भीष्म पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त भीष्मस्य रथं हेमपरिष्कृतम् ||
९८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त राजेन्द्र जिघांसन्तः परान्युधि ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त वेगेन कुम्भय़ोनिं युय़ुत्सय़ा ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त वेगेन क्षत्रिय़ाः क्षत्रिय़र्षभम् |
४५ क
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त वेगेन चित्रसेनस्य सैनिकाः ||
१५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त वेगेन प्रतिविन्ध्यं समन्ततः ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त शैनेय़ं शलभाः पावकं यथा ||
१४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त शैनेय़मसङ्ख्येय़ाश्च पत्तय़ः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त संहृष्टा गाङ्गेय़स्य रथं प्रति ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०१
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त संहृष्टा भारद्वाजं युय़ुत्सय़ा ||
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त संय़त्ता धृष्टद्युम्नपुरोगमाः ||
३८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त संय़त्ता भारद्वाजं जिघांसवः ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धा भीमसेनं महावलम् ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धा भीमसेनधनञ्जय़ौ ||
३७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धा भीमसेनादय़ो नृप ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धा विविधाय़ुधपाणय़ः ||
३३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धाः किरन्तः शतशः शरान् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
४४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धाः समरे जितकाशिनः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्क्रुद्धास्तदद्भुतमिवाभवत् ||
४६ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे कौन्तेय़स्य रथं प्रति ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे तव पुत्रान्महारथान् ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे त्यक्त्वा जीवितमात्मनः ||
१० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे त्यक्त्वा प्राणकृतं भय़म् ||
१३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
२५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे भीमसेनं युय़ुत्सवः ||
२९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सङ्ग्रामे योद्धुकामारिमर्दनाः ||
१५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
८३
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त समरे तेऽन्योन्यं वै समन्ततः ||
३१ ग
कर्ण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त समरे भीमं भीमपराक्रमम् ||
१२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त समरे वार्योघा इव सागरम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त समरे सौभद्रप्रमुखान्रथान् ||
३१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
९८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्त सहिता भारद्वाजं युय़ुत्सवः |
३८ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४१
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्परीप्सन्तो व्यूढानीकाः प्रहारिणः |
४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्भीमसेनं नदन्तं भैरवान्रवान् ||
२ ख
विराट पर्व
अध्याय
३२
वैशम्पाय़न उवाच
अभ्यद्रवन्मत्स्यराजं रथव्रातेन सर्वशः ||
४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्महाराज दुर्योधनपुरोगमाः ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१६५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्महावेगास्ततः सैन्यं व्यदीर्यत ||
५८ ख
वन पर्व
अध्याय
१६७
अर्जुन उवाच
अभ्यद्रवन्मां सहिताः प्रगृहीताय़ुधा रणे ||
१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्रणे भीष्मं व्यादितास्यमिवान्तकम् ||
३८ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
अभ्यद्रवन्रथैस्तूर्णं मातुलं वधकाम्यया ||
३३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावंश्च सङ्क्रुद्धाः परस्परजिगीषवः |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
८९
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावज्जिघांसन्तस्तावका युद्धदुर्मदाः ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावज्जिघांसन्वै शल्यं मद्राधिपं वली ||
४४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावञ्जिगीषन्तस्तव पुत्रस्य वाहिनीम् ||
३२ ख
वन पर्व
अध्याय
२६३
मार्कण्डेय़ उवाच
अभ्यधावत काकुत्स्थस्ततस्तं सहलक्ष्मणः ||
१६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत कौन्तेय़ं मिषतां सर्वधन्विनाम् ||
१३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत गाङ्गेय़ं भैरवास्त्रो धनञ्जय़ः |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय
३१
नारद उवाच
अभ्यधावत तं देशं स्वय़मेव महीपतिः ||
३५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
६०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत तान्सर्वान्कालोत्सृष्ट इवान्तकः |
४३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत तेजस्वी गाङ्गेय़ं रणमूर्धनि ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत तेजस्वी भारद्वाजात्मजस्त्वरन् ||
३६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
अभ्यधावत तेजस्वी विशीर्णकवचध्वजान् ||
११९ ग