chevron_left  वार्ष्णेय़ंarrow_drop_down
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़ं सात्यकिं युद्धे पुत्रो दुःशासनस्तव |
१४ क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
वार्ष्णेय़ः पाण्डवेय़ौ च प्रतस्थुर्मागधं पुरम् ||
१२ ख
सभा पर्व
अध्याय १८
वैशम्पाय़न उवाच
वार्ष्णेय़ः पाण्डवेय़ौ च प्रतस्थुर्मागधं प्रति ||
२१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०७
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़ः पार्षतं शूरं विद्ध्वा पञ्चभिराय़सैः |
३९ क
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़भुजवेगेन प्रणुन्ना सा महाहवे |
३३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़मव्रवीत्क्रुद्धो याहि यत्र पितामहः ||
१२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़मव्रवीद्राजन्दृष्ट्वा भीष्मस्य विक्रमम् ||
३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़मव्रवीद्वाक्यं सर्वक्षत्रस्य शृण्वतः ||
२१ ख
वन पर्व
अध्याय ५७
वृहदश्व उवाच
वार्ष्णेय़मानय़ामास पुरुषैराप्तकारिभिः ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय ६९
वृहदश्व उवाच
वार्ष्णेय़श्चिन्तय़ामास वाहुकस्य हय़ज्ञताम् ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़स्तु ततो राजन्स्वां शक्तिं घोरदर्शनाम् |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६८
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़स्य रथाद्भीष्मः पातय़ामास सारथिम् ||
२६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४७
दुर्योधन उवाच
वार्ष्णेय़ान्हारहूणांश्च कृष्णान्हैमवतांस्तथा ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५०
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़ीदय़ितं शूरं मय़ा सततलालितम् |
२५ क
वन पर्व
अध्याय ७१
वृहदश्व उवाच
वार्ष्णेय़ेन भवेन्नूनं विद्या सैवोपशिक्षिता |
३२ क
वन पर्व
अध्याय ७०
वृहदश्व उवाच
वार्ष्णेय़ो यावदेतं मे पटमानय़तामिति ||
४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
वार्ष्णेय़ो विनदन्राजन्भूरिश्रवसमभ्ययात् ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
वार्ष्णेय़ोऽर्थाय़ तेषां वै गृह्णीय़ाच्छस्त्रमुत्तमम् ||
३४ ख
सभा पर्व
अध्याय १३
श्रीकृष्ण उवाच
वार्हद्रथसुते देव्यावुपागच्छद्वृथामतिः ||
२९ ख
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
वार्हद्रथैः पूज्यमानं तथा नगरवासिभिः ||
१४ ख
सभा पर्व
अध्याय १४
कृष्ण उवाच
वार्हद्रथो जरासन्धस्तद्विद्धि भरतर्षभ ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ७५
भीष्म उवाच
वार्हस्पत्यं वाक्यमेतन्निशम्य; ये राजानो गोप्रदानानि कृत्वा |
२४ क
वन पर्व
अध्याय २६९
मार्कण्डेय़ उवाच
वार्हस्पत्यं विधिं कृत्वा प्रत्यव्यूहन्निशाचरम् ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३१
सञ्जय़ उवाच
वार्हस्पत्यः सुविहितो नाय़केन विपश्चिता |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय ५६
भीष्म उवाच
वार्हस्पत्ये च शास्त्रे वै श्लोका विनिय़ताः पुरा |
३८ क
स्त्री पर्व
अध्याय १९
गान्धार्यु उवाच
वारय़त्यनिशं वाला न च शक्नोति माधव ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २४
सञ्जय़ उवाच
वारय़ध्वं यथाय़ोगं पाण्डवानामनीकिनीम् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०२
सञ्जय़ उवाच
वारय़न्तः शरैर्भीमं मेघाः सूर्यमिवोदितम् ||
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
वारय़न्रथिनः सर्वान्साधय़स्व पितामहम् ||
५४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
वारय़स्व नरव्याघ्र महद्धि भय़मागतम् ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९१
सञ्जय़ उवाच
वारय़स्व रणे यत्तो मिषतां सर्वधन्विनाम् |
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४९
सञ्जय़ उवाच
वारय़ाणं शरौघांश्च चर्मणा कृतहस्तवत् ||
३४ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५५
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास तं वीरो वेलेव मकरालय़म् |
४७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास तत्सैन्यं समन्ताद्भरतर्षभ ||
१९ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७५
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़ामास तानस्तांस्तदद्भुतमिवाभवत् ||
१५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास तान्द्रोणो जलौघानचलो यथा |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७३
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़ामास तान्वीरान्सान्त्वपूर्वमरिन्दमः ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १३४
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास तेजस्वी पाण्डवः शत्रुतापनः ||
३९ ख
आदि पर्व
अध्याय १६८
गन्धर्व उवाच
वारय़ामास तेजस्वी हुङ्करेणैव भारत ||
३ ख
वन पर्व
अध्याय २५५
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़ामास निघ्नन्तं भीमं सैन्धवसैनिकान् ||
३६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४८
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास पार्थस्य भीष्मः शान्तनवस्तथा ||
४३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय २२
गान्धार्यु उवाच
वारय़ामास यः सर्वान्पाण्डवान्पुत्रगृद्धिनः |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास राजेन्द्र नचिरादिव भारत ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास सङ्क्रुद्धं वातोद्धूतमिवार्णवम् ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास सङ्क्रुद्धः कृपः शारद्वतो युधि ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास सङ्क्रुद्धो वेलेवोद्वृत्तमर्णवम् ||
२३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
वारय़ामास समरे द्रोणप्रेप्सुं महारथम् ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
वारय़ामास सर्वाणि वादित्राणि समन्ततः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४
सञ्जय़ उवाच
वारय़ित्वा तु सौभद्रं भीमसेनः प्रतापवान् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८६
युधिष्ठिर उवाच
वारय़िष्यति विक्रम्य वेलेव मकरालय़म् ||
४७ ख