द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
वाह्लिका यत्र दृश्यन्ते नानाप्रहरणोद्यताः |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
वाह्लिकाभ्याशतो युक्तं कर्णस्यापि महद्वलम् ||
३१ ख
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लिकाश्चापरे शूरा राजानः सर्व एव ते |
१३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
वाह्लिकास्तित्तिराश्चैव चोलाः पाण्ड्याश्च भारत |
५० क
शल्य पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
वाह्लिके सोमदत्ते च नैवाशाम्यत वैशसम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
वाह्लिकेन महाराज कौरवेण निपातितः ||
७९ ख
सभा पर्व
अध्याय
५२
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लिकेन रथं दत्तमास्थाय़ परवीरहा |
२० क
सभा पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लिको धृतराष्ट्रश्च सोमदत्तो जय़द्रथः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकं तु रणे क्रुद्धं क्रुद्धरूपो विशां पते |
३५ क
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
वाह्लीकं दमनं शैव्यं शर्यातिमजितं जितम् |
१६७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकं रभसं युद्धे याज्ञसेनिर्महावलः |
७ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लीकः सोमदत्तश्च चेकितानश्च पार्थिवः ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय
२३८
दुर्योधन उवाच
वाह्लीकः सोमदत्तश्च ये चान्ये वृद्धसंमताः ||
१४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकदेशं मद्रांश्च कुत्सय़न्वाक्यमव्रवीत् ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३१
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकद्रोणभीष्माणां कर्णस्य च महात्मनः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकराजः संरव्धो द्रौपदेय़ान्महारथान् |
१२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७०
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकराजस्तेजस्वी कुलपुत्रो महारथः |
३७ क
शल्य पर्व
अध्याय
२
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लीकश्च महाराज किमन्यद्भागधेय़तः ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकस्तु ततो राजन्धृष्टकेतुममर्षणम् |
३६ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
१७
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लीकस्य च राजर्षेर्द्रोणस्य च महात्मनः ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
वाह्लीकस्य प्रिय़ो भ्राता शन्तनोश्च महात्मनः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३७
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकस्य रणे राजन्सात्यकिः प्रहसन्निव ||
१८ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
वाह्लीकेन त्वनुज्ञातः शन्तनुर्लोकविश्रुतः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीकेष्वविनीतेषु प्रोच्यमानं निवोधत ||
२८ ख
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
वाह्लीको नाम राजा स वभूव प्रथितः क्षितौ ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४७
वासुदेव उवाच
वाह्लीको मातुलकुले त्यक्त्वा राज्यं व्यवस्थितः |
२७ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
वाह्लीको मुञ्जकेशश्च चैद्याधिपतिरेव च |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
वाह्लीको याज्ञसेनिं तु हेमपुङ्खैः शिलाशितैः |
८ क
सभा पर्व
अध्याय
४९
दुर्योधन उवाच
वाह्लीको रथमाहार्षीज्जाम्वूनदपरिष्कृतम् |
५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१६४
भीष्म उवाच
वाह्लीकोऽतिरथश्चैव समरे चानिवर्तिता |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय
६६
कृष्ण उवाच
वाह्वन्तरादाधिरथेर्विमुक्ता; न्वाणान्महाहीनिव दीप्यमानान् |
४१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१२
सञ्जय़ उवाच
वाह्वोः कराभ्यामुरसो वदनघ्राणनेत्रतः ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२
सञ्जय़ उवाच
वाह्वोर्द्रविणमक्षय़्यमद्य द्रक्ष्यथ संय़ुगे ||
१४ ख
आदि पर्व
अध्याय
१५०
कुन्त्यु उवाच
वाह्वोर्वलं हि भीमस्य नागाय़ुतसमं महत् |
१५ क
सभा पर्व
अध्याय
७१
विदुर उवाच
वाह्वोर्वले नास्ति समो ममेति भरतर्षभ ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
वाहय़न्नेव तुरगान्गरुडानिलरंहसः ||
२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
वाहय़ामास तानश्वान्सत्यसेनरथं प्रति ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
वाहय़ाश्वान्नरव्याघ्र भद्रेणैव जनेश्वर ||
३२ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
वाहय़ाश्वान्हृषीकेश क्षिप्रमित्याह पाण्डवः ||
६ ख
आदि पर्व
अध्याय
११९
वैशम्पाय़न उवाच
वाहय़ित्वा कुमारांस्ताञ्जलक्रीडागतान्विभुः |
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२५
शल्य उवाच
वाहय़िष्यामि तुरगान्विज्वरो भव सूतज ||
११ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
वाय़वः क्रतवश्चैव सङ्कल्पः प्राण एव च ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
वाय़व्यमेवाभिमन्त्र्य प्रतिपत्तिविशारदः ||
१५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
४५
वैशम्पाय़न उवाच
वाय़व्यश्चाथ कौमार्यो व्राह्म्यश्च भरतर्षभ |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१७७
भृगुरु उवाच
वाय़व्यस्तु गुणः स्पर्शः स्पर्शश्च वहुधा स्मृतः ||
३३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४३
व्रह्मो उवाच
वाय़व्यस्तु तथा स्पर्शस्त्वचा प्रज्ञाय़ते च सः |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय
१८
सञ्जय़ उवाच
वाय़व्यास्त्रेण तैरस्तां शरवृष्टिमपाहरत् ||
२२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
वाय़व्यास्त्रेण स क्षिप्रं रुद्ध्वा पाण्ड्यानिलोऽनदत् ||
३१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२५
वैशम्पाय़न उवाच
वाय़व्येनासृजद्वाय़ुं पार्जन्येनासृजद्घनान् ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८३
भीष्म उवाच
वाय़सं तु विनिर्भिन्नं दृष्ट्वा वाणेन पञ्जरे |
१६ क