द्रोण पर्व
अध्याय
८८
सञ्जय़ उवाच
आगच्छत प्रहरत द्रुतं विपरिधावत |
३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१००
सञ्जय़ उवाच
आगच्छत प्रहरत वलवत्परिधावत |
१३ क
शल्य पर्व
अध्याय
३४
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छत महावाहुरुपप्लव्यं जनाधिप ||
७ ख
भीष्म पर्व
अध्याय
१०६
सञ्जय़ उवाच
आगच्छतस्तान्समरे वार्योघान्प्रवलानिव |
२३ क
द्रोण पर्व
अध्याय
११०
सञ्जय़ उवाच
आगच्छतस्तान्सहसा कुमारान्देवरूपिणः |
३१ क
द्रोण पर्व
अध्याय
९०
सञ्जय़ उवाच
आगच्छतस्तान्सहसा क्रुद्धरूपान्सहानुगान् |
७ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१११
सञ्जय़ उवाच
आगच्छतस्तान्सहसा भीमो राजन्महारथः |
१९ क
द्रोण पर्व
अध्याय
१५९
सञ्जय़ उवाच
आगच्छतस्तान्सहसा सर्वोद्योगेन पाण्डवान् |
९ क
कर्ण पर्व
अध्याय
३०
सञ्जय़ उवाच
आगच्छता महाराज वाह्लीकेषु निशामितम् ||
५२ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
११
शल्य उवाच
आगच्छतु शची मह्यं क्षिप्रमद्य निवेशनम् ||
१५ ख
वन पर्व
अध्याय
५१
वृहदश्व उवाच
आगच्छतो महीपालानतिथीन्दय़ितान्मम ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
५७
सौदास उवाच
आगच्छतो हि ते विप्र भवेन्मृत्युरसंशय़म् ||
१५ ख
सभा पर्व
अध्याय
३१
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छत्पाण्डवेय़स्य यज्ञं सङ्ग्रामदुर्मदः ||
१४ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
५३
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छत्स्वथ कृष्णोऽपि पाण्डवेषु महात्मसु |
१९ क
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
१६
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छद्व्राह्मणः कश्चित्स्वर्गलोकादरिन्दम |
१४ क
भीष्म पर्व
अध्याय
१३
सञ्जय़ उवाच
आगच्छन्ति महाराज ततस्तिष्ठन्ति वै प्रजाः ||
३७ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
२९०
भीष्म उवाच
आगच्छन्ति यथाकालं गुरोः सन्देशकारिणः ||
९३ ख
सभा पर्व
अध्याय
६६
धृतराष्ट्र उवाच
आगच्छन्तु पुनर्द्यूतमिदं कुर्वन्तु पाण्डवाः ||
२४ ख
उद्योग पर्व
अध्याय
५४
दुर्योधन उवाच
आगच्छन्तु विनेष्यामो दर्पमेषां शितैः शरैः ||
१९ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१५०
शल्मलिरु उवाच
आगच्छन्परमो वाय़ुर्मय़ा विष्टम्भितो वलात् |
२५ क
विराट पर्व
अध्याय
५९
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छन्पुङ्खसंश्लिष्टाः श्वेतवाहनपत्रिणः ||
३१ ख
विराट पर्व
अध्याय
५६
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छन्भीमधन्वानं मौर्वीं पर्यस्य वाहुभिः ||
१८ ख
सभा पर्व
अध्याय
११
नारद उवाच
आगच्छन्मानुषं लोकं दिदृक्षुर्विगतक्लमः ||
१ ख
कर्ण पर्व
अध्याय
