chevron_left  वधोपाय़मपृच्छन्तarrow_drop_down
कर्ण पर्व
अध्याय २४
दुर्योधन उवाच
वधोपाय़मपृच्छन्त भगवन्तं पितामहम् ||
३२ ख
आदि पर्व
अध्याय १७०
गन्धर्व उवाच
वधोऽभ्युपेक्षितः सर्वैः क्षत्रिय़ाणां विहिंसताम् ||
१५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ७१
भगवानु उवाच
वध्यः सर्प इवानार्यः सर्वलोकस्य दुर्मतिः |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय ८४
देवा ऊचुः
वध्यः स्यामिति जग्राह वरं त्वत्तः पितामह ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५९
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां च तथा तेषां क्षतानां च विशेषतः ||
१३ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां तत्र सैन्यानामन्योन्येन महारणे |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७६
अर्जुन उवाच
वध्यतां मम वार्ष्णेय़ निर्गतोऽसौ सुय़ोधनः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां राजपुत्राणां क्रन्दतामितरेतरम् |
२० क
वन पर्व
अध्याय २१
वासुदेव उवाच
वध्यतां विशिखैस्तीक्ष्णैः पततां च महार्णवे ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां समरे राजन्पार्षतेन महात्मना ||
३१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां समरे राजन्भारद्वाजेन धन्विना ||
२१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
वध्यतां साध्वय़ं पापः सामात्य इति दुर्मतिः ||
३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां साय़कैस्तीक्ष्णैः कर्णचापवरच्युतैः ||
३१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
वध्यतां सूतपुत्रेण मित्रार्थेऽमित्रघातिनाम् ||
४५ ख
वन पर्व
अध्याय २९४
वैशम्पाय़न उवाच
वध्यतामुपय़ास्यामि त्वं च शक्रावहास्यताम् ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
वध्यतामेष दुष्टात्मा मन्दो राजा सुय़ोधनः ||
१२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१६
नारद उवाच
वध्यते मथ्यते चैव कर्मभिर्मन्थवत्सदा ||
५६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
महेश्वर उवाच
वध्यते मानवो येन शृणु चान्यच्छुभानने ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७२
धृतराष्ट्र उवाच
वध्यते यत्र सङ्ग्रामे किमन्यद्भागधेय़तः ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३२
उमो उवाच
वध्यते वन्धनैः पाशैर्मुच्यतेऽप्यथ वा पुनः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
वध्यतो भीमसेनेन कृतिना चित्रय़ोधिना ||
३४ ख
वन पर्व
अध्याय १९४
भगवानु उवाच
वध्यत्वमुपगच्छेतां मम सत्यपराक्रमौ |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
वध्यन्त एते समरे कौरवा निशितैः शरैः |
५३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
वध्यन्ते न ह्यविश्वस्ताः शत्रुभिर्दुर्वला अपि |
१८८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३७
व्रह्मदत्त उवाच
वध्यन्ते युगपत्केचिदेकैकस्य न चापरे |
४७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २९
व्राह्मण उवाच
वध्यन्ते राजशार्दूल तेभ्यो देह्यभय़ं विभो ||
५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
वध्यन्ते समरे वीराः शतशोऽथ सहस्रशः ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६१
भीष्म उवाच
वध्यन्तेऽभिमुखाः शक्र व्रह्मलोकं व्रजन्ति ते ||
८२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ५४
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं ततस्तत्तु शरैः पार्थस्य संय़ुगे |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं तु तत्सैन्यं द्रोणेन निशितैः शरैः |
७० क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं तु तत्सैन्यं पाण्डुपुत्रेण धन्विना |
३४ क
शल्य पर्व
अध्याय १७
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं महाराज पाण्डवैर्जितकाशिभिः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं वलं चापि भीष्मेणामित्रघातिना ||
२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानं वलं दृष्ट्वा युय़ुधानेन मारिष |
३ क
वन पर्व
अध्याय २१३
मार्कण्डेय़ उवाच
वध्यमानं वलं दृष्ट्वा वहुशस्तैः पुरन्दरः |
४ क
वन पर्व
अध्याय १०
सुरभिरु उवाच
वध्यमानः प्रतोदेन तुद्यमानः पुनः पुनः |
१३ क
आदि पर्व
अध्याय २८
सूत उवाच
वध्यमानः सुरगणैः सर्वभूतानि भीषय़न् |
१० ख
स्त्री पर्व
अध्याय ४
विदुर उवाच
वध्यमानश्च तैर्भूय़ो नैव तृप्तिमुपैति सः ||
८ ग
भीष्म पर्व
अध्याय ११३
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानस्ततो राजन्पिता शान्तनवस्तव |
१८ क
भीष्म पर्व
अध्याय १०५
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानस्य सैन्यस्य सर्वैरेतैर्महावलैः |
२१ क
शल्य पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना चमूः सा तु पुत्राणां प्रेक्षतां तव |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना महाराज पाञ्चालाः सृञ्जय़ास्तथा |
६० क
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना महाराज पाण्डवेन यशस्विना |
४३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना महाराज पुत्रास्तव वलीय़सा |
९७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना महाराज भीमसेनेन तावकाः |
१०३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना रणे राजन्पाण्डवाः सृञ्जय़ास्तथा |
२६ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना व्यदृश्यन्त शतशोऽथ सहस्रशः ||
३० ग
द्रोण पर्व
अध्याय १४२
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना शरशतैः शल्येनाहवशोभिना ||
३२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
वध्यमाना हय़ास्ते तु प्राद्रवन्त भय़ार्दिताः |
२३ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४५
सञ्जय़ उवाच
वध्यमानांस्तु तान्दृष्ट्वा सूतपुत्रेण मारिष |
४३ क