कर्ण पर्व
अध्याय
६८
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु कर्णार्जुनय़ोर्विमर्दे; वलानि दृष्ट्वा मृदितानि वाणैः |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु नकुलं वीरः स्वस्रीय़ं प्रिय़मात्मनः |
२९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०९
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु नवभिर्वाणैर्भीमसेनमताडय़त् |
४ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु पीडितस्तेन स्वस्रीय़ेण महात्मना |
१५ क
शल्य पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु शरवर्षाणि विमुञ्चन्सर्वतोदिशम् |
९ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु शरवर्षेण युधिष्ठिरमवाकिरत् |
५५ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु शरवर्षेण वर्षन्निव सहस्रदृक् |
१८ क
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु समरश्लाघी धर्मराजमरिन्दमम् |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्तु समरे जिष्णुं क्रीडन्निव महारथः |
२५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५७
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्य च महाघोरानस्यतः शतशः शरान् |
१० क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
शल्यस्य धृष्टकेतोश्च जय़त्सेनस्य चाभिभोः |
८ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
शल्यस्य निधनं चात्र धर्मराजान्महारथात् |
१७५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४
द्रुपद उवाच
शल्यस्य प्रेष्यतां शीघ्रं ये च तस्यानुगा नृपाः |
११ क
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्य वाणैर्न्यपतन्वभ्रमुर्व्यनदंस्तथा ||
२३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
७
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्य वाहिनीं तूर्णमभिदुद्रुवुराहवे ||
२८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्य समरे चापं मुष्टिदेशे न्यकृन्तत ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७९
सञ्जय़ उवाच
शल्यस्य सशरं चापं मुष्टौ चिच्छेद वीर्यवान् ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
शल्यस्य सोमदत्तस्य भीष्मस्य च महात्मनः |
३३ क
शान्ति पर्व
अध्याय
५
नारद उवाच
शल्यात्तेजोवधाच्चापि वासुदेवनय़ेन च ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३७
सञ्जय़ उवाच
शल्यादवरजः क्रुद्धः किरन्वाणान्समभ्ययात् ||
३ ख
सभा पर्व
अध्याय
४१
शिशुपाल उवाच
शल्यादीनपि कस्मात्त्वं न स्तौषि वसुधाधिपान् |
१३ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
शल्यानां धनुषां चैव ते वै निरय़गामिनः ||
७४ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१६
सञ्जय़ उवाच
शल्यानुजं हतं दृष्ट्वा तावकास्त्यक्तजीविताः |
६६ क
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
शल्यानुद्धृत्य पाणिभ्यां परिमृज्य च तान्हय़ान् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१३१
सञ्जय़ उवाच
शल्यारुणीन्द्रसेनाश्च सञ्जय़ो विजय़ो जय़ः ||
८५ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
शल्ये तु निहते राजन्मद्रराजपदानुगाः |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय
८
सञ्जय़ उवाच
शल्येन सङ्गताः शूरा यदय़ुध्यन्त भागशः ||
४० ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२६
सञ्जय़ उवाच
शल्येऽभ्युपगते कर्णः सारथिं सुमनोऽव्रवीत् |
६ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
२४
भीष्म उवाच
शल्यैर्वा शङ्कुभिर्वापि श्वभ्रैर्वा भरतर्षभ |
७५ क
उद्योग पर्व
अध्याय
८
वैशम्पाय़न उवाच
शल्यो जगाम कौन्तेय़ानाख्यातुं कर्म तस्य तत् ||
१४ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
शल्यो द्वादशभिश्चैव कृपश्च निशितैस्त्रिभिः ||
७ ख
शल्य पर्व
अध्याय
११
सञ्जय़ उवाच
शल्यो न विव्यथे राजन्दन्तिनेवाहतो गिरिः ||
१७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
शल्यो निवारय़ामास वेगमप्रतिमं रणे ||
३६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
शल्यो भूरिश्रवाः क्राथः सोमदत्तो विविंशतिः ||
२४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
शल्यो भूरिश्रवाश्चैव पुरुमित्रो जय़स्तथा |
२७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१७
सञ्जय़ उवाच
शल्यो भूरिश्रवाश्चैव विकर्णश्च महारथः |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
शल्यो राजन्रथोपस्थे निषसाद मुमोह च ||
३३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१५
सञ्जय़ उवाच
शल्यो वा पाण्डवं हत्वा दद्याद्दुर्योधनाय़ गाम् |
५९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
शल्यो ह्यभ्यधिकः कृष्णादर्जुनादधिको ह्यहम् ||
५३ ख
शल्य पर्व
अध्याय
१०
सञ्जय़ उवाच
शल्योऽपि राजन्सङ्क्रुद्धो निघ्नन्सोमकपाण्डवान् |
४१ क
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
शल्योऽर्धदिवसं त्वासीद्गदाय़ुद्धमतः परम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
सञ्जय़ उवाच
शल्योऽव्रवीत्पुनः कर्णं निदर्शनमुदाहरन् ||
१ ख
आदि पर्व
अध्याय
३६
सूत उवाच
शवं स्कन्धेन वहति मा शृङ्गिन्गर्वितो भव ||
२४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
३०५
याज्ञवल्क्य उवाच
शवगन्धमुपाघ्राति सुरभिं प्राप्य यो नरः |
१४ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९५
सञ्जय़ उवाच
शवराणां किरातानां वर्वराणां तथैव च ||
३८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
शवरास्तुम्वुपाश्चैव वत्साश्च सह नाकुलैः |
५१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
२२
सञ्जय़ उवाच
शवलास्तु वृहन्तोऽश्वा दान्ता जाम्वूनदस्रजः |
४८ क
आदि पर्व
अध्याय
३७
सूत उवाच
शवेन भुजगेनासीद्भूय़ः क्रोधसमन्वितः ||
१६ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
६५
वैशम्पाय़न उवाच
शवो वभूव निश्चेष्टो हर्षशोकविवर्धनः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
शव्द आसीत्सुतुमुलस्तेजश्च समजाय़त ||
२७ ख