chevron_left  शिखण्डिनंarrow_drop_down
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं च समरे पाञ्चाल्यममितौजसम् ||
७७ ग
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं ततो हत्वा क्रोधाविष्टः परन्तपः |
६१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं तथा ज्ञात्वा हार्दिक्यशरपीडितम् |
४४ क
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं तु गाङ्गेय़ः क्रोधदीप्तेन चक्षुषा |
७९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं तु समरे द्रोणप्रेप्सुं विशां पते |
१५ क
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं तु समरे भीष्ममृत्युं दुरासदम् |
६१ क
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं त्रिभिर्वाणैर्भ्रुवोर्मध्ये व्यताडय़त् ||
१७ ख
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं द्रौपदेय़ान्पाञ्चालानां च ये गणाः ||
३३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं द्वादशभिः पराभिन; च्छितैः शरैः षड्भिरथोत्तमौजसम् |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं द्वादशभिर्विंशत्या चोत्तमौजसम् |
२७ क
द्रोण पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं द्वादशभिर्विंशत्या चोत्तमौजसम् |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ९५
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं नरव्याघ्र भीष्मस्य प्रमुखेऽनघ |
२५ क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
शिखण्डिनं पुरतः स्थापय़ित्वा; तदा नाशंसे विजय़ाय़ सञ्जय़ ||
१२६ ख
शल्य पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य घातितस्ते पितामहः ||
३० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११२
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य ततो युद्धमवर्तत ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य धनुश्चास्य समाच्छिनत् ||
१३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य धनुश्चास्य समाच्छिनत् ||
४६ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य निर्याताः पाण्डवा युधि ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य पाण्डवं च धनञ्जय़म् |
२२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ६
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य फल्गुनेन महाहवे ||
२३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ११४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य भीष्मं विव्याध संय़ुगे ||
५३ ख
आदि पर्व
अध्याय २
सूत उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य यत्र पार्थो महाधनुः |
१५७ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
अश्वत्थामो उवाच
शिखण्डिनं पुरस्कृत्य हतो गाण्डीवधन्वना ||
१९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
शिखण्डिनं पुरुषं कौरवेन्द्र; दशार्णराजाय़ महानुभावम् ||
२६ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
शिखण्डिनं महाराज पुत्रं स्त्रीपूर्विणं तथा ||
५६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं यमौ चैव चेकितानं च केकय़ान् |
४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं याज्ञसेनिं रुन्धानमपराजितम् |
४४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनं याज्ञसेनिमम्लानमनसं युधि ||
४१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं रणे क्रुद्धो विव्याध दशभिः शरैः ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय १८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं वाणवरैः स्कन्धदेशेऽभ्यताडय़त् ||
६८ ग
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं षड्भिरविध्यदुग्रो; दान्तो धार्ष्टद्युम्नशिरश्चकर्त |
९ क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं समासाद्य द्विधा चिच्छेद सोऽसिना ||
६० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६५
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं समासाद्य भरतानां पितामहः |
२८ क
शल्य पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनं समासाद्य मृगेन्द्र इव जम्वुकम् ||
३० ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनं सात्यकिं च धृष्टद्युम्नं च पार्षतम् ||
१९ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनः कार्मुकं स ध्वजं च; च्छित्त्वा शराभ्यामहनत्सुजातम् ||
८ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ४४
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनमथाविध्यन्नवभिर्निशितैः शरैः ||
२२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १४०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनमथाय़ान्तं रथेन रथिनां वरम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय ६१
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनमथो राजन्स्त्रीपुंसं विद्धि राक्षसम् ||
८७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०६
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनमथोवाच समभ्येहि पितामहम् ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १४९
भीम उवाच
शिखण्डिनमृते वीरं स मे सेनापतिर्मतः ||
३२ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनस्ततः क्रुद्धः क्षुरप्रेण महारथः |
२८ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३८
सञ्जय़ उवाच
शिखण्डिनस्ततो वाणान्कृपः शारद्वतो युधि |
१७ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ८२
अर्जुन उवाच
शिखण्डिना तु संसक्तस्तमाश्रित्य हतस्त्वय़ा ||
९ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिना वः कुरवः कृतास्त्रेणाभ्ययुञ्जत ||
३३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १९१
भीष्म उवाच
शिखण्डिनि च मा भैस्त्वं विधास्ये तत्र तत्त्वतः ||
१८ ग
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
शिखण्डिनी तदा कन्या व्रीडितेव मनस्विनी ||
१७ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनीभिः सहिताँल्लतामण्डपकेषु च |
५३ ख
वन पर्व
अध्याय १५५
वैशम्पाय़न उवाच
शिखण्डिनीभिश्चरतां सहितानां शिखण्डिनाम् |
७२ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९३
भीष्म उवाच
शिखण्डिने च मुदितः प्रादाद्वित्तं जनेश्वरः |
२८ क