शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
शतं गवां सहस्राणि शतमश्वशतानि च |
१०८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
शतं गवामष्ट शतानि चैव; दिने दिने ह्यददं व्राह्मणेभ्यः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१०७
वैशम्पाय़न उवाच
शतं च किल पुत्राणां वितीर्णं मे त्वय़ा पुरा |
१६ क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
शतं च व्रह्मदत्तानामीरिणां वैरिणां शतम् |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
शतं चाप्सरसः कन्या रमय़न्त्यपि तं नरम् ||
५२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६३
सञ्जय़ उवाच
शतं चाश्वसहस्राणां रथानामय़ुतानि षट् |
१३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२५४
भीष्म उवाच
शतं चैकं च रोगाणां सर्वभूतेष्वपातय़न् |
४७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३६
व्यास उवाच
शतं तै यस्तु काम्वोजान्व्राह्मणेभ्यः प्रय़च्छति |
११ क
सभा पर्व
अध्याय
४७
दुर्योधन उवाच
शतं दासीसहस्राणां कार्पासिकनिवासिनाम् |
७ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
शतं दासीसहस्राणि कुन्तीपुत्रस्य धीमतः |
४७ क
वन पर्व
अध्याय
२२२
वैशम्पाय़न उवाच
शतं दासीसहस्राणि कौन्तेय़स्य महात्मनः |
४४ क
सभा पर्व
अध्याय
५४
युधिष्ठिर उवाच
शतं दासीसहस्राणि तरुण्यो मे प्रभद्रिकाः |
१२ क
विराट पर्व
अध्याय
१७
द्रौपद्यु उवाच
शतं दासीसहस्राणि यस्य नित्यं महानसे |
१७ क
आदि पर्व
अध्याय
६१
वैशम्पाय़न उवाच
शतं दुःशासनादीनां सर्वेषां क्रूरकर्मणाम् ||
८२ ख
विराट पर्व
अध्याय
२२
वैशम्पाय़न उवाच
शतं पञ्चाधिकं भीमः प्राहिणोद्यमसादनम् ||
२५ ख
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
शतं मत्स्या नृपतय़ः शतं नीपाः शतं हय़ाः |
२१ क
वन पर्व
अध्याय
२२१
मार्कण्डेय़ उवाच
शतं महिषतुल्यानां दानवानां त्वय़ा रणे |
७४ क
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
शतं मार्गा भविष्यन्ति पावकस्येव कानने |
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
शतं यत्तत्पूर्यते नित्यकालं; हतं हतं दत्तवरं पुरस्तात् ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५१
सञ्जय़ उवाच
शतं युक्ता महाकाय़ा मांसशोणितभोजनाः ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
शतं रथसहस्राणां जघान द्विपदां वरः ||
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
शतं रथसहस्राणां तस्यासन्वशवर्तिनः |
३० क
आदि पर्व
अध्याय
१९०
वैशम्पाय़न उवाच
शतं रथानां वरहेमभूषिणां; चतुर्युजां हेमखलीनमालिनाम् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
शतं राजसहस्राणि शतं राजशतानि च |
९६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
३१
भीष्म उवाच
शतं वभूव प्रख्यातं शूराणामनिवर्तिनाम् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
७८
वसिष्ठ उवाच
शतं वर्षसहस्राणां तपस्तप्तं सुदुश्चरम् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०९
अङ्गिरा उवाच
शतं वर्षसहस्राणां मोदते दिवि स प्रभो |
५३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७
वैशम्पाय़न उवाच
शतं वर्षसहस्राणां शिरसा वै महेश्वरः ||
२८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
शतं वर्षसहस्राणां सर्वलोकेश्वरोऽभवत् |
५६ ख
विराट पर्व
अध्याय
५१
वैशम्पाय़न उवाच
शतं शतसहस्राणां यत्र स्थूणा हिरण्मय़ाः |
६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२९
वैशम्पाय़न उवाच
शतं शतसहस्राणां वृषाणां हेममालिनाम् |
३० क
सभा पर्व
अध्याय
८
नारद उवाच
शतं शतसहस्राणि धर्मिणां तं प्रजेश्वरम् |
३७ क
वन पर्व
अध्याय
८८
धौम्य उवाच
शतं शतसहस्राणि सहस्रशतदक्षिणाः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय
१३
अर्जुन उवाच
शतं शतसहस्राणि सुवर्णस्य जनार्दन |
२२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१०६
भगीरथ उवाच
शतं शतानां गृष्टीनामददं चाप्यतन्द्रितः |
३० क
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
शतं शतास्ते हरय़स्तस्मिन्युक्ता महारथे |
८ क
वन पर्व
अध्याय
५०
वृहदश्व उवाच
शतं सखीनां च तथा पर्युपास्ते शचीमिव ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
२०९
व्राह्मण उवाच
शतं सहस्रं विश्वं च सर्वमक्षय़वाचकम् |
८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
७७
भीष्म उवाच
शतं सहस्रगुर्दद्यात्सर्वे तुल्यफला हि ते ||
१० ख
विराट पर्व
अध्याय
२०
द्रौपद्यु उवाच
शतं सहस्रमपि वा गन्धर्वाणामहं रणे |
२१ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
शतं सहस्राणि चतुर्दशेह; परा गतिर्जीवगुणस्य दैत्य |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय
२७१
भीष्म उवाच
शतं सहस्राणि ततश्चरित्वा; प्राप्नोति वर्णं हरितं तु पश्चात् |
३८ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
६९
भीष्म उवाच
शतं सहस्राणि शतं गवां पुनः; पुनः शतान्यष्ट शताय़ुतानि |
९ क
विराट पर्व
अध्याय
९
विराट उवाच
शतं सहस्राणि समाहितानि; वर्णस्य वर्णस्य विनिश्चिता गुणैः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय
२८१
सावित्र्यु उवाच
शतं सुतानां वलवीर्यशालिना; मिदं चतुर्थं वरय़ामि ते वरम् ||
४४ ख
वन पर्व
अध्याय
२८१
यम उवाच
शतं सुतानां वलवीर्यशालिनां; भविष्यति प्रीतिकरं तवावले |
४५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
शतक्रतुं चाभिवीक्ष्य स्वय़ं मामाह शङ्करः ||
४९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
पृथिव्यु उवाच
शतक्रतुः समभवत्पश्य माधव यादृशम् ||
२६ ख
वन पर्व
अध्याय
२४
वैशम्पाय़न उवाच
शतक्रतुप्रस्थममोघकर्मा; हित्वा प्रय़ातः क्व नु धर्मराजः ||
११ ख
आदि पर्व
अध्याय
२७
सूत उवाच
शतक्रतुमथोवाच प्रीय़माणः प्रजापतिः |
३० क