवस्य वीर्येण विधृतानि महात्मनः ||
१३४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१००
भीष्म उवाच
वासुदेवस्य संवादं पृथिव्याश्चैव भारत ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८२
भीष्म उवाच
वासुदेवस्य संवादं सुरर्षेर्नारदस्य च ||
२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२४
गान्धार्यु उवाच
वासुदेवस्य सांनिध्ये पार्थेनाक्लिष्टकर्मणा |
१८ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
वासुदेवस्यानुमते प्राप्ता चैव किरीटिना ||
९२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१३५
भीष्म उवाच
वासुदेवात्मकान्याहुः क्षेत्रं क्षेत्रज्ञ एव च ||
१३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३४
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवादनवरं फल्गुनाच्चामितौजसम् |
१३ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवादपि त्वां च लोकोऽय़मिति मन्यते ||
४८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवादुपात्तं यद्यदस्त्रं च धनञ्जय़ात् |
१५ क
आदि पर्व
अध्याय
२१२
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवाभ्यनुज्ञातः कथय़ित्वेतिकृत्यताम् |
२ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवार्जुनाभ्यां च न्यूनतां नात्मनीच्छति ||
४ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
४
कृप उवाच
वासुदेवार्जुनाभ्यां हि तानहं परिरक्षितान् |
३० क
कर्ण पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवार्जुनौ कर्ण द्रष्टास्येकरथस्थितौ ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवार्जुनौ देवः स्मय़मानोऽभ्यभाषत ||
६३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२३
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवार्जुनौ यत्र विद्ध्यजेय़ं वलं हि तत् ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
वासुदेवार्जुनौ वीरौ कर्णशल्यौ च भारत ||
६२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४८
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवार्जुनौ वीरौ समवेतौ महारथौ ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१९
वैशम्पाय़न उवाच
वासुदेवार्जुनौ वीरौ सिंहनादं विनेदतुः ||
२१ ख