chevron_left  तंarrow_drop_down
विराट पर्व
अध्याय ६३
वैशम्पाय़न उवाच
तं तथा वादिनं दृष्ट्वा पाण्डवः प्रत्यभाषत |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १००
सञ्जय़ उवाच
तं तथा वादिनं राजंस्तव पुत्रं महारथम् |
३७ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
तं तथा विरथं दृष्ट्वा रथमारोप्य स्वं तदा |
७७ क
शल्य पर्व
अध्याय ४०
वैशम्पाय़न उवाच
तं तथा विलपन्तं तु शोकोपहतचेतसम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
तं तथा व्यथितं दृष्ट्वा कृष्णो वचनमव्रवीत् |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
तं तथा शरवर्षेण क्षोभय़न्तमरिन्दमम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय ११२
भीष्म उवाच
तं तथा सत्कृतं दृष्ट्वा युज्यमानं च कर्मणि |
४० क
कर्ण पर्व
अध्याय ५६
सञ्जय़ उवाच
तं तथा समरे कर्म कुर्वाणमतिमानुषम् |
१४ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३२
सञ्जय़ उवाच
तं तथा समरे कर्म कुर्वाणमतिमानुषम् |
३५ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
तं तथा समरे द्रोणं निघ्नन्तं सोमकान्रणे |
३४ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
तं तथा समरे राजन्विचरन्तमभीतवत् |
३१ क
कर्ण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
तं तथा हीय़मानं च हंसो दृष्ट्वाव्रवीदिदम् |
४४ क
वन पर्व
अध्याय १६२
वैशम्पाय़न उवाच
तं तथादीनमनसं राजानं हर्षसम्प्लुतम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६०
सञ्जय़ उवाच
तं तथाभिप्रशंसन्तमर्जुनं कुपितस्तदा |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय १२०
सञ्जय़ उवाच
तं तथावस्थितं दृष्ट्वा त्वदीय़ा वीर्यसंमताः |
३९ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
तं तथावादिनं तत्र राजानं माधवोऽव्रवीत् |
३० क
आदि पर्व
अध्याय १
सूत उवाच
तं तथावादिनं दीनं विलपन्तं महीपतिम् |
१६२ क
द्रोण पर्व
अध्याय १६४
सञ्जय़ उवाच
तं तथावादिनं राजन्सात्यकिः प्रत्यभाषत |
२६ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
तं तथेत्यव्रवीत्पार्थः कृत्यरूपमिदं मम |
१९ क
आदि पर्व
अध्याय २११
वैशम्पाय़न उवाच
तं तथैकाग्रमनसं कृष्णः पार्थमलक्षय़त् ||
१५ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ५
सञ्जय़ उवाच
तं तथैव हनिष्यामि न्यस्तवर्माणमद्य वै |
३३ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४०
सञ्जय़ उवाच
तं तदा नानुपश्याम सैन्येन रजसावृतम् |
२२ क
द्रोण पर्व
अध्याय ४३
सञ्जय़ उवाच
तं तदा नाशकत्कश्चिच्चक्षुर्भ्यामभिवीक्षितुम् |
२१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ३९
सञ्जय़ उवाच
तं तदा नाशकत्कश्चिद्द्रोणाद्वारय़ितुं रणे |
२५ क
उद्योग पर्व
अध्याय ७०
युधिष्ठिर उवाच
तं तदा मन्युरेवैति स भूय़ः सम्प्रमुह्यति |
३२ क
आदि पर्व
अध्याय १६६
गन्धर्व उवाच
तं तदा सुसमिद्धोऽपि न ददाह हुताशनः |
४३ क
भीष्म पर्व
अध्याय ३०
श्रीभगवानु उवाच
तं तमेवैति कौन्तेय़ सदा तद्भावभावितः ||
६ ख
वन पर्व
अध्याय २७१
मार्कण्डेय़ उवाच
तं तारमुच्चैः क्रोशन्तमन्यांश्च हरिय़ूथपान् |
६ क
द्रोण पर्व
अध्याय २८
सञ्जय़ उवाच
तं तु कालमनुप्राप्तं विदित्वा पृथिवी तदा |
२७ क
आदि पर्व
अध्याय ११४
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु कालेन महता वासवः प्रत्यभाषत |
२२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२५
व्यास उवाच
तं तु कालेन महता सङ्कल्पः कुरुते वशे |
१२ क
वन पर्व
अध्याय २९३
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु कुण्डलिनं दृष्ट्वा वर्मणा च समन्वितम् |
२० क
कर्ण पर्व
अध्याय १९
सञ्जय़ उवाच
तं तु कृच्छ्रगतं दृष्ट्वा कर्णद्रौणिकृपादय़ः |
४३ क
वन पर्व
अध्याय ११५
भृगुरु उवाच
तं तु कृत्स्नो धनुर्वेदः प्रत्यभाद्भरतर्षभ |
३० क
शल्य पर्व
अध्याय ४१
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु क्रुद्धमभिप्रेक्ष्य व्रह्महत्याभय़ान्नदी |
३४ क
स्त्री पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु गृह्यैव पाणिभ्यां भीमसेनमय़स्मय़म् |
१७ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८२
सञ्जय़ उवाच
तं तु छित्त्वा रणे भीष्मो नाराचं कालसंमितम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय १०३
सञ्जय़ उवाच
तं तु तस्य महानादं पार्थः शुश्राव नर्दतः ||
२६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २८
भीष्म उवाच
तं तु तीव्रव्रणं दृष्ट्वा गर्दभी पुत्रगृद्धिनी |
१० क
सौप्तिक पर्व
अध्याय ८
सञ्जय़ उवाच
तं तु तेनाभ्युपाय़ेन गमय़ित्वा यमक्षय़म् |
२४ क
आदि पर्व
अध्याय १९२
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु दुःशासनो व्रीडन्मन्दं मन्दमिवाव्रवीत् ||
१० ख
भीष्म पर्व
अध्याय ६०
सञ्जय़ उवाच
तं तु दुर्योधनः षष्ट्या विद्ध्वा भीमं महावलम् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १०२
लोमश उवाच
तं तु दृष्ट्वा तथा विन्ध्यः शैलः सूर्यमथाव्रवीत् |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय १४१
सञ्जय़ उवाच
तं तु दृष्ट्वा तथावस्थमश्वत्थामानमाहवे |
३२ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ६
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु दृष्ट्वा तथासीनं निश्चेष्टं कुरुपार्थिवम् |
२२ क
वन पर्व
अध्याय ७४
वृहदश्व उवाच
तं तु दृष्ट्वा तथाय़ुक्तं दमय़न्ती नलं तदा |
७ क
उद्योग पर्व
अध्याय १९२
भीष्म उवाच
तं तु दृष्ट्वा तदा राजन्देवी देवपरं तथा |
१० क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७७
वैशम्पाय़न उवाच
तं तु दृष्ट्वा निपतितं ततस्तस्यात्मजं विभो |
३० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५२
सञ्जय़ उवाच
तं तु दृष्ट्वा महाघोरं वर्तमानं महाहवे |
३२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ८३
सञ्जय़ उवाच
तं तु दृष्ट्वा महाव्यूहं तावकानां महारथः |
१५ क