सौप्तिक पर्व
अध्याय
९
सञ्जय़ उवाच
सौप्तिके शिविरं तेषां हतं सनरवाहनम् ||
५० ख
आदि पर्व
अध्याय
२
सूत उवाच
सौप्तिकैषीकसम्वन्धे पर्वण्यमितवुद्धिना ||
१९० ख
वन पर्व
अध्याय
२३
वासुदेव उवाच
सौभं कामगमं वीर मोहय़न्मम चक्षुषी ||
९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१०
धृतराष्ट्र उवाच
सौभं दैत्यपुरं स्वस्थं शाल्वगुप्तं दुरासदम् |
१४ क
स्त्री पर्व
अध्याय
२०
गान्धार्यु उवाच
सौभद्र विहरन्काले स्मरेथाः सुकृतानि मे ||
२५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
३
सात्यकिरु उवाच
सौभद्रं च महेष्वासममरैरपि दुःसहम् |
१९ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१
युधिष्ठिर उवाच
सौभद्रं द्रौपदेय़ांश्च घातय़ित्वा प्रिय़ान्सुतान् |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रं शतशोऽविध्यदुत्तमास्त्राणि दर्शय़न् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३६
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रं शरवर्षेण महता समवाकिरन् ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रः पौरवं त्वन्यैर्विद्ध्वा सप्तभिराशुगैः |
४८ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९६
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रः समरे क्रुद्धः प्रेषय़ामास साय़कान् ||
४ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रचापप्रभवैर्निकृत्ताः परमेषुभिः |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
७३
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रप्रमुखा वीरा रथा द्वादश दंशिताः |
५२ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमथ संसक्तं तत्र दृष्ट्वा धनञ्जय़ः |
१७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
३८
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमभ्ययात्क्रुद्धः शरवर्षैरवाकिरन् ||
२६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमभ्ययात्तूर्णं दृढमुद्यम्य कार्मुकम् ||
३० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४६
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमितरे वीरमभ्यवर्षञ्शराम्वुभिः |
६ क
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमिन्द्रप्रतिमं कृतास्त्रं; तदा युद्धं धार्तराष्ट्रोऽन्वतप्स्यत् ||
२९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रमुद्यतास्त्रातुमभिधावन्ति पाण्डवाः ||
२१ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
१४५
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रवदिमौ वीरौ परिवार्य महारथौ |
५५ क
आश्रमवासिक पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
सौभद्रवधसन्तप्ता भृशं शोचति भामिनी ||
८ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४५
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रविशिखैश्छिन्नः पपात भुवि भारत ||
२५ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रशरनिर्भिन्नो विसञ्ज्ञः शोणितोक्षितः |
७३ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रश्च महावाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रश्चाद्रवत्सेनां निघ्नन्नश्वरथद्विपान् |
२१ क
भीष्म पर्व
अध्याय
४३
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रस्तु ततः क्रुद्धः पातिते रथसारथौ |
१५ क
द्रोण पर्व
अध्याय
४०
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रस्तु ततः शङ्खं प्रध्माप्य पुरुषर्षभः |
११ क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रस्तु रणे रक्षः शरैः संनतपर्वभिः |
२० क
द्रोण पर्व
अध्याय
३५
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रस्तु वचः श्रुत्वा धर्मराजस्य धीमतः |
१ क
कर्ण पर्व
अध्याय
५
धृतराष्ट्र उवाच
सौभद्रस्य महावाहुर्व्यधमत्कार्मुकं शरैः ||
६८ ख
विराट पर्व
अध्याय
६७
वैशम्पाय़न उवाच
सौभद्रस्यानवद्याङ्गीं विराटतनय़ां तदा ||
३२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५५
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रादीन्द्रौपदेय़ान्कुमारा; न्वहन्त्यश्वा देवदत्ता वृहन्तः ||
१६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
३२
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रे निहते राजन्नवहारमकुर्वत ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४५
धृतराष्ट्र उवाच
सौभद्रे प्रतिपत्तिं कां प्रत्यपद्यन्त मामकाः ||
३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रे भीमसेने च शैनेय़े च महारथे |
८ क
उद्योग पर्व
अध्याय
५६
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रेण कृतो भागो राजा चैव वृहद्वलः ||
१९ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रेण हतैः पूर्वं सोत्तराय़ुधिभिर्द्विपैः |
१७ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रेण हि विक्रम्य गमितो यमसादनम् ||
२१ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१४९
वैशम्पाय़न उवाच
सौभद्रो द्रौपदेय़ाश्च धृष्टद्युम्नश्च पार्षतः |
५० ख
भीष्म पर्व
अध्याय
७१
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रो द्रौपदेय़ाश्च राक्षसश्च घटोत्कचः |
७ क
भीष्म पर्व
अध्याय
२३
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रो द्रौपदेय़ाश्च सर्व एव महारथाः ||
६ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
५०
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रो निधनं गच्छेद्वज्रिणापि समागतः ||
७३ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
११२
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रो राजपुत्रं तु वृहद्वलमय़ोधय़त् |
३० क
भीष्म पर्व
अध्याय
९७
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रोऽपि रणे राजन्सिंहवद्विनदन्मुहुः |
९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१४
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रोऽप्यशनिप्रख्यां प्रगृह्य महतीं गदाम् |
६ क
भीष्म पर्व
अध्याय
५१
सञ्जय़ उवाच
सौभद्रोऽभ्यपतत्तूर्णं विकिरन्निशिताञ्शरान् ||
५ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
४७
सञ्जय़ उवाच
सौभद्वारि प्रत्यगृह्णाच्छतघ्नीं; दोर्भ्यां क एनं विषहेत मर्त्यः ||
७३ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१२८
वैशम्पाय़न उवाच
सौभद्वारे वानरेन्द्रो द्विविदो नाम नामतः |
४१ क
वन पर्व
अध्याय
२०
वासुदेव उवाच
सौभमास्थाय़ राजेन्द्र दिवमाचक्रमे तदा ||
२७ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
१७६
अम्वो उवाच
सौभराजमुपेत्याहमव्रुवं दुर्वचं वचः |
३६ क