chevron_left  शोकपङ्कार्णवाद्घोरादुद्धरस्वarrow_drop_down
उद्योग पर्व
अध्याय १७६
अम्वो उवाच
शोकपङ्कार्णवाद्घोरादुद्धरस्व च मां विभो ||
२७ ख
आदि पर्व
अध्याय १३०
दुर्योधन उवाच
शोकपावकमुद्भूतं कर्मणैतेन नाशय़ ||
२० ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
शोकमस्मत्कृतं प्राप्य न म्रिय़ेतेति चिन्त्यते ||
८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ७७
सञ्जय़ उवाच
शोकमीय़ुः परं चैव कुरवः सर्व एव ते |
३२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १५७
युधिष्ठिर उवाच
शोकमोहौ विवित्सा च परासुत्वं तथा मदः ||
१ ख
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
शोकविप्रहतज्ञानो यानमेवान्वपद्यत ||
४ ख
सभा पर्व
अध्याय ७०
वैशम्पाय़न उवाच
शोकविह्वलय़ा वाचा कृच्छ्राद्वचनमव्रवीत् ||
३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५२
सञ्जय़ उवाच
शोकसंमूढहृदय़ो दुःखेनाभिहतो भृशम् |
२ क
भीष्म पर्व
अध्याय ६१
सञ्जय़ उवाच
शोकसंमूढहृदय़ो निशाकाले स्म कौरवः |
२५ क
शल्य पर्व
अध्याय ६४
सञ्जय़ उवाच
शोकसंविग्नमनसश्चिन्ताध्यानपराभवन् ||
४३ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ७८
वैशम्पाय़न उवाच
शोकसन्तप्तहृदय़ा रुदती सा ततः शुभा |
३९ क
विराट पर्व
अध्याय १७
द्रौपद्यु उवाच
शोकसागरमध्यस्थां किं मां भीम न पश्यसि ||
२९ ख
सौप्तिक पर्व
अध्याय ११
वैशम्पाय़न उवाच
शोकस्तपति मां पार्थ हुताशन इवाशय़म् ||
१३ ख
द्रोण पर्व
अध्याय ५७
सञ्जय़ उवाच
शोकस्थानं तु तच्छ्रुत्वा पार्थस्य द्विजकेतनः |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय २
विदुर उवाच
शोकस्थानसहस्राणि भय़स्थानशतानि च |
१३ क
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
शोकस्थानसहस्राणि भय़स्थानशतानि च |
१५ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३१७
नारद उवाच
शोकस्थानसहस्राणि भय़स्थानशतानि च |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय १६८
व्राह्मण उवाच
शोकस्थानसहस्राणि हर्षस्थानशतानि च |
३१ क
शान्ति पर्व
अध्याय २६
वैशम्पाय़न उवाच
शोकस्थानसहस्राणि हर्षस्थानशतानि च |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय १५५
सञ्जय़ उवाच
शोकस्थाने परे प्राप्ते हैडिम्वस्य वधेन वै ||
६ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
शोकस्यान्तं न पश्यामि समुद्रस्येव विप्लुकाः |
३२ क
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
शोकस्यान्तमपश्यन्वै हतं मत्वा सुय़ोधनम् |
१ ख
वन पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
शोकहर्षौ तथाय़ासः सर्वं स्नेहात्प्रवर्तते ||
२७ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
वैशम्पाय़न उवाच
शोकाग्निना दह्यमानो धम्यमान इवाशय़ः ||
८ ख
शान्ति पर्व
अध्याय २७५
युधिष्ठिर उवाच
शोकाद्दुःखाच्च मृत्योश्च त्रस्यन्ति प्राणिनः सदा |
१ क
शान्ति पर्व
अध्याय ३३५
व्यास उवाच
शोकापनय़नं चक्रे व्रह्मणः पुरुषोत्तमः ||
६५ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १
वैशम्पाय़न उवाच
शोकापहं नरेन्द्रस्य सञ्जय़ो वाक्यमव्रवीत् ||
२१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ५
धृतराष्ट्र उवाच
शोकार्णवे निमग्नोऽहमप्लवः सागरे यथा ||
२३ ख
कर्ण पर्व
अध्याय ३
वैशम्पाय़न उवाच
शोकार्णवे महाघोरे निमग्ना भरतस्त्रिय़ः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय ४६
सञ्जय़ उवाच
शोकार्तं पाण्डवं ज्ञात्वा दुःखेन हतचेतसम् |
२६ क
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
शोकार्तान्यद्रवन्राजन्किशोरीणामिवाङ्गने ||
१२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय १४२
भीष्म उवाच
शोकार्ताश्च महात्मानं व्रह्माणं शरणं यय़ुः ||
३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
भीष्म उवाच
शोके न ह्यस्ति सामर्थ्यं शोकं कुर्यात्कथं नरः ||
१६ ख
विराट पर्व
अध्याय १८
द्रौपद्यु उवाच
शोके यौधिष्ठिरे मग्ना नाहं जीवितुमुत्सहे ||
८ ख
आदि पर्व
अध्याय १६७
गन्धर्व उवाच
शोके वुद्धिं ततश्चक्रे न चैकत्र व्यतिष्ठत |
७ क
आदि पर्व
अध्याय ९
सूत उवाच
शोकेनाभिहतः सोऽथ विलपन्करुणं वहु |
२ क
स्त्री पर्व
अध्याय ९
वैशम्पाय़न उवाच
शोकेनाभ्याहतज्ञानाः कर्तव्यं न प्रजज्ञिरे ||
१४ ख
स्त्री पर्व
अध्याय १८
गान्धार्यु उवाच
शोकेनार्ता विघूर्णन्त्यो मत्ता इव चरन्त्युत ||
४ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय ९५
भरद्वाज उवाच
शोको भार्यापवादेन तेन पीवाञ्शुनःसखः ||
९ ख
वन पर्व
अध्याय ५९
वृहदश्व उवाच
शोकोन्मथितचित्तात्मा न स्म शेते यथा पुरा ||
८ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २९
वैशम्पाय़न उवाच
शोकोपहतविज्ञाना नष्टसञ्ज्ञा इवाभवन् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय १५८
सञ्जय़ उवाच
शोकोपहतसङ्कल्पं दह्यमानमिवाग्निना |
५३ ख
शल्य पर्व
अध्याय ५९
सञ्जय़ उवाच
शोकोपहतसङ्कल्पं वासुदेवोऽव्रवीदिदम् ||
२८ ख
वन पर्व
अध्याय २३६
वैशम्पाय़न उवाच
शोकोपहतय़ा वुद्ध्या चिन्तय़ानः पराभवम् ||
६ ख
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २४
वैशम्पाय़न उवाच
शोचतां शोच्यमानानां पौरजानपदैर्जनैः ||
२४ ख
वन पर्व
अध्याय २०६
व्याध उवाच
शोचतो न भवेत्किञ्चित्केवलं परितप्यते ||
१८ ग
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय ३७
वैशम्पाय़न उवाच
शोचत्यतीव साध्वी ते स्नुषाणां दय़िता स्नुषा ||
७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १३४
मातो उवाच
शोचन्तमनुशोचन्ति प्रतीतानिव वान्धवान् ||
४ ग
भीष्म पर्व
अध्याय २
वैशम्पाय़न उवाच
शोचन्तमार्तं ध्याय़न्तं पुत्राणामनय़ं तदा ||
३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय १२२
वैशम्पाय़न उवाच
शोचन्ते व्यसने तस्य सुहृदो नचिरादिव ||
२४ ख