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उद्योग पर्व
अध्याय १७८
भीष्म उवाच
वासय़ेत गृहे जानन्स्त्रीणां दोषान्महात्ययान् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ३४
भीष्म उवाच
वासय़ेत गृहे राजन्न तस्मात्परमस्ति वै ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७१
भीष्म उवाच
वासय़ेथा गृहे भीष्म कौरवः सन्विशेषतः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनं चास्य तद्दत्तं हंसय़ुक्तं मनोरमम् |
२७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनं पाण्डुपुत्रस्य तत्रासीत्तु विशां पते |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५
व्यास उवाच
वाहनं यस्य योधाश्च द्रव्याणि विविधानि च |
९ क
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनानां च रुदतां प्रपतन्त्यश्रुविन्दवः ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८६
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनानां च विविधाः शालाः शालीक्षुगोरसैः |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
वाहनानि च सर्वाणि शकृन्मूत्रं प्रसुस्रुवुः |
१२ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनानि च सर्वाणि शकृन्मूत्रं प्रसुस्रुवुः ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७१
सञ्जय़ उवाच
वाहनानि च हृष्टानि योधाश्च मनुजेश्वर ||
२१ ख
सभा पर्व
अध्याय ६१
भीम उवाच
वाहनानि धनं चैव कवचान्याय़ुधानि च |
३ क
आदि पर्व
अध्याय १९४
कर्ण उवाच
वाहनानि प्रभूतानि मित्राणि वहुलानि च |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय १०२
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनानि प्रहृष्टानि मुदिता मृगपक्षिणः |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
वाहनानि महाराज वभूवुर्विमनांसि च ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
वाहनानि शकृन्मूत्रे मुमुचू रुरुदुश्च ह |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १३६
वैशम्पाय़न उवाच
वाहनान्यप्रहृष्टानि रुदन्तीव विशां पते |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ७
भीष्म उवाच
वाहनासनय़ानानि योगात्मनि तपोधने |
९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २८४
पराशर उवाच
वाहनासनय़ानानि सर्वं तत्तपसः फलम् ||
२० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १२८
उमो उवाच
वाहनेषु प्रभूतेषु श्रीमत्स्वन्येषु सत्सु ते |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय २८
युय़ुत्सुरु उवाच
वाहनेषु समारोप्य स्त्र्यध्यक्षाः प्राद्रवन्भय़ात् ||
८८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
वाहनैः परिसर्पद्भिर्वाय़ुवेगविकम्पितम् ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८९
धृतराष्ट्र उवाच
वाहनैरपि धावद्भिर्वाय़ुवेगविकम्पितम् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १२३
श्रीकृष्ण उवाच
वाहनैराय़ुधैश्चैव सम्पूर्णां पश्य मेदिनीम् ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७१
भीष्म उवाच
वाहवस्तु दिशो दैत्य श्रोत्रमाकाशमेव च ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय १९२
मार्कण्डेय़ उवाच
वाहवस्ते दिशः सर्वाः कुक्षिश्चापि महार्णवः ||
१२ ग
द्रोण पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
वाहवो विशिखैश्छिन्नाः शिरांस्युन्मथितानि च |
३५ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५४
भीष्म उवाच
वाहसम्पीडिता धुर्याः सीदन्त्यविधिनापरे |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
वाहांश्च चतुरः सङ्ख्ये व्यसूंश्चक्रे महारथः ||
२७ ख
शल्य पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
वाहांश्च हत्वा व्यकरोन्महात्मा; योधक्षय़ं धर्मसुतस्य राज्ञः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १७
अगस्त्य उवाच
वाहान्कृत्वा वाहय़सि तेन स्वर्गाद्धतप्रभः ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
वाहास्तेषां विवृत्ताक्षाः स्तव्धकर्णशिरोधराः |
१० क
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
वाहिता सर्वभूतानां निलय़श्च विभुर्भवः ||
११० ख
उद्योग पर्व
अध्याय १५२
वैशम्पाय़न उवाच
वाहिनी पृतना सेना ध्वजिनी सादिनी चमूः |
२२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
वाहिनीं धार्तराष्ट्राणां क्षोभय़न्तौ गजाविव ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
वाहिनीप्रमुखं वीरः सम्प्रकर्षन्नशोभत ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
वाहीका वाटधानाश्च आभीराः कालतोय़काः ||
४५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १७३
व्यास उवाच
वाहुं सवज्रं शक्रस्य क्रुद्धस्यास्तम्भय़त्प्रभुः |
६० क
उद्योग पर्व
अध्याय ७२
भीमसेन उवाच
वाहुः सुन्दरवेगानां दीप्ताक्षाणां पुरूरवाः ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ५२
सूत उवाच
वाहुकः शृङ्गवेगश्च धूर्तकः पातपातरौ ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ५
नारद उवाच
वाहुकण्टकय़ुद्धेन तस्य कर्णोऽथ युध्यतः |
४ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
वाहुकस्तमुवाचाथ देहि विद्यामिमां मम |
२४ क
वन पर्व
अध्याय ७३
वृहदश्व उवाच
वाहुकस्तु समासाद्य सुतौ सुरसुतोपमौ |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
वाहुकस्त्वव्रवीदेनं परं यत्नं समास्थितः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
वाहुको रथमास्थाय़ रथशालामुपागमत् ||
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६३
सञ्जय़ उवाच
वाहुघोषाश्च वीराणां कर्णार्जुनसमागमे ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ८५
वैशम्पाय़न उवाच
वाहुदा च नदी यत्र नन्दा च गिरिमूर्धनि ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ९३
वैशम्पाय़न उवाच
वाहुदाय़ां महीपाल चक्रुः सर्वेऽभिषेचनम् ||
४ ख
आदि पर्व
अध्याय १५१
वैशम्पाय़न उवाच
वाहुना परिजग्राह दक्षिणेन शिरोधराम् ||
२२ ख
सभा पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
वाहुप्रहरणेनैव भीमेन निहतो युधि ||
३४ ख