३९
सञ्जय़ उवाच
आगच्छमानांस्तान्दृष्ट्वा रौद्ररूपान्परन्तपः |
२६ क
कर्ण पर्व
अध्याय
४२
सञ्जय़ उवाच
आगच्छमानांस्तान्सङ्ख्ये प्रहृष्टान्विजय़ैषिणः |
५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
आगच्छमाश्रमं क्रीडन्मुनीनां भावितात्मनाम् ||
७६ ख
वन पर्व
अध्याय
२१३
कन्यो उवाच
आगच्छावेह रत्यर्थमनुज्ञाप्य प्रजापतिम् ||
१७ ख
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय
७५
वैशम्पाय़न उवाच
आगच्छेथा महाराज परां चैत्रीमुपस्थिताम् |
२५ क
अनुशासन पर्व
अध्याय
५३
भीष्म उवाच
आगच्छेथाः सभार्यश्च त्वमिहेति नराधिप ||
६३ ख
वन पर्व
अध्याय
१४
वासुदेव उवाच
आगच्छेय़महं द्यूतमनाहूतोऽपि कौरवैः |
२ क
शान्ति पर्व
अध्याय
१३८
भीष्म उवाच
आगतं तु भय़ं दृष्ट्वा प्रहर्तव्यमभीतवत् ||
३३ ख
शान्ति पर्व
अध्याय
१०१
भीष्म उवाच
आगतं नो मित्रवलं प्रहरध्वमभीतवत् |
४६ क
आदि पर्व
अध्याय
१५४
व्राह्मण उवाच
आगतं वित्तकामं मां विद्धि द्रोणं द्विजर्षभ ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१२१
वैशम्पाय़न उवाच
आगतं वित्तकामं मां विद्धि द्रोणं द्विजर्षभम् ||
१७ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
११८
कीट उवाच
आगतं वै महावुद्धे स्वन एष हि दारुणः |
१० ख
वन पर्व
अध्याय
१५
कृष्ण उवाच
आगतः कामगं सौभमारुह्यैव नृशंसकृत् ||
६ ख
विराट पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
आगतः क्लीववेषेण पार्थो नास्त्यत्र संशय़ः ||
९ ख
आदि पर्व
अध्याय
१९९
वैशम्पाय़न उवाच
आगतः प्रिय़मस्माकं चिकीर्षुर्नात्र संशय़ः ||
१८ ख
द्रोण पर्व
अध्याय
६१
धृतराष्ट्र उवाच
आगतः सर्वभूतानामनुकम्पार्थमच्युतः ||
२१ ख
आदि पर्व
अध्याय
१४९
व्राह्मण उवाच
आगतस्य गृहे त्यागस्तथैव शरणार्थिनः |
१० क
वन पर्व
अध्याय
५८
वृहदश्व उवाच
आगता न हि नः प्रीतिः सवाससि गते त्वय़ि ||
१५ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
८१
श्रीरु उवाच
आगता प्रार्थय़ानाहं श्रीजुष्टा भवतानघाः ||
९ ग
उद्योग पर्व
अध्याय
१८३
भीष्म उवाच
आगता ये च युद्धं तज्जनास्तत्र दिदृक्षवः |
११ ख
शल्य पर्व
अध्याय
३७
वैशम्पाय़न उवाच
आगता सरितां श्रेष्ठा तत्र भारत पूजिता ||
१८ ख
आदि पर्व
अध्याय
२१८
वैशम्पाय़न उवाच
आगतांश्चैव तान्दृष्ट्वा देवानेकैकशस्ततः |
४० क
शान्ति पर्व
अध्याय
१४०
भीष्म उवाच
आगतागमय़ा वुद्ध्या वचनेन प्रशस्यते ||
२० ख
द्रोण पर्व
अध्याय
७५
सञ्जय़ उवाच
आगतानग्रसत्पार्थः सरितः सागरो यथा ||
७ ख
वन पर्व
अध्याय
४८
सञ्जय़ उवाच
आगतानहमद्राक्षं यज्ञे ते परिवेषकान् ||
२२ ख
अनुशासन पर्व
अध्याय
३४
भीष्म उवाच
आगतानागते चोभे व्राह्मणो द्विपदां वरः |
१२ ख
आदि पर्व
अध्याय
१७५
युधिष्ठिर उवाच
आगतानेकचक्राय़ाः सोदर्यान्देवदर्शिनः |
४ क