chevron_left  शव्दव्रह्मणिarrow_drop_down
शान्ति पर्व
अध्याय २६२
कपिल उवाच
शव्दव्रह्मणि निष्णातः परं व्रह्माधिगच्छति ||
१ ग
अनुशासन पर्व
अध्याय ७०
नाचिकेत उवाच
शव्दश्चैकः सन्ततिश्चोपभोग; स्तस्माद्गोदः सूर्य इवाभिभाति ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय ६४
वैशम्पाय़न उवाच
शव्दसंस्कारसंय़ुक्तं व्रुवद्भिश्चापरैर्द्विजैः |
३४ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३०१
याज्ञवल्क्य उवाच
शव्दस्तत्राधिभूतं तु दिशस्तत्राधिदैवतम् ||
७ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७९
सञ्जय़ उवाच
शव्दस्तु देवदत्तस्य धनञ्जय़समीरितः |
१२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४२
व्रह्मो उवाच
शव्दस्पर्शनरूपेषु रसगन्धक्रिय़ासु च ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९८
याज्ञवल्क्य उवाच
शव्दस्पर्शौ च रूपं च रसो गन्धस्तथैव च |
१३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४९
व्रह्मो उवाच
शव्दस्पर्शौ च विज्ञेय़ौ द्विगुणो वाय़ुरुच्यते |
४८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १७७
भृगुरु उवाच
शव्दस्पर्शौ तु विज्ञेय़ौ द्विगुणो वाय़ुरुच्यते |
३३ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४४
व्रह्मो उवाच
शव्दस्यादिस्तथाकाशमेष भूतकृतो गुणः ||
३ ग
वन पर्व
अध्याय २४७
देवदूत उवाच
शव्दाः श्रुतिमनोग्राह्याः सर्वतस्तत्र वै मुने |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय १०३
भीष्म उवाच
शव्दाः स्पर्शास्तथा गन्धा विचरन्ति मनःप्रिय़ाः |
१४ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३५
भीष्म उवाच
शव्दातिगः शव्दसहः शिशिरः शर्वरीकरः ||
११० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४०
श्रीभगवानु उवाच
शव्दादीन्विषय़ांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च ||
५१ ख
भीष्म पर्व
अध्याय २६
श्रीभगवानु उवाच
शव्दादीन्विषय़ानन्य इन्द्रिय़ाग्निषु जुह्वति ||
२६ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ११
शकुनिरु उवाच
शव्दानां प्रवरो मन्त्रो व्राह्मणो द्विपदां वरः ||
११ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १९४
मनुरु उवाच
शव्दाश्च रूपाणि रसाश्च पुण्याः; स्पर्शाश्च गन्धाश्च शुभास्तथैव |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३२२
भीष्म उवाच
शव्दे चार्थे च हेतौ च एषा प्रथमसर्गजा ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
शव्दे सक्तं तथा श्रोत्रं जिह्वां रसगुणेषु च ||
१८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
नारद उवाच
शव्दे स्पर्शे च रूपे च गन्धेषु च रसेषु च |
२६ क
वन पर्व
अध्याय १७८
युधिष्ठिर उवाच
शव्दे स्पर्शे च रूपे च तथैव रसगन्धय़ोः |
१६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६५
भीष्म उवाच
शव्दे स्पर्शे तथा रूपे रसे गन्धे च भारत |
१७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ७३
वाय़ुरु उवाच
शव्दे स्पर्शे रसे रूपे गन्धे च रमते मनः |
२४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
शव्देन तस्य वीरस्य सिंहस्येवेतरे मृगाः ||
१२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ६१
धृतराष्ट्र उवाच
शव्देन नादिताभीक्ष्णमभवद्यत्र मे श्रुतिः |
८ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९७
सञ्जय़ उवाच
शव्देन प्राद्रवन्राजन्गजाश्वरथपत्तय़ः ||
४१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१९
भीष्म उवाच
शव्देनाकाशमखिलं पूरय़न्निव सर्वतः ||
१७ ग
आदि पर्व
अध्याय २१४
वैशम्पाय़न उवाच
शव्देनापूर्यते ह स्म तद्वनं सुसमृद्धिमत् ||
२५ ख
वन पर्व
अध्याय २३
वासुदेव उवाच
शव्दोऽपरो महाराज तत्रापि प्राहरं शरान् ||
७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५९
वसुदेव उवाच
शशंस कुरुवीराणां सङ्ग्रामे निधनं यथा ||
५ ख
वन पर्व
अध्याय १७६
वैशम्पाय़न उवाच
शशंस तस्मै पाञ्चाली चिरय़ातं वृकोदरम् |
४७ क
विराट पर्व
अध्याय ५९
वैशम्पाय़न उवाच
शशंस देवराजाय़ चित्रसेनः प्रतापवान् ||
३४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १६५
सञ्जय़ उवाच
शशंस द्रोणपुत्राय़ यथा द्रोणो निपातितः ||
९७ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
शशंस धर्मराजाय़ सौप्तिके कदनं कृतम् ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३०
वासुदेव उवाच
शशंस मन्मथं तीव्रं व्रीडमानः स धर्मवित् ||
१७ ख
आदि पर्व
अध्याय १७८
वैशम्पाय़न उवाच
शशंस रामाय़ युधिष्ठिरं च; भीमं च जिष्णुं च यमौ च वीरौ |
१० क
वन पर्व
अध्याय २६२
मार्कण्डेय़ उवाच
शशंस रावणस्तस्मै तत्सर्वं रामचेष्टितम् |
५ क
आदि पर्व
अध्याय १००
वैशम्पाय़न उवाच
शशंस स पुनर्मात्रे तस्य वालस्य पाण्डुताम् ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
शशंसागमने हेतुमिदं चैवाव्रवीद्वचः ||
१४ ख
वन पर्व
अध्याय १७४
वैशम्पाय़न उवाच
शशंसिरे विस्तरशः प्रवासं; शिवं यथावद्वृषपर्वणस्ते ||
७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३२०
भीष्म उवाच
शशंसुरृषय़स्तस्मै कर्म पुत्रस्य तत्तदा ||
२१ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ८६
भीष्म उवाच
शशंसुर्विप्रकारं तं तस्मै तारककारितम् ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय २७
सञ्जय़ उवाच
शशकाह्वय़से युद्धे कर्ण पार्थं धनञ्जय़म् ||
३७ ख
वन पर्व
अध्याय ८०
पुलस्त्य उवाच
शशरूपप्रतिच्छन्नाः पुष्करा यत्र भारत ||
१२० ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
शशलोमा च नामासीद्राजा परमधार्मिकः |
१४ क
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
शशलोहितवर्णाभाः क्वचिद्गैरिकधातवः ||
८१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
शशलोहितवर्णास्तु पाण्डुरोद्गतराजय़ः |
४३ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
शशविन्दुं चैत्ररथं मृतं शुश्रुम सृञ्जय़ |
९८ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
शशविन्दुर्महाराज व्राह्मणेभ्यः समादिशत् ||
१०२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २०१
भीष्म उवाच
शशविन्दोश्च भार्याणां सहस्राणि दशाच्युत |
११ क