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अनुशासन पर्व
अध्याय २३
भीष्म उवाच
ददतीह न राजेन्द्र ते लोकान्भुञ्जतेऽशुभान् ||
२३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
वैशम्पाय़न उवाच
ददतो गां हिरण्यं च व्राह्मणैरभिसंवृताः |
५७ क
कर्ण पर्व
अध्याय २९
सञ्जय़ उवाच
ददतो द्विजमुख्याय़ प्रसादं न चकार मे ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
ददतो मेऽक्षय़ा चास्तु धर्मे श्रद्धा च वर्धताम् ||
१०५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९२
राजो उवाच
ददतोऽस्य न गृह्णासि विषमं प्रतिभाति मे |
१०० क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८
भीष्म उवाच
ददत्यन्नानि तृप्त्यर्थं व्राह्मणेभ्यो युधिष्ठिर |
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
ददत्सञ्जीवय़त्येनमात्मानं च युधिष्ठिर ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८५
भीष्म उवाच
ददत्सुवर्णं नृपते किल्विषाद्विप्रमोक्ष्यसि ||
७० ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
दददेतान्महाप्राज्ञः सर्वपापैः प्रमुच्यते ||
५२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ५९
भीष्म उवाच
ददद्वहुविधान्दाय़ानुपच्छन्दानय़ाचताम् ||
९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
ददन्ति वसुधां स्फीतां ये वेदविदुषि द्विजे ||
४३ ख
वन पर्व
अध्याय १२१
वैशम्पाय़न उवाच
ददमानोऽसकृद्वित्तं व्राह्मणेभ्यः सहस्रशः ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श कन्यां तां तत्र दीप्तामग्निशिखामिव ||
१५ ख
आदि पर्व
अध्याय ९६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श कन्यास्ताश्चैव भीष्मः शन्तनुनन्दनः ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
ददर्श कश्यपं तत्र पितरं तपसि स्थितम् ||
५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११८
भीष्म उवाच
ददर्श कीटं धावन्तं शीघ्रं शकटवर्त्मनि ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श कृष्णमासीनं नीलं मेराविवाम्वुदम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श च तदा तत्र कुमारान्देवरूपिणः |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
भीष्म उवाच
ददर्श च मुनिं तस्याः शरीरान्तरगोचरम् |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ६७
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श च स तेजस्वी रक्षोघ्नान्यपि सर्वशः |
६ ख
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श च हतं भूमौ भ्रातरं नकुलं तदा ||
१६ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श चापि कौन्तेय़ो यातनाः पापकर्मिणाम् ||
२५ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८१
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श चाविदूरेऽस्य मातरं शोककर्शिताम् |
१७ क
वन पर्व
अध्याय २६१
मार्कण्डेय़ उवाच
ददर्श चित्रकूटस्थं स रामं सहलक्ष्मणम् |
३७ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७३
भीष्म उवाच
ददर्श चैनं देवानामिन्द्रं देवं शचीपतिम् ||
५१ ख
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
ददर्श तं द्विजः कश्चिद्राजानं प्रस्थितं पुनः |
२० क
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
ददर्श तं पिता चापि दिव्यरूपं विहङ्गमम् |
६ क
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र कौन्तेय़ं धर्मराजमरिन्दमम् |
३८ क
आदि पर्व
अध्याय १३९
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र गत्वा सा पाण्डवान्पृथय़ा सह |
१२ क
सभा पर्व
अध्याय ५२
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र गान्धारीं देवीं पतिमनुव्रताम् |
२७ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय ४
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र गोविन्दं व्राह्मेण वपुषान्वितम् |
२ क
विराट पर्व
अध्याय ५४
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र राधेय़ं तस्य कोपोऽत्यवीवृधत् ||
१६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३४
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्र वेदीश्च सम्प्रज्वलितपावकाः |
७ क
वन पर्व
अध्याय ५२
वृहदश्व उवाच
ददर्श तत्र वैदर्भीं सखीगणसमावृताम् |
११ क
वन पर्व
अध्याय २९६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तत्सरः श्रीमान्विश्वकर्मकृतं यथा ||
४२ ख
वन पर्व
अध्याय १७५
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श तद्वनं रम्यं देवगन्धर्वसेवितम् ||
५ ख
आदि पर्व
अध्याय ८
सूत उवाच
ददर्श तां पिता चैव ते चैवान्ये तपस्विनः |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२५
भीष्म उवाच
ददर्श तानेव नराञ्श्वेतांश्चन्द्रप्रभाञ्शुभान् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
ददर्श त्र्यम्वकाभ्याशे वासुदेवनिवेदितम् ||
६१ ख
वन पर्व
अध्याय ६३
वृहदश्व उवाच
ददर्श दावं दह्यन्तं महान्तं गहने वने ||
१ ख
वन पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श दिव्यकुसुमैराह्वय़द्भिरिव द्रुमैः ||
३ ख
आदि पर्व
अध्याय ५८
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श देवं व्रह्माणं लोककर्तारमव्ययम् ||
३८ ख
वन पर्व
अध्याय ११३
लोमश उवाच
ददर्श देवं सहसा प्रवृष्ट; मापूर्यमाणं च जगज्जलेन ||
१० ख
मौसल पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श द्वारकां वीरो मृतनाथामिव स्त्रिय़म् ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ६३
वृहदश्व उवाच
ददर्श नागराजानं शय़ानं कुण्डलीकृतम् ||
३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५७
उत्तङ्क उवाच
ददर्श नागलोकं च योजनानि सहस्रशः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
ददर्श नारदं यत्र धर्मराजो युधिष्ठिरः |
२१७ क
शल्य पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श नृपतिश्रेष्ठं प्रज्ञाचक्षुषमीश्वरम् ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय ९१
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पथि गच्छन्ती वसून्देवान्दिवौकसः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय २०६
वैशम्पाय़न उवाच
ददर्श पाण्डवस्तत्र पावकं सुसमाहितम् |
१४ क