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शल्य पर्व
अध्याय ४३
वैशम्पाय़न उवाच
शैलपुत्र्या सहासीनं भूतसङ्घशतैर्वृतम् ||
२३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १६४
भीष्म उवाच
शैलप्राकारवप्रं च शैलय़न्त्रार्गलं तथा ||
१९ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ९८
सञ्जय़ उवाच
शैलमन्यन्महाराज घोरमस्त्रं मुमोच ह ||
२० ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७४
भीष्म उवाच
शैलराजसुता चास्य नित्यं पार्श्वे स्थिता वभौ |
७ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१०
भीष्म उवाच
शैलराजसुता चैव देवी तत्राभवत्पुरा |
१२ क
अनुशासन पर्व
अध्याय १३४
भीष्म उवाच
शैलराजसुतां देवीं पुण्या पापापहां शिवाम् ||
२३ ख
वन पर्व
अध्याय १६०
वैशम्पाय़न उवाच
शैलराजो महाराज मन्दरोऽभिविराजते ||
४ ख
वन पर्व
अध्याय १०२
देवा ऊचुः
शैलराजो वृणोत्येष विन्ध्यः क्रोधवशानुगः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १२०
भीष्म उवाच
शैलवर्षोदकानीव द्विजान्सिद्धान्समाश्रय़ेत् ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय २६
सूत उवाच
शैलशृङ्गप्रतीकाशं व्रह्मदण्डमिवोद्यतम् |
७ क
आदि पर्व
अध्याय १४३
वैशम्पाय़न उवाच
शैलशृङ्गेषु रम्येषु देवताय़तनेषु च |
२० क
सभा पर्व
अध्याय १९
वैशम्पाय़न उवाच
शैलस्तम्भनिभास्तेषां चन्दनागुरुभूषिताः |
२६ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
शैलस्तम्भोपमं शौरिरुवाचाभिविनोदय़न् ||
६ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय २०
भीष्म उवाच
शैलांश्च विविधाकारान्काञ्चनान्रत्नभूषितान् |
३२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय ३१५
भीष्म उवाच
शैलादस्मान्महीं गन्तुं काङ्क्षितं नो महामुने |
४ क
उद्योग पर्व
अध्याय ९८
नारद उवाच
शैलानीव च दृश्यन्ते तारकाणीव चाप्युत ||
११ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९१
भीष्म उवाच
शैलाभः परमक्रोधी धीरोष्णी भूपतिस्तथा ||
३६ ख
सभा पर्व
अध्याय ४८
दुर्योधन उवाच
शैलाभान्नित्यमत्तांश्च अभितः काम्यकं सरः ||
१९ ख
वन पर्व
अध्याय १७२
वैशम्पाय़न उवाच
शैलाश्चापि व्यशीर्यन्त न ववौ च समीरणः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १७५
भीष्म उवाच
शैलास्तस्यास्थिसञ्ज्ञास्तु मेदो मांसं च मेदिनी |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १६३
अर्जुन उवाच
शैलास्त्रमश्मवर्षं च समास्थाय़ाहमभ्ययाम् |
३२ ख
वन पर्व
अध्याय १६८
अर्जुन उवाच
शैलेन च महास्त्रेण वाय़ोर्वेगमधारय़म् ||
१० ख
वन पर्व
अध्याय १७३
वैशम्पाय़न उवाच
शैलेन्द्र भूय़स्तपसे धृतात्मा; द्रष्टा तवास्मीति मतिं चकार ||
१९ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ११
भीष्म उवाच
शैलेषु गोष्ठेषु तथा वनेषु; सरःसु फुल्लोत्पलपङ्कजेषु |
१५ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय १५
वैशम्पाय़न उवाच
शैलेषु रमणीय़ेषु पल्वलेषु नदीषु च |
४ क
वन पर्व
अध्याय १४१
भीम उवाच
शैलेऽस्मिन्राक्षसाकीर्णे दुर्गेषु विषमेषु च ||
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय २०
सञ्जय़ उवाच
शैलोपमं स्थितं राजन्कीर्यमाणं शरैर्युधि ||
३ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १३०
महेश्वर उवाच
शैवालं शीर्णपर्णं वा तद्व्रतो यो निषेवते |
४१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २९२
वसिष्ठ उवाच
शैवालभोजनश्चैव तथाचामेन वर्तय़न् |
१८ क
द्रोण पर्व
अध्याय २२
सञ्जय़ उवाच
शैव्यं चित्ररथं युद्धे चित्रमाल्यावहन्हय़ाः ||
५१ ख
वन पर्व
अध्याय २८२
मार्कण्डेय़ उवाच
शैव्या च सत्यवांश्चैव सावित्री चैकतः स्थिताः |
२६ क
वन पर्व
अध्याय २८३
मार्कण्डेय़ उवाच
शैव्या च सह सावित्र्या स्वास्तीर्णेन सुवर्चसा |
१० क
वन पर्व
अध्याय १०४
लोमश उवाच
शैव्या च सुषुवे पुत्रं कुमारं देवरूपिणम् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७
सञ्जय़ उवाच
शैव्यात्मजः काशिपतिः शिविश्च; हृष्टा नदन्तो व्यकिरञ्शरौघैः ||
२५ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७१
सञ्जय़ उवाच
शैव्यो गोवासनो युद्धे काश्यपुत्रं महारथम् |
११ क
द्रोण पर्व
अध्याय ७०
सञ्जय़ उवाच
शैव्यो गोवासनो राजा योधैर्दशशतावरैः |
३८ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१४
भीष्म उवाच
शैशिरं गिरिमुद्दिश्य सधर्मा मातरिश्वनः ||
२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २२८
व्यास उवाच
शैशिरस्तु यथा धूमः सूक्ष्मः संश्रय़ते नभः |
१७ क
वन पर्व
अध्याय १६४
अर्जुन उवाच
शैशिरस्य गिरेः पादे प्रादुरासन्समीपतः ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १०१
सञ्जय़ उवाच
शैशुपालिः सुसङ्क्रुद्धो यन्तारमिदमव्रवीत् ||
२२ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
गृध्र उवाच
शोकं त्यजत दैन्यं च सुतस्नेहान्निवर्तत |
३६ क
भीष्म पर्व
अध्याय १५
धृतराष्ट्र उवाच
शोकं दुःखं च दैन्यं च प्राजहात्पुत्रलक्ष्मणि ||
३९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ४
कृप उवाच
शोकं मे वर्धय़त्येष वारिवेग इवार्णवम् |
२९ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
शोकं राजन्व्यपनुद श्रुतास्ते वेदनिश्चय़ाः |
२२ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३१
व्राह्मण उवाच
शोकः क्रोधोऽतिसंरम्भो राजसास्ते गुणाः स्मृताः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय २२०
भीष्म उवाच
शोककाले शुचो मा त्वं हर्षकाले च मा हृषः |
६५ क
वन पर्व
अध्याय ७४
वृहदश्व उवाच
शोकजं वारि नेत्राभ्यामसुखं प्रास्रवद्वहु ||
१४ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ७
वैशम्पाय़न उवाच
शोकजं वाष्पमुत्सृज्य पुनर्वचनमव्रवीत् ||
१५ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २९०
भीष्म उवाच
शोकतृष्णामहावर्तं तीक्ष्णव्याधिमहागजम् ||
६४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १४९
भीष्म उवाच
शोकदैन्यसमाविष्टा रुदन्तस्तस्थिरे तदा |
१०५ क