अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
अध्यात्मगतचित्तो यस्तन्मनास्तत्पराय़णः |
२३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३८
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यात्मगतितत्त्वज्ञमुपाशिक्षत यः पुरा ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
अध्यात्मगतिनिष्ठानां ध्यानिनामात्मवेदिनाम् |
३२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१६
वासुदेव उवाच
अध्यात्मगतिनिष्ठानां विदुषां प्राप्तिरव्यया ||
५९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३८
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यात्मचिन्तामाश्रित्य शास्त्राण्युक्तानि भारत ||
६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
३५
श्रीभगवानु उवाच
अध्यात्मज्ञाननित्यत्वं तत्त्वज्ञानार्थदर्शनम् |
११ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
४१
व्रह्मो उवाच
अध्यात्मज्ञाननित्यानां मुनीनां भावितात्मनाम् |
४ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३००
याज्ञवल्क्य उवाच
अध्यात्ममधिभूतं च अधिदैवं च श्रूय़ताम् ||
१७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१८७
भीष्म उवाच
अध्यात्ममिति मां पार्थ यदेतदनुपृच्छसि |
२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५०
वासुदेव उवाच
अध्यात्ममेतच्छ्रुत्वा त्वं सम्यगाचर सुव्रत ||
४६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३१७
नारद उवाच
अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
३२
श्रीभगवानु उवाच
अध्यात्मविद्या विद्यानां वादः प्रवदतामहम् ||
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२३
वासुदेव उवाच
अध्यात्मविधितत्त्वज्ञः क्षान्तः शक्तो जितेन्द्रिय़ः |
७ क
आदि पर्व
अध्याय
१९
सूत उवाच
अध्यात्मय़ोगनिद्रां च पद्मनाभस्य सेवतः |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०५
धृतराष्ट्र उवाच
अध्यात्मय़ोगसंस्थाने युक्ताः स्वर्गगतिं गताः ||
५२ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४१
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यात्मय़ोगय़ुक्ताश्च धृतिमन्तश्च मानवाः |
२८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५२
सञ्जय़ उवाच
अध्यानृण्यं गमिष्यामि हत्वा कर्णं महारणे ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
भीष्म उवाच
अध्यापकः परिक्लेशादक्षय़ं फलमश्नुते |
१८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६५
भीष्म उवाच
अध्यापककुले जातः श्रोत्रिय़ो निय़तेन्द्रिय़ः |
२८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१२९
महेश्वर उवाच
अध्यापनमधीतं च षट्कर्मा धर्मभाग्द्विजः ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७४
युधिष्ठिर उवाच
अध्यापने फलं किं च सर्वमिच्छामि वेदितुम् ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यापिताश्च मुनय़ो नाम्ना वर्हिषदो नृप ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०९
भीष्म उवाच
अध्याप्य कृत्स्नं स्वाध्याय़मन्वशाद्वै पिता सुतम् ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यापय़त्पुराव्यग्रः सर्वलोकपतिर्विभुः ||
३४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३३६
वैशम्पाय़न उवाच
अध्यापय़ामास तदा लोकानां हितकाम्यया ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
७२
कच उवाच
अध्यापय़िष्यामि तु यं तस्य विद्या फलिष्यति ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२२६
व्यास उवाच
अध्यापय़ेदधीय़ीत याजय़ेत यजेत च |
११ क
उद्योग पर्व
अध्याय
२९
वासुदेव उवाच
अध्यापय़ेद्याजय़ेच्चापि याज्या; न्प्रतिग्रहान्वा विदितान्प्रतीच्छेत् ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८०
व्यास उवाच
अध्यापय़ेरञ्शिष्यान्वै गोमतीं यज्ञसंमिताम् |
४२ क
आदि पर्व
अध्याय
८४
यय़ातिरु उवाच
अध्यावसं वर्षसहस्रमात्रं; ततो लोकं परमस्म्यभ्युपेतः ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११०
भीष्म उवाच
अध्यावसति दिव्यात्मा विमानवरमास्थितः ||
१०९ ख
वन पर्व
अध्याय
२८३
मार्कण्डेय़ उवाच
अध्यास्स्व चिररात्राय़ पितृपैतामहं पदम् ||
७ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ाः पञ्च सङ्ख्याताः पर्वैतदभिसङ्ख्यया |
२३२ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ाः सङ्ख्यया त्वत्र षडशीतिशतं स्मृतम् |
१५२ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ाः सप्ततिर्ज्ञेय़ास्तथा द्वौ चात्र सङ्ख्यया ||
१०३ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ानां शतं चात्र षट्चत्वारिंशदेव च |
२०५ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ानां शतं प्रोक्तं सप्तदश तथापरे ||
१५८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ानां शतं प्रोक्तमध्याय़ाः सप्ततिस्तथा |
१६७ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ानां शते द्वे तु सङ्ख्याते परमर्षिणा |
९५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
अध्याय़ानां सहस्रेण काव्यः सङ्क्षेपमव्रवीत् |
९१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५९
भीष्म उवाच
अध्याय़ानां सहस्रैस्तु त्रिभिरेव वृहस्पतिः |
९० क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
अध्याय़ाष्टौ समाख्याताः श्लोकानां च शतत्रय़म् ||
२२९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
युधिष्ठिर उवाच
अध्यूढं विद्म वै पुत्रं हित्वा च समय़ं कथम् ||
१४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
४९
भीष्म उवाच
अध्यूढः समय़ं भित्त्वेत्येतदेव निवोध मे ||
१३ ख
सभा पर्व
अध्याय
६१
कश्यप उवाच
अध्यूढाय़ाश्च यद्दुःखं साक्षिभिर्विहतस्य च ||
७४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
अध्येतव्या त्रय़ी विद्या भवितव्यं विपश्चिता |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय
२१४
वैशम्पाय़न उवाच
अध्येतारं परं वेदाः प्रय़ोक्तारं महाध्वराः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४०
श्रीभगवानु उवाच
अध्येष्यते च य इमं धर्म्यं संवादमावय़ोः |
७० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१६५
भीष्म उवाच
अध्यैकदिवसं विप्रा न वोऽस्तीह भय़ं क्वचित् |
२३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२६
अङ्गिरा उवाच
अध्रुवं जीवितं ज्ञात्वा यो वै वेदान्तगो द्विजः ||
५८ ख