द्रोण पर्व
अध्याय
१४२
सञ्जय़ उवाच
विराटं सहसेनं तु द्रोणार्थे द्रुतमागतम् |
२० क
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
विराटं सैन्धवो राजा विद्ध्वा संनतपर्वभिः |
४० क
विराट पर्व
अध्याय
१२
वैशम्पाय़न उवाच
विराटः परमं हर्षमगच्छद्वान्धवैः सह ||
२४ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
विराटः प्रादिशद्यानि तेषामक्लिष्टकर्मणाम् |
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
विराटः सह पुत्राभ्यां शङ्खेनैवोत्तरेण च |
६ क
आदि पर्व
अध्याय
१७७
धृष्टद्युम्न उवाच
विराटः सह पुत्राभ्यां शङ्खेनैवोत्तरेण च |
८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
विराटः सह पुत्रेण धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
३० क
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
विराटः सह पुत्रैश्च माचेल्लश्च महारथः |
१३ ख
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
विराटदुहिता कृष्ण पाणिना परिमार्जति ||
५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
विराटदुहितुः कृष्ण यां त्वं रक्षितुमिच्छसि ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१५०
जनमेजय़ उवाच
विराटद्रुपदाभ्यां च सपुत्राभ्यां समन्वितम् |
२ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५०
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ चैव कृतवैरौ मय़ा सह |
१२ क
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
१
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ चैव धृष्टकेतुमुखांश्च तान् ||
२५ ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ चोभौ धृष्टकेतुश्च पार्थिवः |
१३ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१९५
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ चोभौ भीष्मद्रोणसमौ युधि |
१९ क
भीष्म पर्व
अध्याय
११४
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ चोभौ राक्षसश्च घटोत्कचः ||
२० ख
स्वर्गारोहण पर्व
अध्याय
५
जनमेजय़ उवाच
विराटद्रुपदौ चोभौ शङ्खश्चैवोत्तरस्तथा ||
१ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
४०
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ चोभौ सपुत्रौ सहसैनिकौ |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
१५४
वैशम्पाय़न उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धावभिवाद्य हलाय़ुधः |
२२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ कुन्तिभोजश्च दंशितः |
५ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः ||
२८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ भीष्मं प्रति समुद्यतौ ||
२५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४९
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ योधय़ामास सङ्गतौ |
३९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ वारय़न्तौ महाचमूम् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ वृद्धौ समेतावरिमर्दनौ |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१२८
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ षड्भिः शतेन च शिखण्डिनम् ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
विराटद्रुपदौ षड्भिः शतेन च शिखण्डिनम् ||
२९ ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
विराटनगरं गत्वा श्मशाने विपुलां शमीम् |
१३० ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
विराटनगरं प्राप्य जय़मावेदय़ंस्तदा ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय
२९८
वैशम्पाय़न उवाच
विराटनगरे गूढा अविज्ञाताश्चरिष्यथ ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३३
सञ्जय़ उवाच
विराटनगरे चापि समेताः सर्वकौरवाः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१०७
सञ्जय़ उवाच
विराटनगरे चैव प्राप्तं दुःखमरिन्दमः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
विराटनगरे चैव योन्यन्तरगतैरिव |
३० ख
विराट पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
विराटनगरे तात संवत्सरमिमं वय़म् |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१०२
सञ्जय़ उवाच
विराटनगरे पार्थ सञ्जय़स्य समीपतः ||
३२ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
२८
काक उवाच
विराटनगरे पार्थमेकं किं नावधीस्तदा ||
५६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१३६
वैशम्पाय़न उवाच
विराटनगरे पूर्वं सर्वे स्म युधि निर्जिताः ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
१
अर्जुन उवाच
विराटनृपतेः साधो रंस्यसे केन कर्मणा ||
१६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
धृतराष्ट्र उवाच
विराटपुत्रो वभ्रूश्च पाञ्चालाश्च प्रभद्रकाः ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
विराटप्रभृतीनां च सुहृदामुपकारिणाम् |
४ क
विराट पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
विराटमनुसम्प्राप्य राजानं पुरुषर्षभम् ||
१९ ख
सभा पर्व
अध्याय
४२
वैशम्पाय़न उवाच
विराटमन्वय़ात्तूर्णं धृष्टद्युम्नः प्रतापवान् |
४१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१९
सञ्जय़ उवाच
विराटमन्वय़ात्पश्चात्पाण्डवार्थे पराक्रमी ||
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
३०
वैशम्पाय़न उवाच
विराटमन्वय़ुः पश्चात्सहिताः कुरुपुङ्गवाः |
२५ ख
विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
विराटमभिनन्दन्तमथ मे भवति ज्वरः ||
२७ ख
विराट पर्व
अध्याय
१४
वैशम्पाय़न उवाच
विराटमहिषी देवी कृपां चक्रे मनस्विनी ||
३ ख
विराट पर्व
अध्याय
६३
वैशम्पाय़न उवाच
विराटमिह सामात्यं हन्यात्सवलवाहनम् ||
५४ ख
विराट पर्व
अध्याय
१८
द्रौपद्यु उवाच
विराटमुपतिष्ठन्तं दर्शय़न्तं च वाजिनः ||
३३ ख
आदि पर्व
अध्याय
१
सूत उवाच
विराटराष्ट्रे वसता महात्मना; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
११४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
विराटश्च महाराज तावुभौ समरे स्थितौ |
५ क