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शान्ति पर्व
अध्याय २३९
व्यास उवाच
शृणु तत्त्वमिहैकाग्रो यथातत्त्वं यथा च तत् ||
८ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ६७
यम उवाच
शृणु तत्त्वेन विप्रर्षे प्रदानविधिमुत्तमम् |
१५ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
शृणु तत्पृथिवीपाल मा च शोके मनः कृथाः |
६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३
व्यास उवाच
शृणु तत्र यथा पापमपकृष्येत भारत ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ४२
सञ्जय़ उवाच
शृणु तत्सर्वमाख्यास्ये यथा पाण्डूनय़ोधय़त् ||
१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०
धृतराष्ट्र उवाच
शृणु दिव्यानि कर्माणि वासुदेवस्य सञ्जय़ |
१ क
द्रोण पर्व
अध्याय ८५
सञ्जय़ उवाच
शृणु दुन्दुभिनिर्घोषं शङ्खशव्दांश्च पुष्कलान् |
७६ क
उद्योग पर्व
अध्याय १७०
भीष्म उवाच
शृणु दुर्योधन कथां सहैभिर्वसुधाधिपैः |
३ क
शल्य पर्व
अध्याय ४९
सिद्धा ऊचुः
शृणु देवल भूतार्थं शंसतां नो दृढव्रत |
४६ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १६
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु धर्मभृतां श्रेष्ठ गदतः सर्वमेव मे ||
१३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १७
उपमन्युरु उवाच
शृणु नामसमुद्देशं यदुक्तं पद्मय़ोनिना ||
१२ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४४
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु नामानि चान्येषां येऽन्ये स्कन्दस्य सैनिकाः |
५१ क
उद्योग पर्व
अध्याय ८
शल्य उवाच
शृणु पाण्डव भद्रं ते यद्व्रवीषि दुरात्मनः |
२८ क
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
शृणु पार्थ यथावृत्तमितिहासं पुरातनम् |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३९
व्रह्मो उवाच
शृणु पुत्र यथा ह्येष पुरुषः शाश्वतोऽव्ययः |
१ क
वन पर्व
अध्याय ११०
लोमश उवाच
शृणु पुत्रो यथा जात ऋश्यशृङ्गः प्रतापवान् |
१२ क
वन पर्व
अध्याय १२
विदुर उवाच
शृणु भीमस्य कर्मेदमतिमानुषकर्मणः |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ७
विदुर उवाच
शृणु भूय़ः प्रवक्ष्यामि मार्गस्यैतस्य विस्तरम् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
शृणु भूय़ो यथातत्त्वं यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
२३ क
शल्य पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मङ्कणकस्यापि कौमारव्रह्मचारिणः |
२९ क
शान्ति पर्व
अध्याय २५
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मच्च यथा कुर्वन्धर्मान्न च्यवते नृपः ||
९ ख
शल्य पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मातृगणान्राजन्कुमारानुचरानिमान् |
१ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३८
वाय़ुरु उवाच
शृणु मूढ गुणान्कांश्चिद्व्राह्मणानां महात्मनाम् |
१ क
शल्य पर्व
अध्याय ६२
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मूढ वचो मह्यं यतो धर्मस्ततो जय़ः ||
५८ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २५
व्राह्मण उवाच
शृणु मे गदतो भद्रे रहस्यमिदमुत्तमम् ||
२ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १०
सञ्जय़ उवाच
शृणु मे गदतो राजन्यन्मां त्वं परिपृच्छसि ||
९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १२
सञ्जय़ उवाच
शृणु मे त्वं यथान्याय़ं व्रुवतः कुरुनन्दन ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
शृणु मे त्वमिदं शुद्धं साङ्ख्यानां विदितात्मनाम् |
३ क
शान्ति पर्व
अध्याय १३६
भीष्म उवाच
शृणु मे पुत्र कार्त्स्न्येन गुह्यमापत्सु भारत ||
१२ ख
वन पर्व
अध्याय ५१
वृहदश्व उवाच
शृणु मे भगवन्येन न दृश्यन्ते महीक्षितः ||
१८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय १११
सञ्जय़ उवाच
शृणु मे वचनं तात धर्म्यं स्वर्ग्यं च जल्पतः ||
१३ ख
आदि पर्व
अध्याय २७
सूत उवाच
शृणु मे वदतः सर्वमेतत्सङ्क्षेपतो द्विज ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय ४५
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मे वदतो व्रह्मन्योऽय़ं यच्चास्य कारणम् ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ५२
वासुदेव उवाच
शृणु मे विस्तरेणेदं यद्वक्ष्ये भृगुनन्दन |
२३ क
भीष्म पर्व
अध्याय १६
सञ्जय़ उवाच
शृणु मे विस्तरेणेदं विचित्रं परमाद्भुतम् |
१० क
आदि पर्व
अध्याय २०१
नारद उवाच
शृणु मे विस्तरेणेममितिहासं पुरातनम् |
१ क
सभा पर्व
अध्याय ४६
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु मे विस्तरेणेमां कथां भरतसत्तम |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
शृणु मे व्राह्मणेष्वेव मुख्यं कर्म जनाधिप ||
१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४२
सनत्सुजात उवाच
शृणु मे व्रुवतो राजन्यथैतन्मा विशङ्किथाः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ७०
भीष्म उवाच
शृणु मे शंसतो राजन्यथावदिह भारत ||
२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४१
भीष्म उवाच
शृणु मे हैहय़श्रेष्ठ कर्मात्रेः सुमहात्मनः ||
१ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २८५
पराशर उवाच
शृणु मेऽत्र महाराज यन्मां त्वं परिपृच्छसि |
३६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६५
भीष्म उवाच
शृणु मोक्षं सनिर्वेदं पापं धर्मं च मूलतः ||
२ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १०
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु यत्कृतमस्माभिरश्वत्थामपुरोगमैः ||
१० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २१२
भीष्म उवाच
शृणु यत्तव मोक्षाय़ भाष्यमाणं भविष्यति ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ९०
सञ्जय़ उवाच
शृणु युद्धं यथा वृत्तं घोरं देवासुरोपमम् ||
५ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ७३
सञ्जय़ उवाच
शृणु युद्धं यथावृत्तं शंसतो मम मारिष ||
४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय ४९
वैशम्पाय़न उवाच
शृणु यैर्हि महाराज पाण्डवा अभ्ययुञ्जत ||
१४ ग
सभा पर्व
अध्याय १६
कृष्ण उवाच
शृणु राजञ्जरासन्धो यद्वीर्यो यत्पराक्रमः |
११ क
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
शृणु राजञ्ज्वरस्येह सम्भवं लोकविश्रुतम् |
४ क